जयपुर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Nexa Evergreen Group से जुड़े कथित ₹2,676 करोड़ के निवेश घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुभाष चंद्र बिजनोरिया उर्फ सुभाष चंद्र बिजारनिया को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने यह गिरफ्तारी 10 अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत की। गिरफ्तारी के बाद बिजनोरिया को जयपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे चार दिन के लिए ED हिरासत में भेज दिया। उसकी हिरासत 13 अगस्त तक रहेगी।
ED के जयपुर जोनल कार्यालय ने राजस्थान पुलिस की ओर से Nexa Evergreen Group और उसके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज कई FIR और दाखिल चार्जशीट के आधार पर जांच के बाद यह कार्रवाई की। एजेंसी के अनुसार, रणवीर बिजारनिया और सुभाष चंद्र बिजनोरिया ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर बड़ी संख्या में निवेशकों से करीब ₹2,676 करोड़ जुटाए। आरोप है कि निवेशकों को आकर्षक रिटर्न और जमीन के प्लॉट का भरोसा देकर इस कथित निवेश नेटवर्क में शामिल किया गया।
जांच के मुताबिक, निवेशकों को बताया गया कि उनकी रकम गुजरात के धोलेरा स्मार्ट सिटी में जमीन विकास और प्लॉटिंग परियोजनाओं में लगाई जाएगी। इसके बदले उन्हें 60 सप्ताह तक हर सप्ताह 3% रिटर्न या प्लॉट आवंटित करने का कथित वादा किया गया। नए निवेशकों को नेटवर्क में शामिल कराने के लिए लैपटॉप, मोटरसाइकिल और कार जैसे पुरस्कार तथा अतिरिक्त कमीशन देने का प्रलोभन भी दिया गया।
ED ने सुभाष चंद्र बिजनोरिया को Nexa Evergreen Group के कथित प्रमुख संचालकों और योजनाकारों में शामिल बताया है। एजेंसी के अनुसार, वह रणवीर बिजारनिया के साथ मिलकर कथित निवेश संचालन पर नियंत्रण रखता था। जांच में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने सहयोगियों और निवेशकों के नाम पर कई कंपनियां, लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP), साझेदारी फर्म और प्रोपराइटरशिप संस्थाएं बनाई और संचालित कीं।
ED के अनुसार, इन संस्थाओं और उनसे जुड़े बैंक खातों का इस्तेमाल निवेशकों से रकम जुटाने, अलग-अलग खातों के बीच धन ट्रांसफर करने, पहले से जुड़े निवेशकों को रिटर्न देने और अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। एजेंसी का आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए अपराध से अर्जित रकम की लेयरिंग की गई और धन के वास्तविक स्रोत तथा स्वामित्व को छिपाने का प्रयास किया गया।
जांच में सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म और निवेशक प्रबंधन प्रणालियों के कथित इस्तेमाल की भी जानकारी सामने आई है। ED के मुताबिक, बैंकिंग संचालन, विभिन्न संस्थाओं के गठन और रकम के कथित डायवर्जन से जुड़े काम आरोपियों के निर्देश पर किए जाते थे। एजेंसी अब निवेशकों से जुटाई गई रकम के प्रवाह, उससे जुड़ी संस्थाओं और कथित तौर पर खरीदी गई संपत्तियों की जांच कर रही है।
25 ठिकानों पर ED कर चुकी है तलाशी
इस मामले में ED ने जून 2025 में PMLA की धारा 17 के तहत जयपुर, सीकर, झुंझुनूं और अहमदाबाद में 25 ठिकानों पर तलाशी ली थी। इस कार्रवाई के दौरान करीब ₹2.04 करोड़ नकद जब्त किया गया था। एजेंसी ने कई दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी बरामद किए थे, जिन्हें जांच से जुड़ा महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया गया।
इसके अलावा Nexa Group की संस्थाओं और उनके सहयोगियों से जुड़े बैंक तथा क्रिप्टो खातों में मौजूद करीब ₹15 करोड़ की रकम फ्रीज की गई थी। यह कार्रवाई कथित निवेश घोटाले और उससे जुड़ी रकम के लेन-देन की जांच के तहत की गई।
ED अब कंपनियों और उनसे जुड़े लोगों के वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निवेशकों से जुटाई गई रकम किन खातों और संस्थाओं के जरिए स्थानांतरित की गई और उसका इस्तेमाल कहां किया गया। एजेंसी कथित अपराध से अर्जित रकम से खरीदी गई अचल संपत्तियों के स्वामित्व और खरीद प्रक्रिया की भी जांच कर रही है।
जांच एजेंसी कथित निवेश नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और संदिग्ध रकम के अंतिम लाभार्थियों का भी पता लगा रही है। सुभाष चंद्र बिजनोरिया की गिरफ्तारी इस मनी लॉन्ड्रिंग जांच में अहम कार्रवाई मानी जा रही है। आगे की कार्रवाई वित्तीय लेन-देन, कंपनियों, बैंक खातों और संपत्तियों से जुड़े जांच निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
