हरदोई में कोर्ट के आदेश पर FIR; पीड़ित का आरोप- खाते से बिना अनुमति रकम काटकर खरीदे गए फ्लिपकार्ट गिफ्ट वाउचर, बैंक और डिजिटल लेनदेन की जांच शुरू

फ्लिपकार्ट के MD और बैंक मैनेजर पर साइबर ठगी का केस, UPI से पांच बार निकाले ₹89,654

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By Roopa
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हरदोई: हरदोई में साइबर धोखाधड़ी के एक मामले में फ्लिपकार्ट के प्रबंध निदेशक और बैंक ऑफ इंडिया की नघेटा इंडस्ट्रियल स्टेट शाखा के प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई एसीजेएम तृतीय कोर्ट के आदेश के बाद हुई। साइबर क्राइम थाने में दर्ज शिकायत में इंदिरा नगर निवासी कारोबारी विनय मिश्रा ने आरोप लगाया है कि उनके बैंक खाते से उनकी जानकारी और सहमति के बिना UPI के जरिए पांच अलग-अलग लेनदेन में कुल ₹89,654 निकाल लिए गए।

पुलिस ने अदालत के निर्देश के बाद संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में बैंक खाते, UPI लेनदेन और कथित तौर पर खरीदे गए फ्लिपकार्ट गिफ्ट वाउचर से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है। हालांकि, FIR में लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

पांच लेनदेन में खाते से निकली रकम

शहर के इंदिरा नगर निवासी 38 वर्षीय विनय मिश्रा कृष्णा प्रिंटर्स का संचालन करते हैं। शिकायत के मुताबिक, 19 मई 2026 को उनके बैंक खाते से UPI के माध्यम से पांच बार रकम काटी गई। उनके अनुसार, पहली बार ₹29,400, दूसरी बार ₹30,000, तीसरी बार ₹10,127, चौथी बार ₹10,127 और पांचवीं बार ₹10,000 का लेनदेन हुआ।

इन सभी ट्रांजेक्शन को जोड़ने पर खाते से कुल ₹89,654 की रकम निकल गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने इनमें से कोई लेनदेन नहीं किया था और न ही किसी व्यक्ति या संस्था को उनके खाते से रकम निकालने की अनुमति दी थी।

विनय मिश्रा के मुताबिक, उन्हें इस लेनदेन की जानकारी तत्काल नहीं हो सकी। अगले दिन, 20 मई को जब उन्होंने UPI के जरिए भुगतान करने का प्रयास किया तो सुविधा बाधित मिली। इसके बाद उन्होंने बैंक से खाते का स्टेटमेंट निकलवाया और ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई।

गिफ्ट वाउचर खरीद से जुड़ा लेनदेन

शिकायतकर्ता का आरोप है कि बैंक स्टेटमेंट और ऑनलाइन शिकायत की प्रक्रिया के दौरान उन्हें पता चला कि उनके खाते से निकाली गई रकम का इस्तेमाल फ्लिपकार्ट के गिफ्ट वाउचर खरीदने में किया गया था। मिश्रा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने फ्लिपकार्ट से कोई गिफ्ट वाउचर नहीं खरीदा था।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खाते से रकम काटे जाने से पहले या उसके दौरान उन्हें किसी प्रकार की सहमति देने की जानकारी नहीं थी। यही वजह है कि उन्होंने पूरे मामले को अनधिकृत वित्तीय लेनदेन बताते हुए कार्रवाई की मांग की।

पुलिस से कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट पहुंचे

मिश्रा के अनुसार, उन्होंने मामले की जानकारी साइबर क्राइम थाने और पुलिस अधीक्षक को भी दी। उन्होंने रजिस्ट्री के माध्यम से शिकायत भेजकर खाते से निकाली गई रकम और संबंधित डिजिटल लेनदेन की जांच कराने की मांग की थी।

शिकायत के बावजूद तत्काल कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने अदालत का रुख किया। मामले की सुनवाई के बाद एसीजेएम तृतीय कोर्ट ने साइबर क्राइम थाने को मुकदमा दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया। इसके बाद मंगलवार शाम FIR दर्ज की गई।

बैंक और UPI रिकॉर्ड की जांच

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस अब उन सभी पांच UPI लेनदेन की जांच कर रही है, जिनके जरिए ₹89,654 की रकम निकाली गई। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि लेनदेन किस माध्यम से अधिकृत हुआ, रकम किस खाते या भुगतान प्रणाली तक पहुंची और गिफ्ट वाउचर खरीदने के लिए किस डिजिटल प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया।

पुलिस बैंकिंग रिकॉर्ड, UPI ट्रांजेक्शन विवरण, संबंधित गिफ्ट वाउचर की खरीद और उससे जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेगी। इसके अलावा खाते की सुरक्षा, लेनदेन के समय इस्तेमाल हुए उपकरण और संबंधित तकनीकी जानकारी भी जांच का हिस्सा बन सकती है।

मामले में फ्लिपकार्ट के प्रबंध निदेशक और बैंक शाखा प्रबंधक को आरोपी बनाया गया है। पुलिस यह निर्धारित करेगी कि कथित अनधिकृत लेनदेन में उनकी क्या भूमिका रही और शिकायतकर्ता के खाते से रकम निकलने की प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही या अन्य अनियमितता हुई थी या नहीं।

फिलहाल पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, बैंकिंग दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे लेनदेन की कड़ी जोड़ने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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