आंध्र प्रदेश की कंपनी का निदेशक बनकर 30 मीट्रिक टन एस-7 तेजा मिर्च सप्लाई करने का किया दावा; रकम मिलने के बाद डिलीवरी नहीं दी, साइबर क्राइम थाने में मुकदमा

इंडियामार्ट पर मिर्च खरीदने की डील, ₹21 लाख एडवांस लेते ही गायब हुआ कारोबारी

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By Roopa
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नोएडा: ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म इंडियामार्ट पर मिर्च खरीदने के लिए संपर्क करना ग्रेटर नोएडा के एक कारोबारी को महंगा पड़ गया। आंध्र प्रदेश की एक एक्सपोर्ट कंपनी का निदेशक बनकर एक व्यक्ति ने 30 मीट्रिक टन एस-7 तेजा मिर्च सप्लाई करने का सौदा किया। इसके बाद कारोबारी से एडवांस के तौर पर ₹21 लाख अलग-अलग माध्यमों से अपने बताए बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए। रकम मिलने के बाद आरोपी ने न तो मिर्च की खेप भेजी और न ही पैसे लौटाए। काफी समय तक संपर्क करने की कोशिश के बावजूद जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

सेक्टर बीटा-2 निवासी विष्णु कुमार शर्मा जैविक खाद का कारोबार करते हैं। पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, जनवरी 2025 में उन्होंने अपने कारोबार के लिए थोक मात्रा में मिर्च खरीदने की योजना बनाई थी। इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म इंडियामार्ट पर मिर्च के थोक विक्रेताओं और सप्लायर की तलाश शुरू की। इसी दौरान उनकी बातचीत आंध्र प्रदेश के गुंटूर निवासी कुनापरेड्डी विजय कृष्ण से हुई।

आरोप है कि विजय कृष्ण ने खुद को कुनापरेड्डी एक्सपोर्ट्स एलएलपी का निदेशक बताया। बातचीत के दौरान उसने एस-7 तेजा मिर्च की बड़ी खेप उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। दोनों पक्षों के बीच 30 मीट्रिक टन मिर्च की सप्लाई को लेकर सौदा तय हुआ। कारोबारी को भरोसा दिलाया गया कि भुगतान मिलने के बाद तय समय पर मिर्च की खेप ग्रेटर नोएडा पहुंचा दी जाएगी।

शिकायत के अनुसार, कारोबारी ने आरोपी की ओर से उपलब्ध कराए गए बैंक खातों में भुगतान करना शुरू किया। 21 फरवरी को चेक के माध्यम से पहले ₹5 लाख और फिर ₹12 लाख का भुगतान किया गया। इसके बाद सौदे से संबंधित शेष रकम भी ट्रांसफर की गई। इस तरह अलग-अलग भुगतानों के जरिए कुल ₹21 लाख आरोपी के बताए खाते में पहुंच गए।

रकम का भुगतान पूरा होने के बाद कारोबारी को उम्मीद थी कि जल्द ही मिर्च की खेप भेज दी जाएगी। हालांकि, निर्धारित समय बीतने के बाद भी 30 मीट्रिक टन मिर्च ग्रेटर नोएडा नहीं पहुंची। पीड़ित ने आरोपी से फोन और अन्य माध्यमों से संपर्क कर डिलीवरी के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की। शुरुआत में टालमटोल वाले जवाब मिलने का आरोप है, जबकि बाद में आरोपी से संपर्क ही नहीं हो सका।

इसके बाद कारोबारी को लेनदेन में धोखाधड़ी की आशंका हुई। उन्होंने उपलब्ध दस्तावेजों, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड और ऑनलाइन बातचीत के आधार पर साइबर क्राइम थाने में शिकायत दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अब इंडियामार्ट पर हुई बातचीत, चैट, आरोपी द्वारा उपलब्ध कराई गई कंपनी की जानकारी, बैंक खातों और ₹21 लाख के ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड की जांच कर रही है। इसके अलावा यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपी ने कंपनी के नाम और निदेशक पद से संबंधित जानकारी का इस्तेमाल किस तरह किया और भुगतान की रकम किन खातों में पहुंची।

पुलिस का कहना है कि ऑनलाइन कारोबार में किसी नए सप्लायर के साथ बड़ी रकम का लेनदेन करने से पहले कंपनी के पंजीकरण, बैंक खाते और कारोबारी दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन जरूरी है। मामले में डिजिटल और बैंकिंग साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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