लखनऊ। राजधानी में एक हेल्थ केयर कंपनी के नाम पर बैंक से ₹10.45 करोड़ का ऋण लेने में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल और मेडिकल उपकरण खरीदने के नाम पर फर्जी कोटेशन तैयार कर करोड़ों रुपये के भुगतान कराए गए। शिकायतकर्ता का दावा है कि करीब ₹12 करोड़ के उपकरण खरीदे जाना दिखाया गया, जबकि बाद की जांच में इन उपकरणों की वास्तविक कीमत करीब ₹76 लाख आंकी गई। मामले में करीब एक साल पहले प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने जांच दूसरे अधिकारी को सौंपने की मांग की है।
मामला श्री राम जानकी हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। शिकायतकर्ता विद्युत कुमार जैन के अनुसार, दिसंबर 2022 में कंपनी के साथ एक समझौता हुआ था। इसके तहत उनकी इमारत में अस्पताल शुरू किया जाना था और कंपनी में जैन की 36 प्रतिशत हिस्सेदारी तय हुई थी। उनका दावा है कि समझौते के बाद उन्होंने कंपनी के खाते में करीब ₹1.30 करोड़ जमा किए।
इसके बाद कंपनी के लिए इंडियन बैंक की हजरतगंज शाखा से ₹10.45 करोड़ का ऋण मंजूर हुआ। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ऋण की मंजूरी, रकम जारी करने और अस्पताल के लिए उपकरणों की खरीद के भुगतान में कथित अनियमितताएं की गईं। उनका दावा है कि उपकरणों की खरीद के लिए ऐसे कोटेशन का इस्तेमाल किया गया, जिनके आधार पर वास्तविक कीमत से कई गुना अधिक रकम का भुगतान कराया गया।
जैन के अनुसार, दस्तावेजों में करीब ₹12 करोड़ के अस्पताल और मेडिकल उपकरण खरीदे जाने का उल्लेख किया गया, लेकिन बाद में इन उपकरणों की कीमत की जांच की गई तो यह राशि करीब ₹76 लाख आंकी गई। यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो इससे खरीद प्रक्रिया और बैंक से जारी ऋण की राशि के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
शिकायतकर्ता ने ऋण प्रक्रिया में कुछ बैंक अधिकारियों की कथित भूमिका की भी आशंका जताई है। उनका कहना है कि बैंक से ऋण मंजूर कराने से लेकर राशि जारी करने और उपकरण खरीद के भुगतान तक की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। हालांकि, बैंक अधिकारियों की भूमिका और लगाए गए अन्य आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
मामले में शिकायतकर्ता की ओर से न्यायालय का रुख किया गया था। न्यायालय के आदेश के बाद 14 जुलाई 2025 को विकासनगर थाने में संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई। प्राथमिकी दर्ज हुए करीब एक वर्ष बीतने के बावजूद किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने का दावा करते हुए जैन ने संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) को पत्र दिया है।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मौजूदा विवेचना किसी दूसरे अधिकारी को सौंपी जाए, ताकि मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच हो सके। उन्होंने ऋण की पूरी प्रक्रिया, कंपनी के खातों में जमा रकम, बैंक से जारी ₹10.45 करोड़ और उपकरण खरीद के लिए किए गए भुगतानों की जांच कराने की मांग की है।
जांच में यह भी स्पष्ट किया जाना है कि कथित रूप से ₹12 करोड़ की खरीद किन कंपनियों या आपूर्तिकर्ताओं से दिखाई गई, भुगतान किन खातों में किया गया और वास्तविक रूप से कितने उपकरण खरीदे गए। इसके अलावा उपकरणों की कीमत ₹76 लाख आंके जाने के आधार और संबंधित मूल्यांकन दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस के सामने अब ऋण स्वीकृति से लेकर रकम के इस्तेमाल और उपकरण खरीद तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की चुनौती है। शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
