₹828 करोड़ के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय की 'नो ऑब्जेक्शन' के बाद मुंबई की विशेष अदालत का आदेश; परिसमापक के माध्यम से संपत्तियां सौंपे जाने का रास्ता साफ

नकोडा बैंक धोखाधड़ी मामले में ₹393.79 करोड़ की संपत्तियां वैध दावेदारों को लौटाने का आदेश, PMLA कोर्ट का बड़ा फैसला

Roopa
By Roopa
5 Min Read

मुंबई: मुंबई स्थित धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की विशेष अदालत ने नकोडा लिमिटेड और अन्य आरोपियों से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी एवं मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए ₹393.79 करोड़ मूल्य की संलग्न अचल संपत्तियां वैध दावेदारों को लौटाने का आदेश दिया है। अदालत ने यह आदेश 4 अगस्त 2026 को पारित किया। यह फैसला उस समय आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत को बताया कि उसे कंपनी के परिसमापक (लिक्विडेटर) को संलग्न संपत्तियां सौंपे जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, ताकि बाद में उन्हें वास्तविक और वैध दावेदारों को हस्तांतरित किया जा सके।

यह मामला नकोडा लिमिटेड और उससे जुड़े अन्य व्यक्तियों पर ₹828 करोड़ की कथित बैंक धोखाधड़ी और उससे प्राप्त धन को वैध दिखाने के आरोपों से संबंधित है। ईडी ने यह जांच अपने सूरत उप-क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत शुरू की थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनी और उससे जुड़े लोगों ने अपराध से अर्जित धन को विभिन्न समूह कंपनियों के जरिए स्थानांतरित कर कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग की।

ईडी के अनुसार, नकोडा लिमिटेड का नियंत्रण बाबूलाल गुमानमल जैन, देवेंद्र बाबूलाल जैन तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के पास था। जांच में पाया गया कि कंपनी से जुड़े समूहों के माध्यम से धन का प्रवाह किया गया, जिससे कथित वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि केनरा बैंक के नेतृत्व वाले 13 बैंकों के एक कंसोर्टियम ने नकोडा लिमिटेड के विक्रेताओं के पक्ष में लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) जारी किए थे। ये एलसी विक्रेताओं द्वारा प्रस्तुत चालानों के आधार पर जारी किए गए थे। ईडी का आरोप है कि बाद में इन एलसी का उपयोग कथित रूप से फर्जी बिल ऑफ एक्सचेंज और जाली चालानों के आधार पर किया गया, जबकि वास्तविक रूप से किसी भी प्रकार की वस्तुओं की आपूर्ति नहीं हुई थी। इसके बावजूद दस्तावेजों को स्वीकार कर भुगतान प्रक्रिया पूरी की गई।

जांच एजेंसी के अनुसार, नकोडा लिमिटेड के विक्रेताओं के पक्ष में कुल 1,212 लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किए गए, जिनकी कुल राशि ₹4,204.25 करोड़ थी। इनमें से 202 इनलैंड एलसी, जिनका मूल्य ₹827.98 करोड़ था, कंपनी द्वारा भुगतान नहीं किए जाने के कारण डिफॉल्ट की स्थिति में पहुंच गए। इसी आधार पर बैंकों को भारी वित्तीय नुकसान होने का आरोप है।

ईडी ने वर्ष 2018 में इस मामले में ₹375.71 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की थीं। इसके बाद 2019 में ₹18.08 करोड़ मूल्य की अतिरिक्त संपत्तियां भी संलग्न की गईं। दोनों कार्रवाईयों के बाद कुल ₹393.79 करोड़ की संपत्तियां कुर्क हुईं, जिसकी पुष्टि बाद में सक्षम प्राधिकरण ने भी कर दी।

मामले में ईडी ने विशेष PMLA अदालत, मुंबई में अभियोजन शिकायत और पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की थी तथा इन संपत्तियों को अपराध से अर्जित आय बताते हुए जब्त करने की मांग की थी। इसी दौरान नकोडा लिमिटेड के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT), अहमदाबाद पीठ में कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) शुरू हुई। समाधान प्रक्रिया विफल रहने के बाद कंपनी को परिसमापन प्रक्रिया में भेज दिया गया।

परिसमापन के दौरान कंपनी के लिक्विडेटर ने विशेष PMLA अदालत से ईडी द्वारा कुर्क संपत्तियों को बहाल किए जाने का अनुरोध किया। ईडी ने अदालत को बताया कि धन शोधन निवारण अधिनियम का उद्देश्य अपराध से अर्जित संपत्तियों को अंततः वास्तविक और वैध दावेदारों तक पहुंचाना भी है। इस आधार पर एजेंसी ने संपत्तियां लिक्विडेटर को सौंपने पर अपनी सहमति जताई।

ईडी की इस आपत्ति-रहित रिपोर्ट के आधार पर विशेष अदालत ने ₹393.79 करोड़ मूल्य की संलग्न अचल संपत्तियां लिक्विडेटर को सौंपने का आदेश दिया। अब परिसमापक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन संपत्तियों को वैध दावेदारों के बीच वितरित करेगा। यह आदेश उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के साथ-साथ बैंकिंग प्रणाली के हितों और वास्तविक दावेदारों के अधिकारों के संरक्षण का प्रश्न भी जुड़ा होता है।

हमसे जुड़ें

Share This Article