इंदौर। इंदौर की CBI अदालत ने UCO Bank को ₹3 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाने वाले बैंक धोखाधड़ी मामले में 13 आरोपियों को पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सभी दोषियों पर कुल ₹1.56 लाख का जुर्माना भी लगाया। आरोपियों को तीसरे पक्ष की जमीन को कथित तौर पर गिरवी रखकर और फर्जी दस्तावेजों व काल्पनिक पहचान का इस्तेमाल कर बैंक से ऋण लेने का दोषी पाया गया।
दोषियों की पहचान अनिल पटेल, मनमोहन यादव, कैलाश यादव, मोना यादव, दीपक यादव, आशीष पटेल, तुलसीराम यादव, मोहन यादव, रजनी यादव, संदीप यादव, सतीश पटेल (पाटिल), कल्पना पटेल और राधा यादव के रूप में हुई है। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने की थी।
CBI के अनुसार, मामले की शुरुआत 30 मार्च 2012 को हुई, जब इंदौर स्थित UCO Bank के तत्कालीन डिप्टी जोनल मैनेजर की शिकायत पर केस दर्ज किया गया। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत बैंक से ऋण हासिल करने के लिए ऐसी संपत्तियों का इस्तेमाल किया, जिन पर उनका वास्तविक स्वामित्व नहीं था।
जांच में आरोप लगा कि ऋण लेने की प्रक्रिया के दौरान आरोपियों ने बैंक के मूल्यांकनकर्ताओं को अलग-अलग संपत्तियां दिखाई थीं। इसके साथ ही ऋण हासिल करने के लिए फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया गया। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य बैंक अधिकारियों को वास्तविक स्थिति से गुमराह कर ऋण मंजूर कराना था।
CBI के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर जाली बिक्री विलेख भी जमा किए थे। इन दस्तावेजों पर उप-पंजीयकों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। इसके अलावा फर्जी SDO राजस्व डायवर्जन आदेश भी प्रस्तुत किए गए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल बैंक को यह विश्वास दिलाने के लिए किया गया कि ऋण के बदले पेश की गई संपत्तियां वैध थीं और उनसे संबंधित दस्तावेज सही थे।
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जांच एजेंसी ने कहा कि इन कथित फर्जीवाड़ों के चलते UCO Bank को ₹3 करोड़ से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ। बैंक से ऋण लेने के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों, संपत्तियों और पहचान से संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद CBI ने मामले में 10 अलग-अलग आरोपपत्र दाखिल किए।
CBI ने 20 दिसंबर 2013 को जांच पूरी करने के बाद 10 चार्जशीट अदालत में दाखिल की थीं। अदालत द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद CBI की ओर से दर्ज मामलों से जुड़े अलग-अलग मुकदमों में सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ दस्तावेजी और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश किए।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और मामले से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा की। सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अदालत ने सभी 13 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने सभी दोषियों पर कुल ₹1.56 लाख का जुर्माना भी लगाया।
CBI ने कहा कि दोषसिद्धि एजेंसी की उस जांच का परिणाम है, जिसमें बैंक ऋण हासिल करने के लिए संपत्ति के दस्तावेजों और पहचान के कथित फर्जी इस्तेमाल की साजिश की जांच की गई थी। एजेंसी के मुताबिक, मामले में तीसरे पक्ष की संपत्तियों का इस्तेमाल, जाली दस्तावेज तैयार करना और फर्जी पहचान के जरिए बैंक को ऋण स्वीकृत करने के लिए प्रेरित करना धोखाधड़ी की मुख्य कड़ियां थीं।
इस फैसले से बैंक धोखाधड़ी के मामलों में फर्जी संपत्ति दस्तावेज और पहचान का इस्तेमाल कर वित्तीय संस्थानों को नुकसान पहुंचाने वाले आरोपियों के खिलाफ लंबी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ है।
