नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने ईस्ट कोस्ट रेलवे के वाल्टेयर मंडल के पूर्व मंडल रेल प्रबंधक सौरभ प्रसाद को कथित तौर पर ₹2.19 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है और आरोप लगाया है कि 2021 से 2024 के बीच उन्होंने अपनी ज्ञात वैध आय के मुकाबले काफी अधिक संपत्ति अर्जित की, जिसका संतोषजनक हिसाब नहीं दिया जा सका।
मामले की जांच 2024 में शुरू हुई थी। उस दौरान सीबीआई की दिल्ली इकाई ने भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों में मामला दर्ज करने के बाद सौरभ प्रसाद के आवास समेत अन्य ठिकानों पर तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान अधिकारियों को डॉलर, यूरो, मॉरीशस की मुद्रा और फ्रैंक समेत विभिन्न विदेशी मुद्राएं मिली थीं। इसके अलावा सोने के सिक्के, सोने और चांदी के आभूषण तथा आय, संपत्ति और खर्च से जुड़े कई दस्तावेज भी बरामद किए गए थे।
जांच आगे बढ़ने पर एजेंसी ने 2021 से 2024 के बीच सौरभ प्रसाद और उनके परिवार की आय, संपत्ति तथा खर्च का विस्तृत मिलान किया। सीबीआई के अनुसार, इस अवधि के दौरान उनकी संपत्ति में हुई वृद्धि उनकी ज्ञात वैध आय से मेल नहीं खाती थी। एजेंसी का आरोप है कि इसी अवधि में उन्होंने ₹2.19 करोड़ से अधिक की ऐसी संपत्ति अर्जित की, जिसका स्रोत वह संतोषजनक रूप से स्पष्ट नहीं कर सके।
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जांच के दौरान तैयार वित्तीय विवरण के अनुसार, जांच अवधि की शुरुआत में सौरभ प्रसाद के पास कुल संपत्ति करीब ₹1.04 करोड़ थी। अवधि के अंत में यह बढ़कर लगभग ₹5.40 करोड़ हो गई। इस दौरान उनकी कुल आय करीब ₹3.53 करोड़ आंकी गई, जबकि खर्च लगभग ₹1.35 करोड़ रहा।
सीबीआई के आकलन के मुताबिक जांच अवधि में करीब ₹4.36 करोड़ की संपत्ति अर्जित की गई। उपलब्ध आय और खर्च के आधार पर संभावित बचत लगभग ₹2.17 करोड़ बैठती थी, जबकि संपत्ति में वास्तविक वृद्धि और अन्य वित्तीय गणनाओं के आधार पर ₹2,19,07,575 की आय से अधिक संपत्ति सामने आई। एजेंसी ने इसे मामले में कथित अवैध संपत्ति का आधार बनाया है।
सौरभ प्रसाद ने भारतीय रेलवे में 1994 में सहायक यांत्रिक अभियंता के रूप में सेवा शुरू की थी। पदोन्नति के बाद उन्होंने रेलवे में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। 2018 से सितंबर 2021 तक वह कोंकण रेलवे में मुख्य यांत्रिक अभियंता के पद पर रहे। इसके बाद सितंबर 2021 से जुलाई 2023 तक उन्होंने मध्य रेलवे में मुख्य यांत्रिक अभियंता (योजना) के रूप में काम किया।
जुलाई 2023 में उन्हें ईस्ट कोस्ट रेलवे के वाल्टेयर मंडल का मंडल रेल प्रबंधक नियुक्त किया गया। उन्होंने नवंबर 2024 तक इस पद पर कार्य किया। जांच एजेंसी ने इसी अवधि समेत 2021 से 2024 के बीच उनकी आय और संपत्ति का वित्तीय परीक्षण किया।
सीबीआई के अनुसार, सौरभ प्रसाद के परिवार की वित्तीय स्थिति की भी जांच की गई। उनकी पत्नी मंजुश्री सौरभ प्रसाद जुलाई 2023 तक टाटा स्टील में कार्यरत थीं और इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी। जांच में उनके नाम से मकान किराये और परामर्श कार्य से होने वाली आय का भी उल्लेख किया गया है। उनकी मां गृहिणी हैं और जांच एजेंसी के अनुसार वह सौरभ प्रसाद पर निर्भर नहीं थीं।
सीबीआई ने मामले में तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य सामग्री को जांच का हिस्सा बनाया है। एजेंसी अब कथित आय से अधिक संपत्ति के स्रोत, संपत्तियों के अधिग्रहण और उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है।
सौरभ प्रसाद की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच आगे बढ़ने की संभावना है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अतिरिक्त संपत्ति किन माध्यमों से अर्जित की गई और क्या इसमें अन्य व्यक्तियों या संस्थाओं की कोई भूमिका थी। आय से अधिक संपत्ति के मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
