लखनऊ। राजधानी में साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों के जरिए खपाने वाले गिरोह का कैसरबाग पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस ने लाटूश रोड स्थित आशीर्वाद होटल के एक कमरे में छापा मारकर चार नाबालिगों समेत छह लोगों को पकड़ा है। गिरोह कथित तौर पर ‘म्यूल बैंक खातों’ का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को मंगाने और फिर उसे एटीएम के जरिए निकालकर दूसरे खातों में पहुंचाने के लिए करता था। जांच के दौरान भारतीय स्टेट बैंक से जुड़े संदिग्ध खातों में जमा करीब ₹3.28 करोड़ की रकम को होल्ड और डेबिट फ्रीज कराया गया है।
पुलिस को 3 सितंबर को सूचना मिली थी कि लाटूश रोड स्थित आशीर्वाद होटल के कमरा नंबर 101 में कुछ लोग ठहरे हुए हैं। सूचना में बताया गया कि ये लोग लोगों को बहला-फुसलाकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं और साइबर ठगी से आने वाली रकम उन खातों में मंगाते हैं। इसके बाद एटीएम के जरिए पैसा निकालकर दूसरे बैंक खातों में जमा किया जाता है। पुलिस टीम ने सूचना के आधार पर होटल में पहुंचकर कमरे की तलाशी ली।
छापेमारी के समय कमरे में पांच लोग मौजूद मिले, जिनमें चार नाबालिग थे। इसी दौरान एक अन्य आरोपी भी कमरे में पहुंच गया, जिसे पुलिस ने पकड़ लिया। तलाशी के दौरान एक बैग से छह एटीएम कार्ड, एक जियो सिम कार्ड, भारतपे की स्वैपिंग मशीन और दो बैंक पासबुक बरामद हुईं। पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और नकदी भी बरामद की है।
पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों में बिहार के गोपालगंज निवासी 21 वर्षीय रितेश सिंह शामिल है। पूछताछ में सामने आया कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम अलग-अलग म्यूल खातों में भेजी जाती थी। इन खातों से रकम निकालने के बाद उसे दूसरे लोगों के भारतीय स्टेट बैंक खातों में जमा किया जाता था। इस पूरे काम के बदले गिरोह के सदस्यों को कमीशन मिलने की बात पूछताछ में सामने आई है।
जांच के दौरान पुलिस को लखनऊ के काकोरी निवासी 19 वर्षीय प्रिंस कुशवाहा के भी गिरोह से जुड़े होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के लिए कितने बैंक खाते संचालित किए जा रहे थे और साइबर ठगी की रकम किन-किन मामलों से होकर इन खातों तक पहुंची।
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पूछताछ में आरोपियों और बाल अपचारियों ने कथित तौर पर बताया कि कम समय में ज्यादा पैसा कमाने और महंगी जीवनशैली की चाहत ने उन्हें इस काम से जोड़ा। उन्हें यह भरोसा दिलाया गया था कि ऑनलाइन माध्यम से म्यूल खातों में रकम आएगी और पुलिस की पकड़ में आने की आशंका कम रहेगी। इसी लालच में वे खातों में रकम मंगाने, एटीएम से निकालने और उसे दूसरे खातों में जमा करने का काम करने लगे।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह का काम केवल खाते उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं था, बल्कि साइबर ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में पहुंचाने में भी इसकी भूमिका थी। ऐसे खातों के इस्तेमाल से ठगी की रकम का वास्तविक स्रोत छिपाने और जांच एजेंसियों के लिए धन के प्रवाह का पता लगाना मुश्किल बनाने की कोशिश की जाती है।
जांचकर्ताओं ने भारतीय स्टेट बैंक से जुड़े संदिग्ध खातों की पड़ताल शुरू कर दी है। पुलिस ने करीब ₹3.28 करोड़ की रकम को होल्ड और डेबिट फ्रीज कराया है, ताकि इसे आगे दूसरे खातों में स्थानांतरित न किया जा सके। अब खातों के लेनदेन, रकम भेजने वाले स्रोत और निकासी करने वालों की पहचान के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस ने दोनों वयस्क आरोपियों को अदालत में पेश किया है, जबकि चारों बाल अपचारियों को नियमानुसार किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जा रहा है। पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश के साथ यह भी जांच कर रही है कि इन खातों का इस्तेमाल कितने साइबर अपराधों में किया गया और नेटवर्क के पीछे कौन लोग काम कर रहे हैं।
