जयपुर/नई दिल्ली। फर्जी बैंक पहचान पत्र और दस्तावेजों के जरिए क्रेडिट कार्ड बेचने वाले कथित नेटवर्क का राजस्थान पुलिस ने दिल्ली पुलिस के सहयोग से खुलासा किया है। कार्रवाई के दौरान दिल्ली के उत्तम नगर स्थित ‘आनंद एंटरप्राइजेज’ के कार्यालय से 43 महिलाओं समेत कुल 83 लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस सभी संदिग्धों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जीवाड़े में किसकी क्या भूमिका थी और बैंक के नाम का इस्तेमाल किस स्तर तक किया जा रहा था।
मामले की शुरुआत राजस्थान के डीग स्थित Axis Bank शाखा से जुड़ी शिकायत के बाद हुई। शाखा प्रबंधक फूल सिंह ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, आजमगढ़ निवासी आकाश राठौर ने एक व्यक्ति को फोन कर खुद को Axis Bank का कर्मचारी बताया और उसे क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने की पेशकश की। जब सामने वाले व्यक्ति ने उसकी पहचान और बैंक से संबंध की पुष्टि करने के लिए दस्तावेज मांगे तो कथित तौर पर WhatsApp के जरिए Axis Bank का विजिटिंग कार्ड और पहचान पत्र भेजा गया।
बैंक की विजिलेंस टीम ने जब इन दस्तावेजों की जांच की तो दोनों कथित तौर पर फर्जी पाए गए। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए 28 अगस्त को डीग साइबर थाने में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद आकाश राठौर को गिरफ्तार किया और उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की।
पूछताछ और तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को दिल्ली के उत्तम नगर स्थित एक कार्यालय के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, आकाश राठौर से मिली जानकारी और तकनीकी सुरागों के आधार पर 29 अगस्त को डीएसपी वीरेंद्र पाल के नेतृत्व में राजस्थान पुलिस की टीम दिल्ली पहुंची। कार्रवाई के दौरान द्वारका जिला पुलिस और साइबर सेल की तकनीकी टीम ने भी सहयोग किया।
इसके बाद उत्तम नगर स्थित ‘आनंद एंटरप्राइजेज’ के कार्यालय पर छापा मारा गया। पुलिस के अनुसार, कार्यालय में बड़ी संख्या में कर्मचारी और ट्रेनिंग स्टाफ मौजूद था। मौके से कुल 83 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 43 महिलाएं शामिल थीं। पूछताछ और आगे की जांच के लिए सभी को राजस्थान के डीग ले जाया गया।
छापेमारी के दौरान पुलिस को कार्यालय की 47 वर्षीय मालिक और मैनेजर सलोनी मित्तल भी मिलीं। पूछताछ में उन्होंने कथित तौर पर बताया कि आनंद एंटरप्राइजेज की साझेदारी ‘आरकेपीएल सर्विसेज’ के साथ है और आरकेपीएल सर्विसेज का Axis Bank के साथ क्रेडिट कार्ड से संबंधित काम के लिए अनुबंध है। पुलिस अब इस दावे की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है कि कंपनी वास्तव में बैंक से अधिकृत रूप से जुड़ी थी या नहीं।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि कंपनी कथित तौर पर ग्राहकों का डेटा जुटाती थी और अपने कर्मचारियों के जरिए संभावित ग्राहकों को फोन करवाकर क्रेडिट कार्ड की पेशकश करती थी। जांच का अहम बिंदु यह है कि कर्मचारियों को उपलब्ध कराया जाने वाला ग्राहक डेटा कहां से आता था और उसमें लोगों की कौन-कौन सी व्यक्तिगत जानकारी शामिल थी।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ग्राहकों से संपर्क करते समय कर्मचारियों को बैंक के नाम और पहचान का इस्तेमाल करने के लिए किस स्तर पर निर्देश दिए जाते थे। फर्जी विजिटिंग कार्ड और पहचान पत्र तैयार करने, उन्हें WhatsApp के जरिए भेजने तथा ग्राहकों का भरोसा हासिल करने की पूरी प्रक्रिया की भी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियां अब कार्यालय से जुड़े डिजिटल उपकरणों, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, ग्राहक डेटा, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर सकती हैं। इससे कथित नेटवर्क के संचालन, कर्मचारियों की भूमिका और बैंकिंग संस्थान के नाम के कथित दुरुपयोग की तस्वीर साफ करने में मदद मिल सकती है।
पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या केवल क्रेडिट कार्ड बेचने के लिए बैंक की पहचान का इस्तेमाल किया जा रहा था या ग्राहकों से संवेदनशील वित्तीय जानकारी हासिल करने की भी कोशिश की जाती थी। यदि जांच में फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंक कर्मचारी बनकर ग्राहकों को गुमराह करने की पुष्टि होती है, तो मामले में आगे और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल 83 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका अलग-अलग तय की जाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित नेटवर्क का संचालन कितने समय से हो रहा था, कितने ग्राहकों से संपर्क किया गया और फर्जी बैंक पहचान का इस्तेमाल कितने मामलों में किया गया।
