नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद में सामने आए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले के बाद स्वास्थ्य विभाग ने खरीद व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। विभाग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत केंद्रीय खरीद प्रणाली (Centralised Procurement System) को फिलहाल स्थगित कर दिया है। अब सभी सरकारी अस्पतालों को दवाओं, सर्जिकल सामग्री, चिकित्सा उपकरणों और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सामग्री की खरीद स्वयं करने की अनुमति दी गई है। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) के माध्यम से की गई खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है।
मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें सरकारी अस्पतालों के लिए बेडशीट, लिनेन, ओआरएस और अन्य चिकित्सा सामग्री कथित तौर पर बाजार मूल्य से अधिक दरों पर खरीदी गई थी। इसी मामले में ACB ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी और बाद में केंद्रीय खरीद एजेंसी के तत्कालीन हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा, पूर्व महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. वत्सला अग्रवाल तथा CPA के तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार किया था। मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही होगा।
6 अगस्त को जारी स्वास्थ्य विभाग के आदेश के अनुसार, आवश्यक दवाओं और चिकित्सा सामग्री की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पहले इस प्रस्ताव को वित्त विभाग के पास भेजा गया था। वित्त विभाग ने बताया कि जून 2025 से खरीद प्रणाली को केंद्रीकृत किया गया था और इस नीति में किसी भी महत्वपूर्ण बदलाव को मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाना आवश्यक है। ऐसे में अंतिम नीति निर्णय होने तक अंतरिम व्यवस्था लागू करने पर सहमति दी गई।
नई व्यवस्था के तहत केंद्रीय खरीद एजेंसी द्वारा जारी सभी लंबित और अधूरी निविदाएं तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं। जिन अस्पतालों ने खरीद संबंधी मांगें भेजी थीं, उन्हें वापस संबंधित संस्थानों को लौटाया जाएगा ताकि वे लागू नियमों के अनुसार स्वयं खरीद प्रक्रिया पूरी कर सकें। इससे अस्पतालों को आवश्यक दवाओं और उपकरणों की आपूर्ति में संभावित देरी से बचाने का प्रयास किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान में प्रभावी दर अनुबंध (Rate Contracts) और खरीद समझौते उनकी अवधि समाप्त होने या निरस्त होने तक लागू रहेंगे। हालांकि, इन सभी अनुबंधों की कानूनी और प्रक्रियागत समीक्षा की जाएगी। यदि किसी अनुबंध में अनियमितता या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
आदेश के अनुसार, केंद्रीय खरीद एजेंसी के माध्यम से होने वाली अधिकांश खरीद फिलहाल रोक दी गई है। केवल आवश्यक दवाओं की खरीद के लिए सीमित व्यवस्था जारी रहेगी। जब तक CPA आवश्यक दवाओं के लिए नई दरें और अनुबंध अंतिम रूप नहीं दे देती, तब तक प्रत्येक सरकारी अस्पताल अपने विभागाध्यक्ष के माध्यम से आवश्यक दवा सूची (Essential Drug List) तथा उसके बाहर की दवाओं की खरीद स्वयं करेगा। इसी प्रकार सर्जिकल सामग्री, चिकित्सा उपकरण, उपभोग्य वस्तुओं और अन्य स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सामग्री की खरीद भी संबंधित अस्पतालों द्वारा सीधे की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे खरीद प्रक्रिया के दौरान मौजूदा वित्तीय और प्रशासनिक नियमों का पूर्ण पालन करें। विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक केंद्रीकृत खरीद प्रणाली के लिए आवश्यक कानूनी, वित्तीय, प्रशासनिक और डिजिटल ढांचा पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच के कारण अस्पतालों में उपचार सेवाएं प्रभावित न हों और मरीजों को दवाओं तथा चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी का सामना न करना पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतरिम व्यवस्था प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास है, लेकिन भविष्य में केंद्रीकृत खरीद प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तकनीक आधारित और मजबूत निगरानी तंत्र के साथ पुनर्गठित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। दूसरी ओर, ACB कथित खरीद अनियमितताओं से जुड़े वित्तीय लेनदेन, निविदा प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच जारी रखे हुए है। सरकार ने संकेत दिया है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे और प्रशासनिक तथा कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
