मुंबई। मुंबई में एक वरिष्ठ नागरिक से इंश्योरेंस की रकम वापस दिलाने के नाम पर कथित तौर पर ₹64 लाख की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जालसाजों ने पहले बंद हो चुकी जीवन बीमा पॉलिसियों को दोबारा सक्रिय कराने और जमा रकम वापस दिलाने का झांसा दिया। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराई गई। कई साल बाद कथित तौर पर प्रवर्तन निदेशालय और अन्य सरकारी एजेंसियों के नाम पर धमकाकर ठगी का सिलसिला जारी रखा गया और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर भी बुजुर्ग को डराया गया।
पूर्वी क्षेत्र की साइबर पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, पीड़ित ने सितंबर 2011 में एक महिला के संपर्क में आने के बाद चार जीवन बीमा पॉलिसियां खरीदी थीं। ये पॉलिसियां एक व्यक्ति के माध्यम से ली गई थीं। बाद में प्रीमियम का भुगतान जारी नहीं रख पाने के कारण पॉलिसियां बंद हो गईं।
शिकायत के मुताबिक, जून 2015 में दीपक राठी नाम से एक व्यक्ति ने पीड़ित से संपर्क किया और बंद पॉलिसियों को दोबारा सक्रिय कराने तथा उनकी रकम वापस दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को अय्यर बताते हुए दावा किया कि दीपक राठी की मौत हो चुकी है और अब वह संबंधित फाइल संभाल रहा है। आरोप है कि इसके बाद पीड़ित से अलग-अलग बैंक खातों में बार-बार रकम जमा कराई गई, लेकिन उसे कोई रिफंड नहीं मिला।
वर्ष 2021 में दीपक कुमार नाम से एक अन्य व्यक्ति ने कथित तौर पर पीड़ित से संपर्क किया। उसने भी पॉलिसी से जुड़ी रकम वापस दिलाने का भरोसा दिया और अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा कराने को कहा। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उसने आरोपियों की ओर से बताए गए खातों में रकम ट्रांसफर की।
आरोप है कि वर्ष 2023 से 2026 के बीच लखोटिया नाम के व्यक्ति और अय्यर नाम का इस्तेमाल करने वाले एक अन्य व्यक्ति ने पीड़ित को प्रवर्तन निदेशालय, पुलिस और दूसरी सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई का डर दिखाना शुरू कर दिया। आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ित और उसकी पत्नी के बैंकिंग विवरण, पैन और आधार से जुड़ी जानकारी हासिल कर ली और इसके बाद लगातार पैसों की मांग करते रहे।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
शिकायत में पीड़ित ने आरोप लगाया है कि उसके बैंक खाते से एटीएम और अन्य माध्यमों के जरिए करीब ₹63.58 लाख निकाल लिए गए। इसके अलावा करीब ₹51.25 लाख उसके खाते में जमा किए गए, जिसे कथित तौर पर आरोपियों ने अलग-अलग तरीकों से अपने कब्जे में ले लिया। इस तरह कई वर्षों तक चले कथित लेनदेन और दबाव के कारण पीड़ित को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि 16 अगस्त 2026 को विशाल ठाकुर नाम का व्यक्ति और उसके साथियों ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए उसे कथित डिजिटल अरेस्ट में रखा। आरोपियों ने खुद को सरकारी कार्रवाई से जुड़ा बताकर धमकाया और उसके खिलाफ आधिकारिक कार्रवाई किए जाने का डर दिखाया।
साइबर पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अलग-अलग बैंक खातों में हुए लेनदेन, एटीएम से निकासी, डिजिटल भुगतान और आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों तथा अन्य डिजिटल माध्यमों की जानकारी जुटा रही है। जांच में यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पीड़ित और उसकी पत्नी की बैंकिंग तथा पहचान संबंधी जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची।
कई वर्षों तक अलग-अलग नामों और सरकारी एजेंसियों का डर दिखाकर कथित तौर पर रकम वसूलने का यह मामला डिजिटल अरेस्ट और इंश्योरेंस रिफंड के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के तौर-तरीकों की ओर भी इशारा करता है। पुलिस अब आरोपियों की पहचान, उनकी भूमिका और कथित रकम की पूरी लेनदेन श्रृंखला की जांच कर रही है।
