जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितता की जांच के दौरान खुलासा; 24 सफल अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड, हस्ताक्षर वाले खाली कागज और चेकबुक रखने का आरोप, भुगतान नहीं करने पर ब्लैकमेल की तैयारी

पेपरलीक से ब्लैकमेलिंग तक का ‘कॉरपोरेट सिंडिकेट’, अभय तिवारी ने बनाई वसूली की पूरी व्यवस्था

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By Roopa
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रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में कथित अनियमितता की जांच के दौरान एक संगठित नेटवर्क के काम करने का खुलासा हुआ है। जांच में आरोप है कि जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में अनियमितता के कथित मास्टरमाइंड अभय तिवारी ने पेपरलीक, अभ्यर्थियों से वसूली और बाद में ब्लैकमेलिंग के लिए अलग-अलग स्तर पर सिंडिकेट तैयार किया था। जांच एजेंसी की अलग-अलग विशेष जांच टीमें दोनों मामलों में जुटी हैं और लेनदेन, दस्तावेजों तथा परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

जांच में सामने आया है कि 14वीं जेपीएससी समेत अन्य परीक्षाओं में कथित तौर पर सेटिंग कराने वाले अभ्यर्थियों से चयन के बाद भी पूरी रकम नहीं मिलने की स्थिति के लिए पहले से तैयारी की गई थी। आरोप है कि अभय तिवारी ने 24 सफल अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड अपने पास रखे थे। इसके अलावा ए4 साइज के खाली कागजों पर अभ्यर्थियों के हस्ताक्षर और उनकी चेकबुक भी रखे जाने की बात जांच में सामने आई है।

जांच एजेंसी के अनुसार, कथित योजना के तहत यदि कोई अभ्यर्थी चयन के बाद तय रकम देने से इनकार करता तो उसके पास मौजूद दस्तावेजों और बैंकिंग साधनों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा सकता था। इस तरह पेपरलीक या परीक्षा में कथित मदद के बदले रकम वसूलने के साथ-साथ भुगतान नहीं करने वालों को ब्लैकमेल करने का रास्ता भी तैयार रखा गया था।

जांच में यह भी सामने आया है कि अभय तिवारी से जुड़े गिरोह के पास अभ्यर्थियों के दस्तावेज जुलाई तक मौजूद थे। बाद में जब जेपीएससी परीक्षाओं में अनियमितता को लेकर जांच और चर्चा तेज हुई तो अभ्यर्थियों से जुड़े प्रमाणपत्र उमेश कुमार के पास रखे जाने की बात सामने आई। उमेश कुमार ने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर बताया कि मामले में खुलासे शुरू होने के बाद वह बनारस चला गया था। वहां से लौटने के बाद उसने रांची से बाहर अभ्यर्थियों को उनके दस्तावेज वापस सौंपे।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

अभय तिवारी के कथित नेटवर्क में वसूली की रकम को भी अलग-अलग स्तरों से आगे पहुंचाने की व्यवस्था होने का दावा जांच में किया गया है। उसके स्वीकारोक्ति बयान के आधार पर सामने आया कि 11 अभ्यर्थियों से वसूली गई रकम उसके भाई अक्षय के जरिए उसके साले सौरभ पांडेय तक पहुंचाई गई थी। दूसरी ओर, अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह को उपलब्ध कराए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि अभय तिवारी और उमेश कुमार ने जेपीएससी के अलावा अन्य परीक्षाओं में भी अभ्यर्थियों से कथित तौर पर वसूली की थी। इससे जांच का दायरा केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। जांच टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि किन परीक्षाओं में कथित तौर पर अनियमितता की गई और कितने अभ्यर्थियों से रकम ली गई।

अभय तिवारी के कथित नेटवर्क में कंपनियों के इस्तेमाल का पहलू भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरोप है कि उसने टीडीपीएल की झारखंड में एंट्री कराने में भूमिका निभाई। इसके लिए उसके साले सौरभ पांडेय के नाम पर लालपुर स्थित एक फ्लैट का लीज एग्रीमेंट कराया गया था। परीक्षा की ओएमआर शीट और अन्य प्रक्रिया में कथित छेड़छाड़ के लिए टीडीपीएल और लखनऊ की कंपनी पिकर टेक्नोलॉजी के बीच समझौता कराने की बात भी सामने आई है।

मामले में गिरफ्तार हो चुके मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद एबाद के पिकर टेक्नोलॉजी के लिए काम करने का दावा जांच में किया गया है। कंपनी के निदेशक हेमंत शर्मा को कथित तौर पर कंपनी का खर्च उठाने के साथ 20 प्रतिशत कमीशन देने का भरोसा दिया गया था। जांच एजेंसी अब कंपनियों के बीच हुए समझौतों, वित्तीय लेनदेन, ओएमआर शीट तक पहुंच और परीक्षा प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित सिंडिकेट में किस स्तर पर कौन व्यक्ति जिम्मेदारी संभाल रहा था और परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री तक उसकी पहुंच कैसे बनी।

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