Facebook और Instagram विज्ञापनों के जरिए फैलाए जा रहे खतरनाक APK; Accessibility Permission से डिवाइस पर नियंत्रण की कोशिश, VPN और मैलवेयर से बढ़ा वित्तीय धोखाधड़ी का खतरा

पोर्न ऐप्स के जरिए Android फोन हाईजैक करने की साजिश, MHA ने दी चेतावनी; बैंक खाते और UPI लेनदेन निशाने पर

Roopa
By Roopa
6 Min Read

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली National Cybercrime Threat Analytics Unit ने Android यूजर्स को ऐसे दुर्भावनापूर्ण ऐप्स को लेकर चेतावनी जारी की है, जिन्हें पोर्नोग्राफी ऐप के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। एडवाइजरी के मुताबिक, ये ऐप मोबाइल डिवाइस पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं और इसके बाद बैंकिंग तथा UPI लेनदेन में हस्तक्षेप कर वित्तीय धोखाधड़ी का रास्ता खोल सकते हैं। इन ऐप्स को Facebook और Instagram पर विज्ञापनों तथा संदिग्ध लिंक के जरिए फैलाए जाने की जानकारी सामने आई है।

यह यूनिट Integrated Cybercrime Coordination Centre (I4C) के तहत काम करती है। एडवाइजरी के अनुसार, “Night Play”, “Reloop”, “Kyss”, “Vimo”, “Rivo”, “Nexo” और “Vixa” जैसे नामों से कुछ दुर्भावनापूर्ण ऐप्स का प्रचार किया जा रहा है। सोशल मीडिया विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद यूजर को ऐसी वेबसाइटों पर भेजा जाता है, जहां अश्लील सामग्री उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है। इसके बाद इन वेबसाइटों के जरिए यूजर को Google Play Store के बाहर से APK फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

एक बार APK इंस्टॉल होने के बाद संदिग्ध ऐप कई संवेदनशील Permissions मांग सकते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण Accessibility Permission है। Android की यह सुविधा मूल रूप से विशेष जरूरतों वाले यूजर्स की सहायता के लिए बनाई गई है, लेकिन किसी अनजान ऐप को इसका अधिकार देने पर वह स्क्रीन पर दिखाई देने वाली गतिविधियों के साथ डिवाइस के कई कार्यों तक पहुंच हासिल करने की कोशिश कर सकता है।

साइबर अपराधी इस क्षमता का इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी के लिए कर सकते हैं। वे बैंकिंग या UPI से जुड़ी गतिविधियों में हस्तक्षेप कर अनधिकृत लेनदेन कराने की कोशिश कर सकते हैं। यानी एक संदिग्ध ऐप का इंस्टॉलेशन केवल मोबाइल फोन की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है, बल्कि उससे जुड़े बैंक खातों और डिजिटल भुगतान की सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकता है।

एडवाइजरी में यह भी बताया गया है कि कुछ दुर्भावनापूर्ण ऐप्स डिवाइस में अतिरिक्त एप्लिकेशन इंस्टॉल करने की क्षमता हासिल कर सकते हैं। कुछ मामलों में ये ऐप फोन में VPN भी इंस्टॉल कर सकते हैं। इससे इंटरनेट ट्रैफिक को किसी दूसरे नेटवर्क के जरिए रूट किया जा सकता है, जिससे संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों की पहचान और उनके वास्तविक स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

मैलवेयर से जुड़ा एक और गंभीर खतरा यह है कि कुछ ऐप्स खुद को सामान्य मोबाइल सेटिंग्स के जरिए अनइंस्टॉल किए जाने से रोक सकते हैं। ऐसी स्थिति में पीड़ित के लिए दुर्भावनापूर्ण ऐप को हटाना और फोन पर पूरी तरह नियंत्रण वापस हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

Renowned cyber crime expert and former IPS officer Prof. Triveni Singh ने कहा कि साइबर अपराधी अब यूजर्स की जिज्ञासा और ऑनलाइन सामग्री के प्रति आकर्षण का फायदा उठाकर उन्हें दुर्भावनापूर्ण ऐप इंस्टॉल कराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी अनजान ऐप को Accessibility Permission देना विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे हमलावरों को डिवाइस पर व्यापक नियंत्रण हासिल करने का रास्ता मिल सकता है। यूजर्स को संदिग्ध विज्ञापनों या असत्यापित वेबसाइटों के जरिए APK डाउनलोड करने से बचना चाहिए।

साइबर अपराध इकाई ने Android यूजर्स को सलाह दी है कि वे ऐप्स केवल Google Play Store या अन्य विश्वसनीय ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें। सोशल मीडिया विज्ञापनों, संदिग्ध वेबसाइटों और अनजान लिंक के जरिए उपलब्ध कराई गई APK फाइलों को इंस्टॉल न करने की सलाह दी गई है।

Algoritha Security Launches ‘Make in India’ Cyber Lab for Educational Institutions

यूजर्स को किसी अनजान या संदिग्ध ऐप को Accessibility Permission नहीं देने और फोन में इंस्टॉल ऐप्स की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है। ऐसे ऐप्स जिन्हें यूजर पहचानते नहीं हैं या जिनकी जरूरत नहीं है, उन्हें हटाने की सलाह दी गई है। साथ ही Google Play Protect को सक्रिय रखने और Android डिवाइस को नवीनतम सुरक्षा अपडेट के साथ अपडेट रखने को कहा गया है।

वित्तीय सुरक्षा के लिए बैंक खातों और UPI लेनदेन की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। किसी भी अनधिकृत लेनदेन की जानकारी मिलने पर संबंधित बैंक और साइबर अपराध शिकायत तंत्र को तत्काल सूचना देने को कहा गया है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे हमलों में तकनीकी शोषण के साथ सोशल इंजीनियरिंग का भी इस्तेमाल किया जाता है। अपराधी पहले आकर्षक विज्ञापनों के जरिए यूजर को निशाना बनाते हैं और फिर उसे आधिकारिक ऐप स्टोर के बाहर से APK इंस्टॉल करने के लिए तैयार करते हैं। संवेदनशील Permissions मिलने के बाद डिवाइस पर नियंत्रण हासिल करने और उसका इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी के लिए करने की कोशिश की जा सकती है।

यह चेतावनी ऐसे समय सामने आई है जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म साइबर अपराधियों के लिए बड़ी संख्या में संभावित पीड़ितों तक पहुंचने का माध्यम बन रहे हैं। ऐसे में मोबाइल सुरक्षा केवल बैंकिंग ऐप की सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। यूजर्स को यह भी देखना होगा कि वे कौन-सा ऐप इंस्टॉल कर रहे हैं, उसे कौन-कौन सी Permissions दे रहे हैं और वह ऐप किस स्रोत से डाउनलोड किया गया है।

हमसे जुड़ें

Share This Article