आगरा: बिहार में शराबबंदी का फायदा उठाकर हरियाणा से बिहार तक अंग्रेजी शराब की तस्करी का एक बड़ा मामला आगरा में सामने आया है। तस्करों ने पुलिस और रास्ते में जांच करने वाली एजेंसियों को चकमा देने के लिए ट्रक में शराब की पेटियां लोड करने के बाद उनके ऊपर बड़ी मात्रा में भूसा भर दिया था। ट्रांसयमुना थाना पुलिस ने झरना नाले के पास घेराबंदी कर ट्रक को पकड़ा। तलाशी के दौरान भूसे के नीचे छिपाकर रखी गई पंजाब मार्का अंग्रेजी शराब की 415 पेटियां बरामद हुईं। बरामद शराब की अनुमानित कीमत करीब ₹45 लाख बताई गई है।
पुलिस ने ट्रक के चालक डालूराम और क्लीनर दीपक उर्फ दीपाराम, दोनों निवासी बाड़मेर, राजस्थान, को गिरफ्तार किया है। उनके पास से शराब के अलावा मोबाइल फोन और ₹4,580 नकद भी बरामद किए गए। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
भूसे की परत के नीचे छिपाई गई थी शराब
पुलिस के अनुसार, तस्करों ने शराब की खेप को सामान्य माल की तरह दिखाने के लिए अलग तरीका अपनाया था। ट्रक में शराब की पेटियां रखने के बाद उनके ऊपर भूसा लाद दिया गया था। बाहर से देखने पर ट्रक में सिर्फ भूसा भरा होने का आभास होता था, जिससे रास्ते में पुलिस या अन्य जांच टीमों को आसानी से गुमराह किया जा सके।
ट्रांसयमुना पुलिस को काफी समय से सूचना मिल रही थी कि यमुना एक्सप्रेसवे के रास्ते ट्रकों के जरिए शराब की खेप बिहार पहुंचाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध वाहनों की निगरानी बढ़ाई थी। इसी दौरान झरना नाले के पास संदिग्ध ट्रक को रोककर तलाशी ली गई तो भूसे के नीचे शराब की बड़ी खेप देखकर पुलिस भी हैरान रह गई।
बिहार में ऊंचे दाम पर बेचने की योजना
पूछताछ में सामने आया कि शराब की यह खेप हरियाणा से बिहार भेजी जा रही थी। बिहार में शराबबंदी लागू होने के कारण वहां शराब की मांग और कीमत दोनों अधिक होने का फायदा तस्कर उठाते हैं। आरोपियों ने बताया कि ट्रक को बिहार पहुंचने के बाद ही उन्हें बताया जाना था कि शराब की खेप किस स्थान पर उतारनी है।
पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी करीब चार वर्षों से ट्रक मालिक के लिए काम कर रहे थे। एक चक्कर के लिए चालक डालूराम को ₹50,000 और क्लीनर दीपक उर्फ दीपाराम को ₹20,000 दिए जाते थे। पूछताछ में यह भी सामने आया कि बिहार से लौटते समय ट्रक में उत्तर प्रदेश के लिए दूसरी तरह का माल लोड कराया जाता था, जिससे तस्करी करने वालों को अतिरिक्त कमाई होती थी।
हर बार बदलते थे शराब छिपाने का तरीका
जांच में यह भी सामने आया कि शराब को एक ही तरीके से नहीं छिपाया जाता था। हर खेप में ट्रक के भीतर शराब छिपाने का तरीका बदल दिया जाता था, ताकि लगातार एक जैसी तरकीब अपनाने से पुलिस को संदेह न हो। इस बार शराब की पेटियों को भूसे के नीचे छिपाकर ले जाया जा रहा था।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इससे पहले कितनी शराब की खेप इसी नेटवर्क के जरिए बिहार भेजी जा चुकी हैं और इस तस्करी में कौन-कौन लोग शामिल हैं। बरामद मोबाइल फोन से भी संपर्क और लेनदेन से जुड़े सुराग जुटाए जा रहे हैं।
मालिक और मैनेजर की भूमिका भी जांच के घेरे में
मामले में ट्रक मालिक विजय, निवासी बहादुरगढ़, झज्जर, हरियाणा, और मैनेजर को भी नामजद किया गया है। पुलिस के अनुसार, ट्रक किराये का था और मैनेजर ने चालक तथा क्लीनर को सहारनपुर बुलाकर ट्रक उपलब्ध कराया था। अब पुलिस मालिक और मैनेजर की भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शराब की खरीद, लोडिंग, परिवहन और बिहार में डिलीवरी की पूरी व्यवस्था किसके निर्देश पर संचालित होती थी। नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और पहले भेजी गई खेपों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
पुलिस के अनुसार, ट्रक के नंबर के आधार पर उसके मालिक से पूछताछ की जा रही है और उसकी भूमिका की जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी। मामले में नामजद मालिक और मैनेजर की गिरफ्तारी के प्रयास भी किए जा रहे हैं। बरामद शराब की कीमत और तस्करी के नेटवर्क से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच आगे बढ़ने के बाद होगी।
