रे-बैन एआई ग्लासेज को अदालतों, स्कूलों, पब, रेस्तरां और निजी क्लबों में विरोध का सामना; मेटा ने रिकॉर्डिंग लाइट छिपाने की कोशिश पर कैमरा ब्लॉक करने वाला नया सॉफ्टवेयर अपडेट जारी किया

मेटा के स्मार्ट चश्मों पर बढ़ी पाबंदी, बिना सहमति रिकॉर्डिंग और प्राइवेसी को लेकर उठे सवाल

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: मेटा के रे-बैन एआई स्मार्ट ग्लासेज को लेकर दुनियाभर में निजता और बिना सहमति रिकॉर्डिंग का विवाद बढ़ता जा रहा है। कैमरा और एआई फीचर्स से लैस इन चश्मों के जरिए आसपास मौजूद लोगों की जानकारी के बिना वीडियो रिकॉर्ड किए जाने की आशंका ने कई सार्वजनिक और निजी स्थानों को इनके इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए प्रेरित किया है। अदालतों, स्कूलों, रेस्तरां, पब और निजी क्लबों समेत कई स्थानों पर अब ऐसे स्मार्ट चश्मों को लेकर कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं।

मेटा के स्मार्ट ग्लासेज सामान्य चश्मों की तरह दिखाई देते हैं, लेकिन इनमें कैमरा, माइक्रोफोन और एआई आधारित सुविधाएं मौजूद हैं। इनकी मदद से उपयोगकर्ता तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करने के साथ कई अन्य डिजिटल कार्य कर सकता है। तकनीक की यही क्षमता अब निजता को लेकर सबसे बड़ी चिंता बन गई है। लोगों को आशंका है कि सार्वजनिक स्थानों पर उनके निजी क्षणों को बिना जानकारी या सहमति के रिकॉर्ड किया जा सकता है।

विवाद को उस समय और बल मिला जब स्मार्ट ग्लासेज के जरिए रिकॉर्ड किए गए कंटेंट की मानव स्तर पर समीक्षा यानी ‘ह्यूमन रिव्यू’ से जुड़ी जानकारी सामने आई। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि उपयोगकर्ताओं द्वारा रिकॉर्ड की गई सामग्री तक किस स्तर पर पहुंच बनाई जाती है और उसमें दिखाई देने वाले अन्य लोगों की निजता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है। इसी पृष्ठभूमि में कई संस्थानों और व्यवसायों ने ऐसे उपकरणों के इस्तेमाल को सीमित या प्रतिबंधित करना शुरू कर दिया।

न्यूयॉर्क समेत कई स्थानों पर अदालतों और स्कूल परिसरों में कैमरा युक्त रिकॉर्डिंग चश्मों पर प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसे स्थानों पर नियमों का उद्देश्य जासूसी, अनधिकृत रिकॉर्डिंग और संभावित धोखाधड़ी को रोकना है। अदालतों में संवेदनशील कानूनी कार्यवाही, दस्तावेज और निजी बातचीत होने के कारण रिकॉर्डिंग उपकरणों को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है।

ब्रिटेन में भी कई प्रतिष्ठित व्यवसायों ने ऐसे चश्मों को लेकर अपनी नीतियां सख्त की हैं। मशहूर पब चेन वेदरस्पून्स के सीईओ टिम मार्टिन ने अपने पबों में स्टाफ या ग्राहकों की बिना अनुमति रिकॉर्डिंग पर रोक लगा दी है। इसका मतलब है कि स्मार्ट चश्मों के जरिए किसी व्यक्ति को उसकी जानकारी के बिना रिकॉर्ड करना व्यवसाय के नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।

लंदन के प्रमुख रेस्तरां मालिक जेरेमी किंग ने भी अपने सभी वेन्यू में स्मार्ट चश्मे पहनने पर पाबंदी लगाने का फैसला किया है। इसी तरह वीआईपी प्राइवेट मेंबर्स क्लब सोहो हाउस ने अपनी पुरानी नो-फोटोग्राफी नीति को अपडेट करते हुए कैमरा युक्त स्मार्ट चश्मों को भी प्रतिबंधित कर दिया है। इन फैसलों से संकेत मिलता है कि स्मार्ट वियरेबल उपकरणों को लेकर निजता संबंधी चिंताएं केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं हैं।

विवाद के बीच मेटा ने अपने स्मार्ट ग्लासेज के लिए एक नया सॉफ्टवेयर अपडेट जारी किया है। कंपनी ने ऐसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए कैमरे की रिकॉर्डिंग लाइट से जुड़े सुरक्षा उपाय को मजबूत किया है, जिसमें उपयोगकर्ता द्वारा रिकॉर्डिंग संकेतक को छिपाने या निष्क्रिय करने की कोशिश किए जाने पर कैमरा स्वतः ब्लॉक हो जाएगा।

स्मार्ट ग्लासेज में मौजूद छोटी एलईडी लाइट का उद्देश्य आसपास के लोगों को यह संकेत देना है कि चश्मे का कैमरा रिकॉर्डिंग कर रहा है। यदि कोई व्यक्ति इस लाइट पर टेप लगाकर उसे ढकने या किसी अन्य तरीके से छिपाने का प्रयास करता है, तो नए सॉफ्टवेयर के तहत कैमरा काम करना बंद कर देगा। यह कदम अनधिकृत या छिपी हुई रिकॉर्डिंग की आशंका को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि, स्मार्ट ग्लासेज पर बढ़ती पाबंदियां यह सवाल भी खड़ा करती हैं कि एआई और कैमरा आधारित पहनने योग्य तकनीक के लिए निजता के स्पष्ट मानक कैसे तय किए जाएं। तकनीक के समर्थक इसे दैनिक जीवन में उपयोगी उपकरण मानते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि आसपास मौजूद लोगों को हमेशा यह पता नहीं होता कि उन्हें रिकॉर्ड किया जा रहा है।

मेटा का नया सुरक्षा उपाय विवाद को कम करने की दिशा में एक कदम है, लेकिन स्मार्ट ग्लासेज के बढ़ते इस्तेमाल के साथ सहमति, रिकॉर्डिंग की पारदर्शिता और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को लेकर बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।

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