प्रयागराज: स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने प्रयागराज के मेजा क्षेत्र में ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में कथित तौर पर चल रहे सट्टेबाजी नेटवर्क का खुलासा किया है। सोमवार शाम हुई कार्रवाई में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच के मुताबिक, आरोपी एक मुर्गी फार्म से rolexpanel.in वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी का संचालन कर रहे थे। उनके कब्जे से बड़ी संख्या में सिम कार्ड, डिजिटल भुगतान से जुड़े उपकरण, QR कोड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और नकदी बरामद की गई है। STF अब कथित सरगना और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
STF को सूचना मिली थी कि मेजा क्षेत्र में कुछ लोग ऑनलाइन गेमिंग वेबसाइट के माध्यम से कथित तौर पर सट्टेबाजी करा रहे हैं। इसके बाद टीम ने मिश्रपुर गांव में छापेमारी की और मेजा के शंभूचक निवासी बृजेश कुमार सिंह उर्फ टीटू को पकड़ा। पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि उसने मिश्रपुर में मकान के साथ एक मुर्गी फार्म भी बनवाया था और इसी परिसर से ऑनलाइन गेमिंग तथा सट्टेबाजी की गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।
दूसरे लोगों की पहचान पर सिम सक्रिय कराने का आरोप
जांच में STF को कथित नेटवर्क के काम करने के तरीके की जानकारी मिली है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य बड़ी संख्या में सिम कार्ड हासिल करते थे और उन्हें दूसरे लोगों के नाम पर तैयार किए गए दस्तावेजों के आधार पर सक्रिय कराते थे। इन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी से जुड़े वित्तीय लेनदेन के लिए किया जाता था।
आरोपियों पर इन सिम कार्ड के जरिए एयरटेल पेमेंट्स बैंक में खाते खुलवाने और उनसे UPI ID तथा MPIN तैयार करने का भी आरोप है। जांच के अनुसार, जब किसी मोबाइल नंबर या UPI खाते पर अधिक लेनदेन होने के कारण प्रतिबंध लग जाता या वह ब्लॉक हो जाता था, तो आरोपी दूसरा सिम कार्ड और नया खाता इस्तेमाल करना शुरू कर देते थे। जांच एजेंसी इस व्यवस्था को लेनदेन को अलग-अलग माध्यमों में बांटने की कोशिश के तौर पर देख रही है।
व्हाट्सऐप ग्रुप में भेजते थे लेनदेन के स्क्रीनशॉट
STF के मुताबिक, ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी रकम अलग-अलग बैंक खातों और UPI चैनलों के जरिए भेजी जाती थी। लेनदेन सफल होने के बाद उसका स्क्रीनशॉट कथित तौर पर ऑनलाइन गेमिंग एडमिन से जुड़े व्हाट्सऐप ग्रुप में भेजा जाता था। इससे भुगतान की पुष्टि की जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि यदि वेबसाइट पर कई मिनट तक कोई गतिविधि नहीं होती थी या एडमिन को किसी तरह का संदेह होता था, तो संबंधित लॉगिन को कथित तौर पर निलंबित कर दिया जाता था। इसके साथ जुड़े व्हाट्सऐप ग्रुप को भी डिलीट कर दिया जाता था। जांच एजेंसी अब यह पता लगा रही है कि क्या इस व्यवस्था का इस्तेमाल बातचीत और लेनदेन से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड हटाने के लिए किया जाता था।
चार आरोपी गिरफ्तार, कथित सरगना की तलाश
बृजेश कुमार सिंह के अलावा STF ने प्रिंस कुमार उर्फ गौतम, निवासी उरुवा; अभिषेक कुमार, निवासी डीएलडब्ल्यू, वाराणसी; और मितेश प्रधान, निवासी रायगढ़, छत्तीसगढ़ को भी गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की उम्र 20 से 26 वर्ष के बीच बताई गई है।
पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी आरोपियों की कथित भूमिकाओं का पता लगाने के साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। कथित मुख्य सरगना की तलाश भी जारी है।
लैपटॉप, 37 सिम और QR कोड बरामद
STF ने आरोपियों के पास से एक लैपटॉप, एक टैबलेट और स्मार्टफोन के अलावा 37 सिम कार्ड, 10 UPI QR-कोड स्टीकर, एक QR-कोड स्टैंड और पांच QR-कोड साउंड बॉक्स बरामद किए हैं। इसके अलावा 13 डेबिट और क्रेडिट कार्ड, तीन आधार कार्ड, तीन रजिस्टर और नकदी भी मिली है।
जांच टीम को ऑनलाइन गेमिंग और कथित सट्टेबाजी से संबंधित 32 स्क्रीनशॉट भी मिले हैं। इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसके जरिए कितनी रकम का लेनदेन हुआ।
कई खातों से रकम घुमाने का आरोप
जांचकर्ताओं का आरोप है कि सट्टेबाजी से जुड़ी रकम सीधे आरोपियों के निजी बैंक खातों में लेने के बजाय कई बैंक खातों और UPI माध्यमों से घुमाई जाती थी। इसके बाद कथित तौर पर रकम को नेटवर्क के सदस्यों के बीच बांटा जाता था।
अलग-अलग खातों, सिम कार्ड और QR कोड के इस्तेमाल को इस संभावना के तौर पर जांचा जा रहा है कि लेनदेन को किसी एक व्यक्ति या खाते से सीधे जोड़ना मुश्किल बनाया जा सके।
STF अब कथित सरगना के साथ उन लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिनकी पहचान का इस्तेमाल कथित तौर पर सिम कार्ड लेने और खाते खोलने में किया गया। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच से नेटवर्क के विस्तार, वित्तीय लेनदेन और अन्य संदिग्ध सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
