नर्मदापुरम में डीजल पर डिस्काउंट और फर्जी फ्यूल कार्ड के नाम पर किसान से ₹4.35 लाख की कथित साइबर ठगी हुई।

बिना लिंक, ओटीपी और संदिग्ध संदेश के दो बैंक खातों से ₹4.91 लाख गायब, पट्टी में साइबर ठगी का केस दर्ज

Team The420
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पट्टी (प्रतापगढ़)। साइबर ठगी के मामलों में अब बिना किसी लिंक पर क्लिक कराए, ओटीपी साझा कराए या संदिग्ध संदेश भेजे बिना बैंक खातों से रकम निकाले जाने का मामला सामने आया है। पट्टी क्षेत्र में एक व्यक्ति के दो अलग-अलग बैंक खातों से कुल ₹4,91,616 की निकासी कर ली गई। खाताधारक को इसकी जानकारी तब हुई, जब उसके मोबाइल पर रकम निकाले जाने का संदेश आया। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लेनदेन और रकम निकाले जाने के तरीके की जांच शुरू कर दी है।

सदहा थाना क्षेत्र निवासी कैलाश नाथ पांडेय के नाम पर प्रतापगढ़ स्थित आईसीआईसीआई बैंक की शाखा में बचत खाता है, जबकि उनका एक चालू खाता कानपुर में है। शिकायत के अनुसार, 9 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच दोनों खातों से अलग-अलग लेनदेन के जरिए कुल ₹4,91,616 निकाल लिए गए।

पीड़ित के मुताबिक, उन्हें इस दौरान न तो किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा गया और न ही किसी व्यक्ति के साथ ओटीपी साझा किया गया। कोई ऐसा संदेश भी प्राप्त नहीं हुआ, जिससे उन्हें खाते में किसी अनधिकृत गतिविधि का तत्काल अंदाजा हो सके। करीब शाम 5 बजे मोबाइल पर रकम निकाले जाने का संदेश आने के बाद उन्हें दोनों बैंक खातों से पैसे निकलने की जानकारी मिली।

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मोबाइल पर संदेश देखने के बाद कैलाश नाथ पांडेय ने तत्काल बैंक के ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क किया। उन्होंने दोनों खातों में होने वाले आगे के लेनदेन को रुकवाने के लिए खाते बंद करवाए। इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से भी साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई। रकम बड़ी होने के कारण उन्होंने स्थानीय पुलिस से भी कार्रवाई की मांग की।

पीड़ित ने पट्टी कोतवाली पहुंचकर लिखित शिकायत दी और खाते से निकाली गई रकम वापस दिलाने के साथ ही साइबर ठगी में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई की मांग की। शिकायत में दोनों बैंक खातों से हुई निकासी का विवरण भी पुलिस को उपलब्ध कराया गया है।

पुलिस ने शिकायत के आधार पर 11 सितंबर को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जांचकर्ताओं की प्राथमिकता यह पता लगाना है कि आरोपियों ने बैंक खातों तक किस तरीके से पहुंच बनाई और बिना ओटीपी या किसी स्पष्ट संदिग्ध गतिविधि के रकम निकालने में उन्हें किस माध्यम का इस्तेमाल किया गया।

पुलिस दोनों बैंक खातों से जुड़े लेनदेन का विवरण खंगाल रही है। निकाली गई रकम किन खातों में गई, किस माध्यम से स्थानांतरित हुई और उसके बाद कहां-कहां भेजी गई, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही रकम निकाले जाने के समय और उससे पहले खातों में हुई गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।

मामले में बैंकिंग लेनदेन से जुड़े तकनीकी विवरण भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कहीं खाते की जानकारी, बैंकिंग प्रमाण-पत्र या किसी अन्य माध्यम से अनधिकृत पहुंच तो हासिल नहीं की गई थी। पुलिस संभावित डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ठगी में शामिल लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आम तौर पर साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों को फर्जी लिंक, ओटीपी, केवाईसी अपडेट, बैंक अधिकारी बनकर फोन या अन्य तरीकों से निशाना बनाया जाता है। इस मामले में पीड़ित की शिकायत के मुताबिक ऐसी कोई प्रत्यक्ष गतिविधि सामने नहीं आई, जबकि दोनों खातों से लाखों रुपये निकल गए। अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि रकम निकासी के पीछे किस तकनीकी या बैंकिंग तरीके का इस्तेमाल किया गया।

पुलिस ने कहा है कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और बैंक खातों से जुड़े लेनदेन तथा अन्य विवरणों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रकम निकासी के तरीके और आरोपियों की पहचान के संबंध में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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