कर्जदारों से वसूली गई रकम रिकॉर्ड में कम दिखाने का आरोप; दैनिक लेजर और आधिकारिक खातों में अंतर कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का मामला

सहकारी समिति में ₹21.28 लाख की हेराफेरी, पूर्व सचिव शरत कुमार नायक गिरफ्तार

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By Roopa
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कटक: ओडिशा सतर्कता विभाग ने कटक जिले की आनंदपुर सर्विस कोऑपरेटिव सोसाइटी (SCS) के पूर्व सचिव शरत कुमार नायक को कथित वित्तीय हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार किया है। आरोपी पर कर्जदारों से वसूली गई रकम में से ₹21.28 लाख से अधिक की राशि का कथित तौर पर गबन करने का आरोप है। यह मामला वित्त वर्ष 2021-22 में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। गिरफ्तारी के बाद नायक को मंगलवार को कटक की विशेष सतर्कता अदालत में पेश किया गया।

सतर्कता विभाग के अनुसार, नायक ने कर्जदारों से सीधे ऋण की किस्त और बकाया रकम वसूल की थी। जांच में आरोप है कि उसने वास्तविक रूप से वसूली गई रकम को दैनिक लेन-देन रजिस्टर में दर्ज तो किया, लेकिन आधिकारिक लेखा रजिस्टर में जानबूझकर कम रकम दिखाई। इस तरह दोनों रिकॉर्ड के बीच अंतर पैदा किया गया और कथित तौर पर कम दिखाई गई रकम को निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया।

जांच एजेंसी का आरोप है कि यह हेराफेरी किसी एक लेन-देन तक सीमित नहीं थी। नायक ने कथित तौर पर कर्ज वसूली से संबंधित आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से कम दर्ज किया और अंतर की राशि को अपने कब्जे में ले लिया। इससे बैंकिंग व्यवस्था और सरकारी राजस्व दोनों को आर्थिक नुकसान पहुंचा।

सतर्कता विभाग के मुताबिक, जांच के दौरान रिकॉर्ड की पड़ताल में वास्तविक वसूली और आधिकारिक खातों में दर्ज रकम के बीच महत्वपूर्ण अंतर सामने आया। विभाग ने दावा किया कि इस कथित हेराफेरी से ₹21,28,058 का नुकसान हुआ। इसमें संबंधित बैंकिंग संस्था के साथ सरकारी खजाने को हुआ नुकसान भी शामिल है।

अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर रकम की हेराफेरी छिपाने के लिए रिकॉर्ड में बदलाव किए और खातों को गलत तरीके से दर्ज किया। जांच में दस्तावेजों और लेखा रिकॉर्ड की जांच के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कितनी रकम अलग-अलग समय पर वसूली गई और उसमें से कितनी राशि आधिकारिक खातों में जमा की गई।

रिकॉर्ड में हेरफेर कर रकम छिपाने का आरोप

सतर्कता विभाग की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि कर्जदारों से प्राप्त भुगतान की वास्तविक राशि दैनिक लेजर में दर्ज होने के बावजूद आधिकारिक लेखा पुस्तकों में कम संग्रह दिखाया गया। आरोप है कि दोनों रिकॉर्ड के बीच के अंतर का फायदा उठाकर रकम का गबन किया गया।

जांच एजेंसी अब उन सभी लेन-देन और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है, जिनके आधार पर कथित वित्तीय अनियमितता हुई। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि हेराफेरी की प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति या कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं।

मामले में 10 अगस्त को कटक सतर्कता थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधन), 2018 की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। इसके बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए नायक को गिरफ्तार किया गया। सतर्कता विभाग ने आरोपी के खिलाफ वित्तीय रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, खातों को गलत तरीके से दर्ज करने और रकम के गबन से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की है।

अदालत में पेश किए जाने के बाद मामले की जांच जारी है। सतर्कता विभाग कथित तौर पर हड़पी गई रकम की पूरी राशि, उसके इस्तेमाल और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन का पता लगाने में जुटा है। जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

यह मामला सहकारी ऋण व्यवस्था में वित्तीय रिकॉर्ड की पारदर्शिता और कर्ज वसूली की निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। एजेंसी अब यह सुनिश्चित करने के लिए रिकॉर्ड का मिलान कर रही है कि कर्जदारों से प्राप्त रकम का पूरा हिसाब आधिकारिक खातों में दर्ज हुआ था या नहीं। साथ ही कथित गबन से जुड़े अन्य संभावित लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

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