लुधियाना के कारोबारी ने अहमदाबाद के व्यापारी पर लगाया आरोप; दुबई के कारोबारी साझेदार को माल पहुंचने का भरोसा दिलाने के लिए कथित तौर पर तैयार किए फर्जी दस्तावेज, फोकल प्वाइंट पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद केस दर्ज किया

फर्जी बिल ऑफ लैडिंग से माल की डिलीवरी दिखाकर ₹95.65 लाख की ठगी का आरोप

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By Roopa
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लुधियाना: लुधियाना के एक कारोबारी ने अहमदाबाद के एक व्यापारी पर करीब ₹95.65 लाख की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी उसके और दुबई में रह रहे कारोबारी साझेदार के बीच व्यावसायिक लेनदेन में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था। आरोप है कि उसने माल की डिलीवरी होने का झूठा भरोसा दिलाने के लिए फर्जी बिल ऑफ लैडिंग तैयार किए और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर दुबई स्थित साझेदार को लेनदेन पूरा करने के लिए राजी किया। फोकल प्वाइंट पुलिस ने शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

शिकायतकर्ता गुरमीत सिंह ने पुलिस को बताया कि उसकी दुबई में रहने वाले एक शेख के साथ कारोबारी साझेदारी थी। अहमदाबाद निवासी मनोज कमलेश भाई दोनों पक्षों के बीच कारोबारी गतिविधियों में मध्यस्थ के तौर पर काम कर रहा था। शिकायत के मुताबिक, आरोपी लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों और माल की आवाजाही से संबंधित प्रक्रिया में भी शामिल था।

गुरमीत सिंह का आरोप है कि कारोबारी लेनदेन के दौरान अहमदाबाद के व्यापारी ने कथित तौर पर फर्जी बिल ऑफ लैडिंग तैयार कर उन्हें भेजा। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बिल ऑफ लैडिंग महत्वपूर्ण शिपिंग दस्तावेज होता है, जिसका इस्तेमाल माल की प्राप्ति और उसके परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड के तौर पर किया जाता है। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों के जरिए दुबई स्थित कारोबारी साझेदार को यह विश्वास दिलाया गया कि लेनदेन में शामिल माल वास्तव में भेज दिया गया है और उसकी डिलीवरी हो चुकी है।

शिकायत के अनुसार, आरोपी की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और कथित तौर पर दिए गए बयानों पर भरोसा करते हुए दुबई स्थित साझेदार ने कारोबारी प्रक्रिया आगे बढ़ाई। इसके बाद आरोप है कि UAE Dirham 3,67,250 की रकम का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत करीब ₹95.65 लाख बताई गई है।

मामले में अब पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि जिन सामानों की डिलीवरी दिखाई गई, वे वास्तव में भेजे गए थे या नहीं। जांचकर्ता यह भी पता लगा रहे हैं कि लेनदेन में इस्तेमाल किए गए बिल ऑफ लैडिंग वास्तविक थे या कथित तौर पर तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज। इसके साथ ही रकम के हस्तांतरण और उसके बाद उसके इस्तेमाल की पूरी कड़ी भी जांच के दायरे में है।

प्रारंभिक जांच के बाद फोकल प्वाइंट पुलिस ने आरोपी मनोज कमलेश भाई के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 467, 468, 471 और 420 के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं गंभीर जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, जाली दस्तावेज को वास्तविक बताकर इस्तेमाल करने और धोखाधड़ी से संबंधित हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित दस्तावेज कब और कहां तैयार किए गए और उन्हें किन लोगों को भेजा गया।

जांच में करीब ₹95.65 लाख की रकम के वित्तीय ट्रेल को भी खंगाला जाएगा। पुलिस बैंक खातों, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित लेनदेन की जानकारी जुटाकर यह पता करेगी कि रकम किस खाते में गई और उसके बाद किन खातों में ट्रांसफर की गई। रकम प्राप्त करने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

बिल ऑफ लैडिंग और अन्य कारोबारी दस्तावेज जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माने जा रहे हैं। पुलिस संबंधित शिपिंग, लॉजिस्टिक्स और कारोबारी संस्थाओं से दस्तावेजों का सत्यापन करा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि दस्तावेज वास्तव में जारी किए गए थे या नहीं और उनमें दर्ज माल को निर्धारित स्थान तक भेजा गया था या नहीं।

अंतरराष्ट्रीय लेनदेन होने के कारण पुलिस दुबई स्थित कारोबारी साझेदार से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है। शिकायतकर्ता, आरोपी और विदेशी कारोबारी के बीच हुई बातचीत, ईमेल, चालान, भुगतान रिकॉर्ड, शिपिंग दस्तावेज और अन्य पत्राचार को जांच का हिस्सा बनाया जा सकता है।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, डिजिटल माध्यम से साझा किए गए कारोबारी दस्तावेजों से जुड़े मामलों में दस्तावेजों के वास्तविक स्रोत और उनकी प्रमाणिकता की जांच जरूरी होती है। ईमेल, डिजिटल फाइल, बैंकिंग रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक संचार का सुरक्षित तरीके से विश्लेषण यह स्पष्ट करने में मदद कर सकता है कि किसी कारोबारी लेनदेन को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था या नहीं।

पुलिस के अनुसार, मामले की जांच जारी है। बिल ऑफ लैडिंग, वित्तीय लेनदेन और माल की कथित डिलीवरी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि कथित धोखाधड़ी में आरोपी के अलावा कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।

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