अहमदाबाद: गुजरात के दाहोद जिले में सामने आए फर्जी सरकारी कार्यालय घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों में शामिल अबुबकर जकरियाली सैयद, उसके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़ी ₹22.70 करोड़ की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं। यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, घोटाले में सरकारी विभागों के नाम पर फर्जी कार्यालय बनाकर सरकारी धन हासिल किया गया और बाद में रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया।
ED के अहमदाबाद जोनल कार्यालय ने बताया कि इस मामले में जांच दाहोद टाउन ए डिवीजन पुलिस थाने में वर्ष 2023 में दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई थी। पुलिस की FIR में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने दाहोद जिले में सिंचाई और जल संसाधन विभाग के छह फर्जी सरकारी कार्यालय बनाए थे। इन कार्यालयों के जरिए आरोपियों ने खुद को सरकारी अधिकारी के रूप में पेश किया और कथित तौर पर सरकारी मुहरों, हस्ताक्षरों तथा दस्तावेजों की जालसाजी की।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी योजनाओं और कार्यों से संबंधित मंजूरियां हासिल कीं। ED की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कुल 121 फर्जी कार्यों की मंजूरी कराई और उनके नाम पर सरकारी धन प्राप्त किया। इस रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय आरोपियों ने बैंक खातों का जटिल नेटवर्क तैयार किया, जिसके जरिए कथित तौर पर धन को अलग-अलग व्यक्तियों और संस्थाओं तक पहुंचाया गया।
ED के मुताबिक, फर्जी सरकारी कार्यालयों के नाम पर खोले गए नौ बैंक खातों में घोटाले की रकम जमा की गई थी। इसके बाद इन खातों से रकम को 18 मध्यवर्ती बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। जांच में आगे पता चला कि इन 18 खातों से धनराशि 118 अन्य बैंक खातों में भेजी गई, जो आरोपियों से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम पर थे। एजेंसी अब इस पूरे मनी ट्रेल की जांच कर रही है।
जांच के दौरान ED ने पाया कि कथित अपराध से हासिल रकम का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने, निवेश करने और अन्य गतिविधियों में किया गया। इसी आधार पर एजेंसी ने अबुबकर जकरियाली सैयद, उसके परिवार और सहयोगियों से जुड़ी संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। अटैच की गई संपत्तियों में सात जमीन के टुकड़े, म्यूचुअल फंड में किए गए निवेश और विभिन्न बैंक खातों में मौजूद रकम शामिल है। इन सभी की कुल कीमत ₹22.70 करोड़ बताई गई है।
यह मामला सामने आने के बाद कई आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई थी। इस प्रकरण में पूर्व IAS अधिकारी बीडी निनामा समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। फर्जी सरकारी कार्यालयों के जरिए सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और दस्तावेजी प्रक्रिया का कथित तौर पर दुरुपयोग किए जाने के कारण जांच एजेंसियों ने मामले को गंभीरता से लिया है।
ED अब यह पता लगाने में जुटी है कि 121 फर्जी कार्यों के नाम पर कितनी सरकारी रकम हासिल की गई और उस धन का अंतिम इस्तेमाल कहां हुआ। बैंक खातों के रिकॉर्ड, संपत्तियों की खरीद, निवेश और आरोपियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच के जरिए कथित अपराध से अर्जित रकम की पूरी कड़ी तैयार की जा रही है।
जांच एजेंसी के अनुसार, संपत्तियों की अस्थायी कुर्की का उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित धन से बनाई गई संपत्तियों को कानूनी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षित रखना है। मामले में आगे की जांच जारी है और अन्य व्यक्तियों, संस्थाओं तथा वित्तीय लेनदेन की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
दाहोद का यह मामला सरकारी पहचान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का कथित दुरुपयोग कर सार्वजनिक धन हासिल करने के गंभीर आरोपों से जुड़ा है। छह फर्जी कार्यालय, 121 कथित फर्जी कार्य और 118 खातों तक पहुंची रकम की कड़ी ने जांच को व्यापक बना दिया है। ED की आगे की कार्रवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और सरकारी धन की कुल कितनी राशि कथित तौर पर ठगी गई।
