इंदौर। साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत इंदौर क्राइम ब्रांच ने एक संदिग्ध म्यूल बैंक खाते का पता लगाकर उसके खाताधारक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, खाते से करीब ₹1.50 करोड़ का लेनदेन हुआ है और आशंका है कि इसमें साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी रकम की आवाजाही हुई। बैंक रिकॉर्ड और लेनदेन की जांच के बाद खाते का संबंध इंदौर के गणेश नगर रोड स्थित हिमालय कॉलोनी निवासी अभिषेक तिवारी से सामने आया।
कई राज्यों की एजेंसियों से मिली थी खाते की जानकारी
क्राइम ब्रांच को इस बैंक खाते से संबंधित जानकारी अलग-अलग राज्यों की पुलिस और जांच एजेंसियों से मिली थी। खाते में बड़ी रकम के लेनदेन और उसके संभावित साइबर अपराधों से जुड़े होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने बैंक रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया। इसके बाद खाते में हुई जमा और निकासी, संबंधित बैंक खातों तथा लेनदेन के पैटर्न की जांच की गई।
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में खाते से हुए करीब ₹1.50 करोड़ के लेनदेन सामने आए हैं। इन लेनदेन की प्रकृति और रकम के वास्तविक स्रोत की पुष्टि के लिए बैंकिंग दस्तावेजों की जांच जारी है।
15 राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों से जुड़ी कड़ियां
जांच के दौरान पुलिस को इस खाते के लेनदेन की कड़ियां देश के 15 राज्यों में दर्ज साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों से जुड़ी मिली हैं। इनमें दिल्ली, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, असम, बिहार, गुजरात, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं।
इतने राज्यों से जुड़े रिकॉर्ड मिलने के बाद क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि खाते में आई रकम किन मामलों से संबंधित थी और अलग-अलग राज्यों में दर्ज शिकायतों में इस खाते की भूमिका किस स्तर तक रही। पुलिस संबंधित राज्यों की शिकायतों और बैंकिंग रिकॉर्ड का आपस में मिलान कर रही है।
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रकम कहां से आई, कहां गई—जांच जारी
क्राइम ब्रांच की जांच का मुख्य फोकस खाते में आने वाली रकम और उसके बाद किए गए हस्तांतरण पर है। पुलिस यह पता लगा रही है कि रकम किन बैंक खातों से भेजी गई, बाद में किन खातों में ट्रांसफर हुई और क्या इन लेनदेन का संबंध साइबर ठगी के मामलों से है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अभिषेक तिवारी ने बैंक खाते का इस्तेमाल स्वयं किया था या किसी अन्य व्यक्ति अथवा गिरोह को उपलब्ध कराया था। यदि खाते को किसी दूसरे व्यक्ति या समूह के इस्तेमाल के लिए दिया गया था, तो पुलिस उसकी भूमिका और संभावित नेटवर्क की भी जांच करेगी।
साइबर ठगी में म्यूल खातों का इस्तेमाल
म्यूल बैंक खाते साइबर अपराधियों के लिए ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते तक पहुंचाने का माध्यम बन सकते हैं। कई मामलों में खाताधारक कमीशन या अन्य लाभ के बदले अपना बैंक खाता दूसरे लोगों को उपलब्ध करा देते हैं। इसके बाद ठगी से हासिल रकम उस खाते में जमा कराकर आगे दूसरे खातों में भेजी जाती है।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, म्यूल खातों की पहचान साइबर वित्तीय अपराध की जांच में बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इनके जरिए ठगी की रकम की परतें सामने आ सकती हैं। ऐसे मामलों में केवल खाते में रकम आने को पर्याप्त प्रमाण मानने के बजाय यह जांचना जरूरी होता है कि खाताधारक की भूमिका क्या थी, उसे लेनदेन की जानकारी थी या नहीं और रकम आगे किन लोगों तक पहुंची।
इंदौर क्राइम ब्रांच अब गिरफ्तार खाताधारक से पूछताछ के साथ बैंकिंग रिकॉर्ड और विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों की जानकारी का मिलान कर रही है। जांच के आगे बढ़ने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि ₹1.50 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन में खाताधारक की वास्तविक भूमिका क्या थी और इसके पीछे कोई संगठित साइबर अपराध नेटवर्क सक्रिय था या नहीं।
