कोयंबटूर में 67 वर्षीय रिटायर्ड सरकारी डॉक्टर को WhatsApp पर CBI अधिकारी बनकर डराया; बैंक खाते में संदिग्ध लेनदेन का आरोप लगाकर ‘वेरिफिकेशन’ के नाम पर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराई रकम

Digital Arrest का खौफ, CBI की फर्जी जांच और ₹98 लाख की ठगी; रिटायर्ड डॉक्टर बनीं शिकार

Roopa
By Roopa
5 Min Read

कोयंबटूर: साइबर ठगों ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारी बनकर 67 वर्षीय रिटायर्ड सरकारी डॉक्टर को कथित तौर पर ‘Digital Arrest’ के जाल में फंसा लिया। आरोपियों ने WhatsApp के जरिए महिला से संपर्क किया और दावा किया कि उनके बैंक खाते में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चला है। इसके बाद कई दिनों तक उन्हें कथित तौर पर डिजिटल निगरानी में रखने का डर दिखाया गया। जांच और सत्यापन के नाम पर आरोपियों ने महिला से अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹98 लाख ट्रांसफर करा लिए। रकम मिलने के बाद ठगों ने संपर्क बंद कर दिया। शिकायत के आधार पर कोयंबटूर सिटी साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने WhatsApp पर संपर्क कर खुद को CBI अधिकारी बताया। बातचीत के दौरान उन्होंने महिला को बताया कि उनके बैंक खाते से जुड़े कुछ लेनदेन संदिग्ध पाए गए हैं और यह किसी वित्तीय अपराध से संबंधित हो सकता है। ठगों ने कथित तौर पर महिला को विश्वास दिलाया कि उनके बैंक खाते की जांच की जा रही है और मामले में किसी तरह की कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा।

इसके बाद साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर ‘Digital Arrest’ का डर पैदा किया। महिला को यह विश्वास दिलाया गया कि जांच पूरी होने तक वह अधिकारियों की निगरानी में हैं और किसी से संपर्क करने या प्रक्रिया से बाहर जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। ठगों ने कानून प्रवर्तन एजेंसी का नाम और जांच प्रक्रिया का हवाला देकर महिला पर मानसिक दबाव बनाया। इसी दबाव के बीच उसे अपने बैंक खाते में मौजूद रकम कथित सत्यापन प्रक्रिया के लिए उपलब्ध कराए गए अलग-अलग खातों में भेजने को कहा गया।

आरोपियों ने महिला को भरोसा दिलाया कि उनके खाते से भेजी जा रही रकम केवल जांच के दौरान सत्यापन के लिए इस्तेमाल होगी और प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। पुलिस के अनुसार, महिला ने आरोपियों की बातों पर विश्वास करते हुए कई लेनदेन में कुल ₹98 लाख अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। रकम भेजने के बाद भी महिला को कुछ समय तक कथित जांच प्रक्रिया जारी रहने का भरोसा दिया जाता रहा।

जब सभी भुगतान पूरे हो गए तो आरोपियों ने महिला से संपर्क करना बंद कर दिया। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं। उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस को दी। शिकायत मिलने के बाद कोयंबटूर सिटी साइबर क्राइम पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

जांचकर्ता अब उन बैंक खातों की जानकारी जुटा रहे हैं, जिनमें महिला ने रकम ट्रांसफर की थी। पुलिस पैसों के लेनदेन की पूरी कड़ी का पता लगाने के साथ यह जांच कर रही है कि रकम किन खातों में आगे भेजी गई। संबंधित खाताधारकों, मोबाइल नंबरों, WhatsApp संपर्कों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस वारदात के पीछे कितने लोग शामिल हैं और क्या आरोपियों ने इसी तरीके से अन्य लोगों को भी निशाना बनाया है।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, ‘Digital Arrest’ साइबर ठगों की ऐसी रणनीति है, जिसमें वे पुलिस, CBI, ED या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बनकर पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल, WhatsApp या फोन के माध्यम से लगातार दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर कराने की कोशिश की जाती है। किसी भी वास्तविक जांच में कोई सरकारी एजेंसी व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल पर ‘Digital Arrest’ नहीं करती और न ही सत्यापन के नाम पर किसी निजी बैंक खाते में रकम भेजने का निर्देश देती है।

कोयंबटूर साइबर क्राइम पुलिस के मुताबिक, इस साल अब तक ऑनलाइन धोखाधड़ी से संबंधित 6,500 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं और इनमें रिपोर्ट की गई वित्तीय क्षति करीब ₹48 करोड़ है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या वीडियो कॉल पर घबराकर पैसे ट्रांसफर न करें। वित्तीय साइबर ठगी होने पर तुरंत बैंक को सूचना देने के साथ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं या 1930 पर संपर्क करें, ताकि रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने का प्रयास किया जा सके।

हमसे जुड़ें

Share This Article