एसबीआई की बरौनी फर्टिलाइजर शाखा से टैंकर खरीद के लिए लिया गया था ऋण; जांच में कई वाहन दूसरे नामों पर पंजीकृत कराने और दो टैंकरों पर दोबारा ऋण लेने का खुलासा

3.74 करोड़ के बैंक लोन घोटाले में नौ साल से फरार आरोपी गिरफ्तार, 15 तेल टैंकर खरीद में फर्जीवाड़े का आरोप

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By Roopa
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मुजफ्फरपुर। 15 तेल टैंकरों की खरीद के नाम पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से 3.74 करोड़ रुपये का ऋण लेकर कथित फर्जीवाड़ा करने के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने नौ साल से फरार चल रहे आरोपी रामप्रकाश मंडल को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी की टीम ने शुक्रवार रात मुजफ्फरपुर के हथौड़ी थाना क्षेत्र स्थित भदईं गांव में छापेमारी कर उसे पकड़ा। आरोपी बेगूसराय में तेल टैंकरों की बॉडी निर्माण का काम करने वाली ‘हंस इंजीनियरिंग’ नामक फर्म चलाता था।

रामप्रकाश मंडल के खिलाफ लंबे समय से गिरफ्तारी वारंट जारी था और अदालत से उसकी संपत्ति की कुर्की-जब्ती का आदेश भी हो चुका था। जांच एजेंसी को सूचना मिली थी कि वह अपने पैतृक गांव भदईं आया हुआ है। सूचना की पुष्टि के बाद टीम ने उसके घर पर दबिश दी और उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई और उसे रांची ले जाया गया।

मामले की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी। जांच के मुताबिक, बेगूसराय के मोसादपुर निवासी प्रवीण कुमार सिंह ने 30 दिसंबर 2013 को एसबीआई की बरौनी फर्टिलाइजर टाउनशिप शाखा में 15 तेल टैंकर खरीदने के लिए ऋण आवेदन दिया था। आवेदन के साथ उसने ‘पवन ऑटोमोटिव्स प्राइवेट लिमिटेड’ के दो कोटेशन जमा किए थे। टैंकरों की बॉडी तैयार कराने के लिए रामप्रकाश मंडल की फर्म ‘हंस इंजीनियरिंग’ का करीब 2.03 करोड़ रुपये का कोटेशन भी प्रस्तुत किया गया था।

बैंक ने 21 फरवरी 2014 को करीब 3.74 करोड़ रुपये का ऋण मंजूर किया। इसके बाद ऋण की रकम वाहन डीलर और बॉडी निर्माता से जुड़े बैंक खातों में आरटीजीएस के जरिए भेजी गई। जांच में आरोप है कि ऋण राशि का इस्तेमाल बैंक की निर्धारित शर्तों के अनुरूप नहीं किया गया और कई स्तरों पर फर्जीवाड़ा किया गया।

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जांच के दौरान सामने आया कि बैंक ऋण से खरीदे गए कई टैंकर दूसरे लोगों के नाम पर पंजीकृत करा दिए गए थे। इनमें दो टैंकर महफूज खान और चंद्रशेखर सिंह के नाम पर दर्ज पाए गए। इसके अलावा दो अन्य टैंकरों पर प्रवीण कुमार सिंह ने एसबीआई के अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा से भी दोबारा ऋण ले लिया था। इससे बैंक के सामने ऋण की वास्तविक स्थिति और वाहनों के स्वामित्व को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए।

जब बैंक ने ऋण की वसूली और बकाया रकम की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की तो मामले में कथित तौर पर एक और फर्जीवाड़ा किया गया। आरोप है कि ऋण लेने वाले पक्ष की ओर से बरौनी थाने में वाहन चोरी होने की झूठी शिकायत दर्ज कराई गई, जबकि जांच में वाहनों से जुड़े दस्तावेज और ऋण लेनदेन अलग तस्वीर सामने आ रही थी।

मामले में बैंक की शिकायत के आधार पर वर्ष 2017 में रांची स्थित सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच में बैंक ऋण के कथित दुरुपयोग, वाहनों के स्वामित्व में हेरफेर और बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप सामने आए।

जांच एजेंसी ने मामले में प्रवीण कुमार सिंह, पवन ऑटोमोटिव्स के निदेशक रंजन कुमार, चंदन कुमार और हंस इंजीनियरिंग के संचालक रामप्रकाश मंडल को आरोपी बनाया था। मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ भी जांच और कानूनी कार्रवाई की गई।

रामप्रकाश मंडल पर आरोप है कि उसने टैंकरों की बॉडी निर्माण से जुड़े दस्तावेज और ऋण प्रक्रिया में भूमिका निभाई तथा बैंक से जारी रकम के कथित फर्जी इस्तेमाल में शामिल रहा। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से वह लगातार गिरफ्तारी से बचता रहा। करीब नौ साल तक फरार रहने के बाद उसकी मौजूदगी की सूचना मिलने पर जांच एजेंसी ने कार्रवाई की और उसे पकड़ लिया। अब उससे पूछताछ के जरिए ऋण की रकम के इस्तेमाल, टैंकरों के वास्तविक स्वामित्व और कथित फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोगों की भूमिका को लेकर आगे की जानकारी जुटाई जा रही है।

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