दमन: फर्जी RTO ई-चालान के नाम पर भेजी गई APK फाइल के जरिए मोबाइल फोन हैक कर बैंक खाते से रकम निकालने के मामले में दमन पुलिस ने झारखंड से एक संदिग्ध साइबर ठग को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान मोहम्मद सगीर अंसारी के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, अंसारी कथित अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह से जुड़ा हुआ है, जो फर्जी सरकारी सेवा एप्लिकेशन के जरिए लोगों के मोबाइल में सेंध लगाकर बैंक खातों से रकम निकालने का काम करता था।
आरोपी को झारखंड के गिरिडीह से गिरफ्तार किया गया। पुलिस टीम ने उसकी तलाश में तीन से चार दिन तक इलाके में तकनीकी सुरागों के आधार पर अभियान चलाया। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत से ट्रांजिट रिमांड मिलने पर दमन लाया गया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित गिरोह ने दमन और अन्य इलाकों में कितने लोगों को निशाना बनाया और अब तक कितनी रकम की ठगी की गई।
मामला 27 जुलाई 2026 को सामने आया, जब कचिगाम कोस्टल पुलिस थाना क्षेत्र के एक निवासी के मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से APK फाइल भेजी गई। संदेश में इस फाइल को RTO ई-चालान से संबंधित बताया गया था। सरकारी कार्रवाई से जुड़ा संदेश समझकर पीड़ित ने फाइल को अपने मोबाइल फोन में इंस्टॉल कर लिया।
APK इंस्टॉल करने के बाद कथित तौर पर मोबाइल फोन की सुरक्षा से समझौता हो गया। कुछ समय बाद पीड़ित को अपने बैंक खाते से रकम निकाले जाने का संदेश मिला। खाते से अनधिकृत लेन-देन की जानकारी मिलने पर वह घबरा गया और पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
तकनीकी जांच से झारखंड तक पहुंची पुलिस
शिकायत मिलने के बाद कचिगाम पुलिस ने मामले की तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने उस APK फाइल का तकनीकी विश्लेषण किया, जिसे पीड़ित के मोबाइल पर भेजा गया था। इसी विश्लेषण से कथित अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़ा महत्वपूर्ण सुराग मिला।
पुलिस के अनुसार, तकनीकी जांच में मोहम्मद सगीर अंसारी की कथित भूमिका सामने आई। इसके बाद पुलिस टीम झारखंड के गिरिडीह पहुंची और आरोपी की तलाश शुरू की। स्थानीय स्तर पर कई दिनों तक जानकारी जुटाने और निगरानी के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया है। जांच एजेंसी अब इस उपकरण की तकनीकी जांच के जरिए उसके संपर्कों, डिजिटल गतिविधियों, कथित गिरोह के अन्य सदस्यों और उन लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, जिनके बैंक खातों या मोबाइल उपकरणों का इस्तेमाल कथित ठगी में हुआ।
आरोपी से पूछताछ के दौरान पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि फर्जी APK तैयार करने, उसे लोगों तक पहुंचाने और मोबाइल फोन से बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल करने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही बैंक खातों से निकाली गई रकम के आगे के लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
WhatsApp और SMS से भेजी जा रही फर्जी APK
दमन पुलिस ने लोगों को WhatsApp या SMS के जरिए भेजी जाने वाली APK फाइलों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि RTO ई-चालान या किसी अन्य सरकारी सेवा के नाम पर भेजी गई अनजान APK फाइल को मोबाइल में इंस्टॉल नहीं करना चाहिए।
पुलिस ने लोगों से संदिग्ध लिंक या फाइल खोलने से पहले संबंधित सरकारी विभाग के आधिकारिक स्रोत से उसकी पुष्टि करने की सलाह दी है। अधिकारियों के मुताबिक, साइबर ठग सरकारी सेवाओं और जरूरी दस्तावेजों का नाम इस्तेमाल कर लोगों को भरोसे में लेते हैं और फिर दुर्भावनापूर्ण एप्लिकेशन के जरिए मोबाइल तथा बैंकिंग जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं।
मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस कथित गिरोह के नेटवर्क, अन्य संभावित आरोपियों, पीड़ितों और वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस साइबर ठगी नेटवर्क के दायरे और इससे जुड़े अन्य मामलों का पता चलने की संभावना है।
