पूर्व और मौजूदा सरकारी कर्मचारियों समेत ठेकेदार पर आरोप; सीमेंट-स्टील का हिसाब नहीं मिला, फर्जी दस्तावेज से ₹73 हजार की CDR भुनाने और सरकारी देनदारी के बावजूद ₹81,400 जारी करने का आरोप

कुपवाड़ा पुल निर्माण में ₹7.12 लाख के कथित गबन का मामला, ACB ने 10 के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

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By Roopa
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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में पुल निर्माण से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें लोक निर्माण विभाग (PWD) के नौ पूर्व और मौजूदा कर्मचारी तथा एक निजी ठेकेदार शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार, लस्तियाल-कलारूस इलाके में स्टील पुल के निर्माण से जुड़े मामले में सरकारी खजाने को कुल ₹7.12 लाख का नुकसान पहुंचने का आरोप है।

ACB ने सोमवार को विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निरोधक, बारामुला की अदालत में चार्जशीट दाखिल की। आरोपियों में तत्कालीन कार्यकारी अभियंता मोहम्मद सुल्तान शेख और अजित सिंह चोपड़ा समेत PWD के इंजीनियरिंग और लेखा विभाग से जुड़े अधिकारी तथा ठेकेदार गुलाम मोही-उद-दीन लोन शामिल हैं। मामले में अभियोजन की आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद चार्जशीट अदालत में पेश की गई।

2010 में मिला था पुल निर्माण का ठेका

ACB की जांच के अनुसार, लस्तियाल-कलारूस में स्टील पुल का निर्माण कार्य सितंबर 2010 में ठेकेदार गुलाम मोही-उद-दीन लोन को आवंटित किया गया था। अनुबंध के तहत काम तीन महीने में पूरा किया जाना था। आरोप है कि ठेकेदार ने काम शुरू करने में काफी देरी की।

जांच एजेंसी के मुताबिक, निर्माण कार्य शुरू होने के बाद भी पुल का केवल एक हिस्सा पूरा किया गया और बाद में काम अधूरा छोड़ दिया गया। इस दौरान विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई निर्माण सामग्री और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की निगरानी में कथित तौर पर गंभीर लापरवाही सामने आई।

₹5.63 लाख की सीमेंट-स्टील सामग्री का हिसाब नहीं

ACB के अनुसार, जांच के दौरान सरकारी स्टोर से जारी सीमेंट और स्टील समेत करीब ₹5.63 लाख मूल्य की सामग्री का पूरा हिसाब नहीं मिल सका। आरोप है कि यह सामग्री न तो बरामद हुई और न ही उसके इस्तेमाल या वापसी से संबंधित संतोषजनक रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया।

एजेंसी ने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि वे सरकारी सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित करते, निर्माण कार्य की प्रगति पर नजर रखते और अनुबंध की शर्तों का पालन कराते। इसके बावजूद कथित तौर पर सरकारी सामग्री की वसूली या उसका उचित हिसाब सुनिश्चित नहीं किया गया।

फर्जी पत्र के आधार पर ₹73 हजार की CDR जारी

जांच में एक अन्य कथित वित्तीय अनियमितता भी सामने आई। ACB के मुताबिक, ठेकेदार की ₹73 हजार की कैश डिपॉजिट रसीद यानी CDR को कथित तौर पर फर्जी विभागीय पत्र के आधार पर जारी और भुना लिया गया।

एजेंसी का आरोप है कि संबंधित संचार सक्षम विभागीय प्राधिकारी की ओर से जारी किए जाने का दावा किया गया था, जबकि जांच में उसके फर्जी होने की बात सामने आई। इस प्रक्रिया में सरकारी अधिकारियों की भूमिका और दस्तावेजों के इस्तेमाल की भी जांच की गई।

सरकारी देनदारी के बावजूद ₹81,400 जारी

ACB ने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार के बिल डिपॉजिट के रूप में जमा ₹81,400 की रकम उस समय जारी कर दी गई, जब सरकारी देनदारियां अभी बकाया थीं। एजेंसी के अनुसार, संबंधित अधिकारियों को सरकारी हितों की रक्षा करते हुए लंबित देनदारियों की वसूली सुनिश्चित करनी थी।

ACB का कहना है कि सरकारी सामग्री की सुरक्षा, अनुबंध की शर्तों के पालन और सरकारी बकाया की वसूली में कथित लापरवाही के कारण सरकारी खजाने को कुल ₹7.12 लाख का नुकसान हुआ।

10 आरोपियों के नाम चार्जशीट में

चार्जशीट में पूर्व कार्यकारी अभियंता मोहम्मद सुल्तान शेख और अजित सिंह चोपड़ा, पूर्व सहायक कार्यकारी अभियंता नजीर अहमद शाह और अब्दुल राशिद डार, जूनियर इंजीनियर मंजूर अहमद सुमजी, सहायक लेखा अधिकारियों जीएच कादिर भट और अब्दुल हमीद डार, पूर्व कैशियर/सीनियर असिस्टेंट गुलाम रसूल लोन, हेल्पर/असिस्टेंट कैशियर अब्दुल मजीद मलिक तथा ठेकेदार गुलाम मोही-उद-दीन लोन को आरोपी बनाया गया है।

ACB के मुताबिक, सभी 10 आरोपी सोमवार को अदालत में पेश हुए। अदालत ने निर्धारित शर्तों के तहत जमानत और जमानती मुचलके जमा कराने के बाद उन्हें जमानत दे दी।

25 नवंबर को अगली सुनवाई

मामले में अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 25 नवंबर 2026 की तारीख तय की है। अब न्यायिक कार्यवाही के दौरान यह देखा जाएगा कि जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए दस्तावेज और साक्ष्य आरोपों को किस तरह स्थापित करते हैं।

ACB की चार्जशीट के बाद मामले में पुल निर्माण की गुणवत्ता के साथ सरकारी धन, सामग्री और विभागीय प्रक्रियाओं की निगरानी को लेकर भी सवाल उठे हैं। अदालत में आगे होने वाली सुनवाई के दौरान कथित वित्तीय नुकसान और प्रत्येक आरोपी की भूमिका पर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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