पुणे: पुणे की एक रबर कंपनी को Vendor Registration कराने का झांसा देकर साइबर ठगों ने ₹3.96 लाख की रकम हड़प ली। ठगी का पता तब चला, जब कंपनी के कर्मचारियों से आगे ₹6.33 लाख जमा करने को कहा गया और उन्होंने कथित कारोबारी कंपनी से सीधे संपर्क किया। वहां से जानकारी मिली कि कंपनी ने न तो कोई रकम मांगी थी और न ही ऐसी भुगतान प्रक्रिया उसकी नीति का हिस्सा थी। इसके बाद कंपनी के वरिष्ठ मार्केटिंग मैनेजर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। एयरपोर्ट पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के अनुसार, 22 जुलाई को पीड़ित कंपनी के एक कर्मचारी को ईमेल प्राप्त हुआ। इसमें गुजरात की एक कंपनी के साथ Vendor Registration कराने के लिए आवश्यक जानकारी मांगी गई थी। ईमेल को वास्तविक कारोबारी प्रस्ताव समझकर कंपनी की ओर से मांगी गई जानकारी भेज दी गई। इसके कुछ समय बाद रबर कंपनी को एक Vendor Registration Form भेजा गया। साथ ही Registration Fee जमा करने के लिए एक बैंक खाते का विवरण भी उपलब्ध कराया गया।
कंपनी के कर्मचारियों को इस प्रक्रिया में कोई असामान्य बात नजर नहीं आई। कंपनी के Accounts Department ने दिए गए बैंक खाते में 30 जुलाई को ₹3.96 लाख ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने रकम हासिल करने के बाद भी कंपनी से संपर्क बनाए रखा। अगले ही दिन एक और ईमेल भेजकर ₹6.33 लाख की अतिरिक्त राशि जमा करने को कहा गया।
इस बार साइबर ठगों ने कथित तौर पर दबाव बनाने के लिए एक बड़े कारोबारी अवसर का हवाला दिया। ईमेल में दावा किया गया कि संबंधित गुजरात की कंपनी ने ₹2.11 करोड़ का टेंडर जारी किया है और इस प्रक्रिया में आगे बढ़ने के लिए अतिरिक्त रकम जमा करना जरूरी है। कंपनी के कर्मचारियों को यह भी संकेत दिया गया कि भुगतान पूरा करने के बाद Vendor के रूप में कारोबारी अवसर हासिल किया जा सकता है।
अतिरिक्त ₹6.33 लाख की मांग ने कंपनी के अधिकारियों को संदेह में डाल दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने गुजरात स्थित संबंधित कंपनी के कार्यालय से सीधे संपर्क किया। वहां अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से किसी भी प्रकार की Registration Fee या Deposit की मांग नहीं की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी की नीति में Vendor Registration के नाम पर इस तरह का भुगतान मांगने का कोई प्रावधान नहीं है।
संबंधित कंपनी से जानकारी मिलने के बाद रबर फर्म के अधिकारियों को समझ आया कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद वरिष्ठ मार्केटिंग मैनेजर ने एयरपोर्ट पुलिस से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी। पुलिस अब उस बैंक खाते की जानकारी जुटा रही है, जिसमें ₹3.96 लाख ट्रांसफर किए गए थे। जांच के दौरान रकम के आगे ट्रांसफर होने, खाते के वास्तविक धारक और ईमेल भेजने वाले आरोपियों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है।
प्रारंभिक तौर पर मामला कारोबारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाली Email-Based Fraud की रणनीति से जुड़ा दिखाई दे रहा है। ऐसे मामलों में ठग किसी वास्तविक कंपनी के नाम और कारोबारी प्रक्रिया का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज, भुगतान निर्देश और बैंक खाते भेजते हैं। बड़ी कंपनियों के Vendor Registration, Tender और Procurement Process को निशाना बनाकर ठगी की जाती है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग लेनदेन के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
