पूर्व IPS अधिकारी जी. संपत कुमार ने धोनी की गवाही की न्यायिक निगरानी, पूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग और प्रमाणित प्रतियां मांगीं; साक्ष्य दर्ज कराने के लिए अदालत या सरकारी परिसर तय करने की भी मांग

धोनी के ₹100 करोड़ मानहानि मामले में नया मोड़, रिटायर्ड IPS अधिकारी की तीन अर्जियां मंजूर

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By Roopa
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चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने मंगलवार को रिटायर्ड भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी जी. संपत कुमार की ओर से दायर तीन अर्जियों को पंजीकृत करने का निर्देश दिया। ये अर्जियां क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की गवाही दर्ज करने की प्रक्रिया से जुड़ी हैं। धोनी ने 2014 में कुमार और अन्य लोगों के खिलाफ ₹100 करोड़ की मानहानि का मुकदमा दायर किया था। मामले में 2013 के इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) सट्टेबाजी विवाद से उनका नाम जोड़े जाने को लेकर विवाद है।

न्यायमूर्ति के. गोविंदराजन तिलकावती ने यह निर्देश तब दिया, जब रजिस्ट्री ने तीनों अर्जियों की सुनवाई के लिए यह तय करने के उद्देश्य से उन्हें अदालत के समक्ष रखा कि वे सुनवाई योग्य हैं या नहीं। कुमार के वकील ने दलील दी कि समान प्रकृति के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर ये अर्जियां दाखिल की जा सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि ऐसी अर्जियां दाखिल की जा सकती हैं और रजिस्ट्री को उन्हें क्रमांकित करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अर्जियों के औपचारिक रूप से क्रमांकित होने के बाद धोनी को अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने का अवसर दिया जाएगा।

गवाही की न्यायिक निगरानी की मांग

कुमार ने अपनी पहली अर्जी में मांग की है कि धोनी की गवाही दर्ज करने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक न्यायिक अधिकारी नियुक्त किया जाए। गवाही अदालत की ओर से नियुक्त अधिवक्ता आयुक्त के माध्यम से दर्ज की जानी है।

दूसरी अर्जी में पूरी गवाही प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने की मांग की गई है। कुमार ने यह भी आग्रह किया है कि वीडियो रिकॉर्डिंग की बिना संपादन वाली और प्रमाणित प्रतियां उन्हें तथा अदालत द्वारा नियुक्त किए जाने वाले न्यायिक अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएं।

तीसरी अर्जी गवाही दर्ज करने के स्थान से संबंधित है। कुमार चाहते हैं कि धोनी की गवाही केवल अदालत परिसर या किसी सरकारी भवन में दर्ज की जाए।

सुनवाई के दौरान कुमार के वकील ने तर्क दिया कि केवल धोनी के क्रिकेटर होने के कारण उनकी गवाही किसी निजी स्थान या आलीशान होटल में दर्ज नहीं की जानी चाहिए। वकील ने विशेष रूप से पांच सितारा होटल या निजी बंगले में गवाही दर्ज किए जाने की संभावना का विरोध किया।

2025 में शुरू हुआ था मुकदमे का परीक्षण

धोनी का मानहानि मुकदमा 2014 से लंबित है, लेकिन इसकी सुनवाई की प्रक्रिया काफी बाद में आगे बढ़ी। 11 अगस्त 2025 को न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन ने मुकदमे की सुनवाई शुरू करने का आदेश दिया था। साथ ही अधिवक्ता जी. जयश्री को अदालत की ओर से आयुक्त नियुक्त करते हुए धोनी की गवाही दर्ज करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

कुमार ने इस आदेश को हाईकोर्ट की खंडपीठ में चुनौती दी थी। हालांकि, न्यायमूर्ति एस.एम. सुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति मोहम्मद शफीक की खंडपीठ ने 4 नवंबर 2025 को उनकी अपील खारिज कर दी थी।

खंडपीठ ने उस समय यह भी ध्यान में रखा था कि धोनी को अपनी गवाही दर्ज कराने के लिए हाईकोर्ट परिसर में स्थित मास्टर कोर्ट के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश कराने पर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ सकती है। इसी आधार पर अदालत ने दूसरी जगह अधिवक्ता आयुक्त के माध्यम से उनकी गवाही दर्ज कराने के एकल न्यायाधीश के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया था।

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सुरक्षा के कारण अधिवक्ता आयुक्त की नियुक्ति

खंडपीठ की टिप्पणी के अनुसार, धोनी की सार्वजनिक पहचान और उनकी सुरक्षा को देखते हुए उन्हें मास्टर कोर्ट में पेश कराने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम करने पड़ते। इसलिए उनकी गवाही किसी अन्य स्थान पर अदालत द्वारा नियुक्त अधिवक्ता आयुक्त के माध्यम से दर्ज कराने को उचित माना गया था।

अब कुमार की नई अर्जियां इसी प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त सुरक्षा और निगरानी की मांग करती हैं। इनमें न्यायिक निगरानी, पूरी और बिना संपादन वाली वीडियो रिकॉर्डिंग, प्रमाणित प्रतियां तथा अदालत या सरकारी परिसर में गवाही दर्ज कराने की मांग शामिल है।

हालांकि, हाईकोर्ट ने अभी इन सभी मांगों को स्वीकार नहीं किया है। मंगलवार का आदेश केवल तीनों अर्जियों को औपचारिक रूप से क्रमांकित कर सुनवाई के लिए आगे बढ़ाने से संबंधित है। इन मांगों पर अंतिम फैसला बाद की सुनवाई में होगा।

धोनी के मुकदमे में अन्य पक्ष भी शामिल

धोनी ने जी. संपत कुमार के अलावा जी मीडिया कॉरपोरेशन, पत्रकार सुधीर चौधरी और न्यूज नेशन नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड को भी ₹100 करोड़ के मानहानि मुकदमे में पक्षकार बनाया है।

मामला 2013 के IPL सट्टेबाजी विवाद और उसमें धोनी का नाम कथित तौर पर जोड़े जाने से संबंधित आरोपों से जुड़ा है। वर्तमान कार्यवाही मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि मुकदमे के दौरान धोनी की गवाही किस तरीके से दर्ज की जाएगी।

अब तीनों अर्जियों के क्रमांकित होने के बाद धोनी को उन पर अपना जवाब दाखिल करने का अवसर मिलेगा। इसके बाद हाईकोर्ट यह तय करेगा कि गवाही की न्यायिक निगरानी, पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग, प्रमाणित प्रतियां और गवाही दर्ज करने के लिए अदालत या सरकारी परिसर की शर्त लागू की जाए या नहीं।

इस तरह करीब एक दशक पुराने मानहानि मुकदमे में धोनी की गवाही दर्ज करने की प्रक्रिया एक बार फिर महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दा बन गई है।

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