डिजिटल अरेस्ट और चाइल्ड पोर्नोग्राफी के नाम पर डराकर वसूली का आरोप; 23 क्रिप्टो वॉलेट से ₹16 करोड़ के लेनदेन का पता, चीन से जुड़े साइबर नेटवर्क की भी जांच

एक आरोपी, 1,090 साइबर अपराध और ₹1,071 करोड़ का जाल; 1,754 खातों में बांटी गई ठगी की रकम

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By Roopa
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अहमदाबाद: देशभर में डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के नाम पर चल रहे एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। असम निवासी 25 वर्षीय रफीकुल आलम को गिरफ्तार किए जाने के बाद जांच में करीब ₹1,071 करोड़ की संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी और 1,090 अपराधों से जुड़े सुराग सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी पर लोगों को पुलिस, CBI, ED और अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर डराने वाले नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप है। कई मामलों में पीड़ितों पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाकर उनसे रकम वसूलने की बात सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक, बीसीए तक पढ़ा रफीकुल आलम इस कथित नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी था। गिरोह के सदस्य वीडियो कॉल और दूसरे डिजिटल माध्यमों से पीड़ितों से संपर्क करते थे। उन्हें बताया जाता था कि उनके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है और गिरफ्तारी से बचने के लिए तत्काल भुगतान करना होगा। इसके बाद पीड़ितों को लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया जाता और मानसिक दबाव बनाया जाता था।

जांच में सामने आया है कि पीड़ितों को कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट जैसा माहौल देकर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी। उन्हें परिवार या अन्य लोगों से संपर्क करने से रोकने की कोशिश की जाती और रकम ट्रांसफर होने तक दबाव जारी रखा जाता था। गुजरात में अहमदाबाद, सूरत और जामनगर के अलावा पांच अन्य राज्यों से भी ऐसे मामलों के सुराग मिले हैं। पुलिस अब इन शिकायतों के बीच आपसी कनेक्शन की जांच कर रही है।

जांच का सबसे अहम पहलू ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में बांटने का तरीका है। पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से हासिल रकम को एक खाते में रखने के बजाय 1,754 बैंक खातों में अलग-अलग हिस्सों में ट्रांसफर किया गया। इस प्रक्रिया का कथित उद्देश्य रकम के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थियों तक जांच एजेंसियों की पहुंच मुश्किल बनाना था। कुछ मामलों में बैंकिंग लेनदेन की पूरी प्रक्रिया करीब तीन घंटे में पूरी किए जाने की बात सामने आई है।

पुलिस के मुताबिक, बैंक खातों में पहुंचने के बाद रकम को कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था। इसके बाद इसे विदेश स्थित नेटवर्क तक भेजे जाने की आशंका की जांच की जा रही है। रफीकुल आलम के मोबाइल फोन की जांच के दौरान 23 क्रिप्टो वॉलेट मिले। इन वॉलेट से जुड़े लेनदेन की पड़ताल में करीब ₹16 करोड़ के क्रिप्टो ट्रांजैक्शन का पता चला है।

जांच में आरोपी के चीन से कथित संपर्क को भी अहम कड़ी माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, आलम व्हाट्सऐप के जरिए एक चीनी महिला समेत चीनी साइबर अपराधियों के संपर्क में था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि भारत में साइबर ठगी से हासिल रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर चीन से जुड़े नेटवर्क तक भेजा जाता था या नहीं। इसके लिए मोबाइल चैट, बैंकिंग रिकॉर्ड, क्रिप्टो वॉलेट और डिजिटल संपर्कों की जांच की जा रही है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में अपराधी तकनीकी माध्यमों से ज्यादा भय, दबाव और संस्थागत पहचान के दुरुपयोग को हथियार बनाते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस, CBI, ED या अदालत के नाम पर वीडियो कॉल करके किसी व्यक्ति से गिरफ्तारी से बचाने के लिए पैसे मांगना वैध कानूनी प्रक्रिया नहीं है। ऐसे मामलों में पीड़ित को घबराकर भुगतान करने के बजाय संबंधित एजेंसी से आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना चाहिए। उन्होंने लोगों को OTP, बैंकिंग विवरण, पहचान संबंधी दस्तावेज या रकम किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी।

जांच एजेंसियों ने आरोपी के मोबाइल फोन, बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड, क्रिप्टो वॉलेट और अन्य डिजिटल साक्ष्य कब्जे में लिए हैं। अब बैंक खातों और क्रिप्टो लेनदेन के जरिए पूरे मनी ट्रेल को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि रफीकुल आलम इस नेटवर्क की केवल एक महत्वपूर्ण कड़ी हो सकता है और उसके डिजिटल संपर्कों से अन्य आरोपियों तथा विदेश स्थित नेटवर्क के बारे में जानकारी मिल सकती है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि 1,090 अपराधों में कितने लोग सीधे तौर पर शामिल थे, कितने बैंक खाते इस्तेमाल किए गए और ठगी की रकम का अंतिम लाभ किसे मिला। जांच आगे बढ़ने के साथ कथित अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की संरचना स्पष्ट होने की उम्मीद है। लोगों से अपील की गई है कि यदि कोई पुलिस, CBI, ED, सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य सरकारी संस्था का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करे और गंभीर अपराध में फंसाने की धमकी देकर पैसे मांगे, तो घबराएं नहीं। ऐसी स्थिति में तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में शिकायत करें।

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