खुद को सरकारी ब्रोकर बताकर ठेकेदार से GeM की लॉगिन आईडी-पासवर्ड हासिल करने का आरोप; भुगतान अपने खाते में मंगाकर रकम निकालने और दूसरे खातों में ट्रांसफर करने की जांच

GeM पोर्टल पर ₹31.34 लाख की साइबर ठगी, ऑथराइजेशन कोड से जीता भरोसा; पासवर्ड लेकर बदला बैंक खाता

Roopa
By Roopa
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प्रयागराज: सरकारी खरीद के लिए इस्तेमाल होने वाले Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल पर ठेकेदार के साथ कथित साइबर धोखाधड़ी कर ₹31.34 लाख अपने खाते में ट्रांसफर कराने के मामले में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने कथित तौर पर खुद को सरकारी ब्रोकर बताकर ठेकेदार का भरोसा जीता और GeM पर काम दिलाने तथा उत्पादों के लिए OEM Authorization Code उपलब्ध कराने का दावा किया। भरोसा बनने के बाद उसने ठेकेदार की GeM लॉगिन आईडी और पासवर्ड हासिल कर लिया और कथित तौर पर पोर्टल पर दर्ज बेनिफिशियरी बैंक खाते की जानकारी बदल दी।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान नीलेश कुमार अहिरवार (33) निवासी कोटरा सुल्तानाबाद, कमला नगर, भोपाल, मध्य प्रदेश के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके कब्जे से कथित लेन-देन में इस्तेमाल Android मोबाइल फोन और SIM कार्ड बरामद किया है। आरोपी से पूछताछ के साथ उसके बैंक खातों और पैसों के लेन-देन की जांच की जा रही है।

सरकारी ब्रोकर बताकर बनाया भरोसा

जांच के अनुसार, आरोपी ने शिकायतकर्ता ठेकेदार से संपर्क कर खुद को सरकारी ब्रोकर बताया था। उसने दावा किया कि GeM पोर्टल पर पंजीकृत विभिन्न Original Equipment Manufacturer (OEM) कंपनियों के प्रतिनिधियों से उसकी अच्छी पहचान है। आरोपी ने ठेकेदार को अलग-अलग ब्रांड के उत्पाद बेचने के लिए आवश्यक OEM Authorization Code उपलब्ध कराने की बात कही और इसके बदले कमीशन लेने का प्रस्ताव रखा।

पुलिस के मुताबिक, शुरुआत में आरोपी ने शिकायतकर्ता को कई Authorization Code उपलब्ध कराए। ये कोड सही पाए गए, जिससे ठेकेदार का उस पर विश्वास बढ़ गया। इसी भरोसे का फायदा उठाकर आरोपी ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता से GeM पोर्टल की लॉगिन आईडी और पासवर्ड हासिल कर लिया।

लॉगिन एक्सेस मिलते ही बदली बैंक डिटेल

शिकायतकर्ता की ओर से दी गई लॉगिन जानकारी का इस्तेमाल करने के बाद आरोपी ने कथित तौर पर GeM पोर्टल पर दर्ज बेनिफिशियरी बैंक खाते की जानकारी बदल दी। जांच में आरोप है कि शिकायतकर्ता के वास्तविक बैंक खाते के स्थान पर आरोपी ने अपने निजी बैंक खाते का विवरण दर्ज कर दिया।

इसके बाद GeM पोर्टल से शिकायतकर्ता के लिए आने वाली भुगतान राशि कथित तौर पर आरोपी के बैंक खाते में पहुंचने लगी। पुलिस के अनुसार, इस तरीके से आरोपी ने कुल ₹31,34,612 अपने खाते में प्राप्त किए।

रकम निकालने और आगे ट्रांसफर की भी जांच

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने अपने खाते में आई रकम का इस्तेमाल निजी जरूरतों के लिए करने और कुछ राशि दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर करने की कथित कोशिश की। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि ₹31.34 लाख की पूरी रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया और किन-किन खातों में इसे आगे भेजा गया।

साइबर क्राइम थाना में शिकायत मिलने के बाद मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। डिजिटल और बैंकिंग लेन-देन से जुड़े साक्ष्यों की पड़ताल के दौरान आरोपी की कथित भूमिका सामने आई। इसके बाद पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

बैंक खातों और डिजिटल नेटवर्क की पड़ताल

आरोपी के मोबाइल फोन और SIM कार्ड को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस इनके जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से संपर्क के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया और उसके संपर्क में अन्य लोग भी थे या नहीं।

जांच में आरोपी के बैंक खातों में हुए लेन-देन, रकम की निकासी और दूसरे खातों में हुए ट्रांसफर का विवरण खंगाला जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इसी तरीके से अन्य GeM उपयोगकर्ताओं को भी निशाना बनाया गया।

यह मामला सरकारी ई-मार्केटप्लेस से जुड़े कारोबार में लॉगिन क्रेडेंशियल और बैंकिंग जानकारी की सुरक्षा की गंभीरता को सामने लाता है। किसी भी व्यक्ति या बिचौलिए को GeM खाते की लॉगिन आईडी और पासवर्ड साझा करने से पहले उसकी पहचान और भूमिका की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में कथित साइबर ठगी के नेटवर्क और रकम के अंतिम लाभार्थियों से जुड़ी और जानकारी सामने आने की संभावना है।

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