मेरठ/मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के चर्चित राशन घोटाले की जांच में आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एक अहम आरोपी को गिरफ्तार किया है। लंबे समय से वांछित चल रहे कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश कुमार पर आरोप है कि उसने राशन वितरण प्रणाली में तकनीकी सेंध लगाकर गरीब लाभार्थियों के हिस्से का राशन हड़प लिया। जांच के मुताबिक, उसने कंप्यूटर प्रणाली में दर्ज वास्तविक लाभार्थियों के आधार नंबर से छेड़छाड़ कर उनकी जगह अपना आधार नंबर दर्ज किया और ई-पॉस मशीन पर अपने बायोमीट्रिक सत्यापन के जरिए 56 बार राशन निकाला।
गिरफ्तार आरोपी अविनाश कुमार, पुत्र चरण सिंह सैनी, मुरादाबाद के गुलाब बाड़ी नई बस्ती, कटघर का रहने वाला है। वह मुरादाबाद के जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में अस्थायी कर्मचारी के रूप में काम करता था। जांच में उसकी कथित भूमिका सामने आने के बाद से वह वांछित चल रहा था। ईओडब्ल्यू की टीम उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। आखिरकार उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया।
2018 में दर्ज हुआ था मुकदमा
राशन वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और सरकारी खाद्यान्न के कथित गबन की शिकायतों के बाद वर्ष 2018 में मामला दर्ज किया गया था। मुरादाबाद के नागफनी थाने में मुकदमा अपराध संख्या 405/2018 के तहत धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, आपराधिक साजिश, आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
जांच आगे बढ़ने पर सामने आया कि राशन वितरण से जुड़ी कथित अनियमितताएं केवल मुरादाबाद तक सीमित नहीं थीं। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से भी इसी तरह की शिकायतें और मुकदमे सामने आए। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी गई। इसके बाद ईओडब्ल्यू ने राशन वितरण प्रणाली में तकनीकी हेरफेर, लाभार्थियों के रिकॉर्ड में बदलाव और सरकारी खाद्यान्न के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामलों की जांच शुरू की।
कंप्यूटर सिस्टम में की गई कथित हेराफेरी
ईओडब्ल्यू की जांच के अनुसार, अविनाश कुमार ने राशन वितरण के लिए इस्तेमाल होने वाली कंप्यूटर आधारित प्रणाली का कथित तौर पर दुरुपयोग किया। इस व्यवस्था में पात्र लाभार्थियों की पहचान आधार संख्या और बायोमीट्रिक सत्यापन के माध्यम से की जाती है। इसके बाद ई-पॉस मशीन पर लेन-देन दर्ज होने के आधार पर राशन वितरित किया जाता है।
आरोप है कि अविनाश ने इसी प्रक्रिया में हेरफेर करते हुए सिस्टम में पहले से दर्ज वास्तविक लाभार्थियों के आधार नंबर हटाए या बदले। उनकी जगह उसने अपना आधार नंबर दर्ज कर दिया। इसके बाद संबंधित लाभार्थियों के नाम पर राशन निकालने के लिए ई-पॉस मशीन पर अपने बायोमीट्रिक सत्यापन का इस्तेमाल किया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इस प्रक्रिया से रिकॉर्ड में वास्तविक लाभार्थी का विवरण मौजूद रह सकता था, जबकि राशन की निकासी के समय पहचान सत्यापन आरोपी के आधार और बायोमीट्रिक से किया गया। इसी तरीके से 56 बार राशन निकाले जाने की बात जांच में सामने आई है।
56 बार इस्तेमाल की अपनी पहचान
अपने ही आधार और बायोमीट्रिक पहचान का बार-बार इस्तेमाल किए जाने का तथ्य जांच में अहम माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर एक-दो बार नहीं, बल्कि 56 बार इस तरीके से राशन की निकासी की। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि इतने लंबे समय तक सिस्टम में किए गए बदलाव और असामान्य बायोमीट्रिक सत्यापन की निगरानी क्यों नहीं हो सकी।
ईओडब्ल्यू अब यह पता लगाने में जुटी है कि 56 बार निकाले गए राशन की कुल मात्रा कितनी थी और इससे सरकारी खाद्यान्न को कितना नुकसान हुआ। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि किन वास्तविक लाभार्थियों के रिकॉर्ड में बदलाव किया गया था और उनके हिस्से का राशन किस तरीके से निकाला गया।
अकेले किया खेल या नेटवर्क भी शामिल?
अविनाश की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। ईओडब्ल्यू अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लाभार्थियों के आधार रिकॉर्ड तक उसकी पहुंच कैसे बनी और कंप्यूटर प्रणाली में बदलाव करने की सुविधा उसे किस स्तर पर मिली। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि उसने कथित हेराफेरी अकेले की या राशन वितरण व्यवस्था से जुड़े अन्य कर्मचारियों और लोगों की भी इसमें भूमिका थी।
जांचकर्ताओं की नजर डिजिटल रिकॉर्ड और ई-पॉस मशीन में दर्ज लेन-देन पर है। इन रिकॉर्ड के विश्लेषण से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित हेराफेरी कब-कब हुई और किन लाभार्थियों के नाम पर राशन निकाला गया।
बाकी आरोपियों की तलाश जारी
अविनाश कुमार की गिरफ्तारी के बाद ईओडब्ल्यू अब मामले में कथित रूप से शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है। टीम संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और उपलब्ध दस्तावेजों तथा डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
वर्ष 2018 से जांच के दायरे में रहे इस राशन घोटाले में कंप्यूटर ऑपरेटर की गिरफ्तारी ने तकनीकी प्रणाली के दुरुपयोग की एक अहम कड़ी सामने रखी है। अब जांच का अगला फोकस यह पता लगाने पर है कि 56 बार की गई कथित राशन निकासी से कितना नुकसान हुआ, इसमें और कौन लोग शामिल थे और लाभार्थियों के रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर किया गया। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और उसकी जिम्मेदारी की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
