चंडीगढ़ में कंपनी के MD की पहचान का इस्तेमाल कर WhatsApp के जरिए करीब ₹2 करोड़ की कथित ठगी के मामले में साइबर पुलिस ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

व्हाट्सऐप पर मालिक बनकर भेजा संदेश, हैदराबाद की कंपनी से ₹1 करोड़ की साइबर ठगी

Roopa
By Roopa
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हैदराबाद: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में व्हाट्सऐप प्रतिरूपण (इम्पर्सनेशन) के जरिए ₹1 करोड़ की बड़ी साइबर ठगी का मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने एक निजी कंपनी के मालिक के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारी को तत्काल भुगतान करने का निर्देश भेजा। कर्मचारी ने संदेश को वास्तविक मानते हुए बताए गए बैंक खाते में पूरी राशि स्थानांतरित कर दी। बाद में जब कंपनी के मालिक से संपर्क किया गया तो पता चला कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश जारी ही नहीं किया था। इसके बाद कंपनी ने साइबराबाद साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस के अनुसार, निजामपेट निवासी दिलीप कुमार मैसम्मा रिटेल प्राइवेट लिमिटेड का संचालन करते हैं। मंगलवार को कंपनी के एक कर्मचारी के व्हाट्सऐप पर एक अज्ञात नंबर से संदेश प्राप्त हुआ। संदेश भेजने वाले ने स्वयं को कंपनी मालिक के निर्देश पर कार्य करने वाला व्यक्ति बताते हुए दावा किया कि एक महत्वपूर्ण भुगतान तत्काल करना आवश्यक है। संदेश के साथ एक बैंक खाते का विवरण भी साझा किया गया और बिना देरी किए ₹1 करोड़ ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।

कर्मचारी ने संदेश पर संदेह किए बिना उसे अधिकृत निर्देश मान लिया और बताए गए खाते में पूरी राशि भेज दी। भुगतान पूरा होने के बाद उसने संबंधित व्यक्ति से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद कर्मचारी ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी कंपनी के मालिक को दी। मालिक ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी कर्मचारी को ऐसा भुगतान करने का निर्देश नहीं दिया था और न ही उस बैंक खाते से उनका कोई संबंध है।

घटना की पुष्टि होने पर कंपनी को एहसास हुआ कि वह सुनियोजित साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो चुकी है। इसके बाद कंपनी के प्रतिनिधियों ने साइबराबाद साइबर क्राइम पुलिस से संपर्क कर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल संचार और धन के प्रवाह की जांच शुरू कर दी है। साथ ही संबंधित बैंक से लेनदेन का विवरण भी जुटाया जा रहा है ताकि राशि को ट्रैक किया जा सके।

प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि ठगों ने कंपनी के आंतरिक कार्यप्रणाली और भुगतान प्रक्रिया की जानकारी जुटाने के बाद इस वारदात को अंजाम दिया। साइबर अपराधी अक्सर वरिष्ठ अधिकारियों या कंपनी मालिक के नाम से व्हाट्सऐप प्रोफाइल बनाकर कर्मचारियों को तत्काल भुगतान, गिफ्ट कार्ड खरीदने या गोपनीय वित्तीय लेनदेन करने के लिए कहते हैं। जल्दबाजी और विश्वास का फायदा उठाकर वे बड़ी रकम अपने नियंत्रण वाले खातों में ट्रांसफर करा लेते हैं।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि इस प्रकार की सोशल इंजीनियरिंग आधारित ठगी में अपराधी तकनीकी कमजोरी से अधिक मानवीय विश्वास का फायदा उठाते हैं। उनके अनुसार किसी भी बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले केवल व्हाट्सऐप संदेश या कॉल पर भरोसा नहीं करना चाहिए। भुगतान का निर्देश मिलने पर संबंधित अधिकारी से आधिकारिक नंबर पर सीधे बात कर उसकी पुष्टि करना अनिवार्य होना चाहिए। संस्थानों को दो-स्तरीय अनुमोदन प्रणाली और लिखित सत्यापन की व्यवस्था भी लागू करनी चाहिए।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को कर्मचारियों के लिए नियमित साइबर जागरूकता प्रशिक्षण आयोजित करना चाहिए ताकि वे ऐसे प्रतिरूपण हमलों की पहचान कर सकें। यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से नया नंबर इस्तेमाल करते हुए तत्काल भुगतान का दबाव बनाया जाए, बैंक खाते में अचानक बदलाव बताया जाए या गोपनीयता बनाए रखने को कहा जाए, तो उसे संभावित धोखाधड़ी मानकर स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना चाहिए।

पुलिस ने लोगों और संस्थानों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध डिजिटल वित्तीय निर्देश का पालन करने से पहले उसकी पुष्टि अवश्य करें। यदि साइबर धोखाधड़ी का संदेह हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, क्योंकि शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर ठगी की राशि रोकने या वापस दिलाने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक रहती है।

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