प्रवर्तन निदेशालय ने नौ आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की; ₹131.13 करोड़ की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क, कथित मास्टरमाइंड पर फर्जी खातों और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के जरिए सरकारी धन हड़पने का आरोप

कोटक महिंद्रा बैंक–पंचकूला नगर निगम धोखाधड़ी: ED का दावा, ₹100 करोड़ से अधिक की कथित ठगी की रकम से खरीदी गईं Porsche, BMW और Harley-Davidson

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By Roopa
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चंडीगढ़: पंचकूला नगर निगम (MC) और कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़े ₹100 करोड़ से अधिक के कथित वित्तीय घोटाले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दावा किया है कि मामले के कथित मास्टरमाइंड पुष्पिंदर सिंह ने अपराध से अर्जित धन का उपयोग कई लग्जरी वाहन खरीदने में किया। एजेंसी के अनुसार, इनमें Porsche Cayenne, BMW 740Li, BMW X7, BMW 749i, BMW Z4, दो Jeep Wrangler (2021 और 2024 मॉडल), Toyota Land Cruiser तथा Harley-Davidson मोटरसाइकिल शामिल हैं। ED का आरोप है कि घोटाले के सामने आने के बाद इन वाहनों को तीसरे पक्ष को बेच दिया गया। हालांकि, एजेंसी के इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही होगा।

ED की चंडीगढ़ जोनल यूनिट ने बताया कि उसने 30 जुलाई को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत नौ आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल की है। इससे पहले 29 जुलाई को एजेंसी ने ₹131.13 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Provisional Attachment) करने का आदेश जारी किया था। कुर्क की गई संपत्तियों में ₹12.85 करोड़ की बैंक जमा राशि और ₹118.28 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियां शामिल हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच पंचकूला भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है। FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कोटक महिंद्रा बैंक के अज्ञात अधिकारियों और कर्मचारियों पर पंचकूला नगर निगम के धन के गबन की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।

ED के अनुसार, उस समय बैंक में डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट रहे पुष्पिंदर सिंह ने नगर निगम के अधिकारी विकास कौशिक और बैंक कर्मचारी दिलीप राघव के साथ कथित मिलीभगत कर नगर निगम के नाम पर फर्जी दस्तावेजों और जाली प्राधिकरण पत्रों के आधार पर दो अनधिकृत बैंक खाते खुलवाए। जांच एजेंसी का आरोप है कि नगर निगम द्वारा भेजे गए वास्तविक निर्देशों और अधिकृत पत्रों की अनदेखी की गई, जबकि समानांतर फर्जी प्राधिकरण पत्र तैयार कर इन खातों को संचालित किया गया।

एजेंसी का दावा है कि बाद में नगर निगम के वैध बैंक खातों से बड़ी राशि इन कथित अवैध खातों में स्थानांतरित की गई। ED ने यह भी आरोप लगाया है कि बैंक के एक अन्य कर्मचारी सतीश कुमार ने भी धन को विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर कथित गबन में भूमिका निभाई। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि फर्जी और वास्तविक दोनों खातों से जुड़े मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी ऐसे व्यक्तियों के नियंत्रण में अपडेट किए गए थे, जिससे बैंक की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली को दरकिनार किया जा सके।

जांच एजेंसी के अनुसार, कथित रूप से अवैध खातों में पहुंची राशि बाद में रजत डहरा, स्वाति तोमर, कपिल कुमार, विनोद कुमार और सोनिया सहित कई व्यक्तियों तथा एस.के. एग्रोटेक और एस.के. एग्रोफर्म जैसी संस्थाओं के खातों में भेजी गई। ED का आरोप है कि इन खातों का उपयोग धन की लेयरिंग (Layering) और वास्तविक स्रोत छिपाने के लिए किया गया। इसके बाद राशि कथित रूप से पुष्पिंदर सिंह, उनकी पत्नी प्रीति ठाकुर और उनसे जुड़ी कंपनियों के खातों तक पहुंचाई गई, जहां से संपत्तियां, लग्जरी वाहन, महंगी घड़ियां और अन्य परिसंपत्तियां खरीदी गईं।

ED ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित अपराध से अर्जित धन का उपयोग कई व्यक्तियों और कंपनियों को बिना सुरक्षा के ऊंची ब्याज दर पर ऋण देने में किया गया। एजेंसी के अनुसार, कुछ लेनदेन में प्रतिमाह तीन प्रतिशत (वार्षिक 36 प्रतिशत) तक ब्याज नकद वसूला जाता था। जांच में यह भी दावा किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2022-23 के बाद से प्रीति ठाकुर की आय तथा उनकी कंपनी Chaudhary & Sethi Legal Advisory Pvt. Ltd. के कारोबार और लाभ में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई, जिसका संबंध कथित अपराध से जोड़ा गया है।

ED के मुताबिक, 22 अप्रैल को PMLA की धारा 17 के तहत की गई तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि पंचकूला के सेक्टर-2 स्थित संपत्ति को कथित रूप से “राउंड ट्रिपिंग” के जरिए पुष्पिंदर सिंह की बहन के नाम स्थानांतरित किया गया, ताकि संपत्ति के वास्तविक स्वामित्व को छिपाया जा सके और उसे कुर्की से बचाया जा सके। मामले में ED का दावा है कि नगर निगम के ₹107.24 करोड़ कथित रूप से अवैध खातों और लाभार्थियों के माध्यम से स्थानांतरित किए गए। एजेंसी के अनुसार, पुष्पिंदर सिंह को 1 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था और मामले की जांच अभी जारी है।

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