जी-20 के दौरान हुए बड़े साइबर हमलों से सबक लेते हुए आई4सी, सीईआरटी-इन और एनआईसी के बीच मजबूत समन्वय; संदिग्ध इंटरनेट ट्रैफिक से लेकर सरकारी पोर्टल और संचार प्रणालियों तक पर रहेगी लगातार नजर

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर साइबर हमलों का खतरा, भारत ने तैयार किया बहुस्तरीय डिजिटल सुरक्षा कवच

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By Roopa
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नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान संभावित साइबर हमलों से निपटने के लिए भारतीय साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक तैयारी की है। सम्मेलन से जुड़े डिजिटल ढांचे को सुरक्षित रखने के लिए ऐसी बहुस्तरीय व्यवस्था तैयार की गई है, जिसमें संदिग्ध इंटरनेट गतिविधियों की निगरानी से लेकर हमलों की पहचान और तत्काल प्रतिक्रिया तक कई स्तरों पर सुरक्षा उपाय शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों का लक्ष्य किसी एक सुरक्षा प्रणाली पर निर्भर रहने के बजाय कई परतों वाली साइबर सुरक्षा व्यवस्था के जरिए संभावित हमलों को रोकना है।

भारत ने हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के दौरान साइबर खतरों से निपटने की रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। वर्ष 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान आधिकारिक वेबसाइट पर बड़े पैमाने पर साइबर हमलों के प्रयास दर्ज किए गए थे। सम्मेलन के दिन वेबसाइट पर एक मिनट में लाखों की संख्या में हमले के प्रयास सामने आए थे। उस समय इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी), कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम-इंडिया (सीईआरटी-इन) और नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के बीच समन्वय ने संदिग्ध गतिविधियों को रोकने और इंटरनेट ट्रैफिक को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

जी-20 के अनुभव के बाद अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के लिए साइबर सुरक्षा ढांचे को और मजबूत किया गया है। अब सुरक्षा व्यवस्था को एकल सुरक्षा घेरे के बजाय ‘मल्टी-लेयर्ड साइबर डिफेंस’ के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसके तहत अलग-अलग साइबर सुरक्षा प्रणालियों को आपस में जोड़कर संभावित खतरे की पहचान और रोकथाम को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है।

सुरक्षा व्यवस्था में संदिग्ध इंटरनेट ट्रैफिक की लगातार निगरानी, ट्रैफिक फिल्टरिंग, खतरे से संबंधित जानकारी का विश्लेषण, स्वचालित पहचान प्रणाली और निरंतर साइबर निगरानी जैसे उपाय शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही किसी साइबर घटना के सामने आने पर त्वरित प्रतिक्रिया के लिए भी व्यवस्था तैयार रखी गई है। केंद्रीय और स्थानीय स्तर की एजेंसियों के बीच समन्वय को भी इस सुरक्षा ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और संबंधित एजेंसियों की टीमें सम्मेलन के दौरान डिजिटल गतिविधियों पर लगातार नजर रखेंगी। निगरानी का दायरा केवल सम्मेलन की आधिकारिक वेबसाइट तक सीमित नहीं रहेगा। सम्मेलन से जुड़े सरकारी पोर्टल, संचार प्रणालियां और अन्य महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे भी संभावित साइबर हमलों के निशाने पर हो सकते हैं। ऐसे में इन प्रणालियों की सुरक्षा के लिए अलग-अलग स्तरों पर निगरानी और सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं।

भारत में बढ़ते साइबर हमलों के बीच यह तैयारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 से 2026 के बीच देश में साइबर हमलों की औसत संख्या बढ़कर प्रति सप्ताह 3,800 से अधिक हो गई है। साइबर हमलावर अब पारंपरिक तरीकों के साथ स्वचालित और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्वचालित स्कैनिंग और कमजोर डिजिटल प्रणालियों का पता लगाकर उनके दोहन की कोशिशें बढ़ने को इस वृद्धि के प्रमुख कारणों में माना जा रहा है।

सुरक्षा विशेषज्ञों के सामने चुनौती केवल हमलों को रोकने की नहीं, बल्कि तेजी से बदलते साइबर खतरों की पहचान कर उनके असर को सीमित करने की भी है। भारत में दर्ज दुर्भावनापूर्ण डिजिटल उल्लंघनों में एक चौथाई से अधिक मामलों के कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पन्न होने की बात सामने आई है। इससे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के दौरान साइबर सुरक्षा का जोखिम और जटिल हो गया है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान तैयार किया गया बहुस्तरीय सुरक्षा मॉडल इसी बदलते खतरे को ध्यान में रखकर बनाया गया है। निगरानी, पहचान, ट्रैफिक नियंत्रण और त्वरित प्रतिक्रिया को एक साथ जोड़कर एजेंसियां संभावित हमलों के असर को कम करने की तैयारी में हैं। जी-20 के दौरान मिले अनुभव के आधार पर इस बार डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को अधिक व्यापक और समन्वित तरीके से संभालने की कोशिश की जा रही है।

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