लखनऊ में हेल्थकेयर कंपनी के नाम पर ₹10.45 करोड़ ऋण में कथित फर्जीवाड़ा, ₹12 करोड़ के उपकरणों की कीमत ₹76 लाख आंकी गई।

पुलिस की गोपनीय आईडी से चल रहा था मोबाइल वसूली नेटवर्क, हेड कांस्टेबल समेत तीन पर केस

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By Roopa
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बदायूं। जरीफनगर थाने में तैनात हेड कांस्टेबल पर पद का दुरुपयोग कर गुम मोबाइलों की बरामदगी के नाम पर कथित वसूली का नेटवर्क चलाने का आरोप लगा है। आरोप है कि थाने के कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में तैनात हेड कांस्टेबल जावेद ने थाने की गोपनीय आईडी और पासवर्ड जनसेवा केंद्र संचालक को दे दिया था। इसके जरिए गुम मोबाइलों की ट्रैकिंग और बरामदगी से जुड़ी जानकारी पहले ही बाहर पहुंच जाती थी। बाद में पीड़ितों और मोबाइल रखने वाले लोगों को पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर कथित तौर पर रकम वसूली जाती थी। शिकायत की जांच के बाद हेड कांस्टेबल समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। हेड कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया, जबकि जनसेवा केंद्र संचालक प्रेमपाल उर्फ बंटी और उसके साथी रंजीत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

आरोप है कि थाने की गोपनीय आईडी और पासवर्ड मिलने के बाद जनसेवा केंद्र संचालक को अपनी दुकान से ही साइबर सेल से जुड़ी गतिविधियों और गुम मोबाइलों की ट्रैकिंग की जानकारी मिल जाती थी। किसी मोबाइल के गुम होने की शिकायत दर्ज होने के बाद जब वह फोन ट्रेस या बरामद होता, तो इसकी जानकारी पुलिस की कार्रवाई से पहले ही जनसेवा केंद्र संचालक तक पहुंच जाती थी। इसके बाद कथित तौर पर मोबाइल बरामद कराने या वापस दिलाने के नाम पर संबंधित लोगों से रकम मांगने का खेल शुरू होता था।

मामले का खुलासा जरीफनगर थाना क्षेत्र के रामपुर टप्पा वैश्य निवासी हरीश बाबू उर्फ हीरा सिंह की शिकायत के बाद हुआ। उनका मोबाइल फोन गुम हो गया था। उन्होंने गांव के पास पड़रिया स्थित प्रेमपाल उर्फ बंटी और रंजीत के जनसेवा केंद्र पर मोबाइल गुम होने की शिकायत दर्ज कराई थी। कुछ दिन बाद प्रेमपाल उनके घर पहुंचा और मोबाइल मिल जाने की जानकारी देते हुए कथित तौर पर उनसे खर्चा-पानी मांगने लगा।

हरीश बाबू ने जब सवाल किया कि पुलिस से पहले उसे मोबाइल के बारे में जानकारी कैसे मिली, तो आरोप है कि प्रेमपाल ने बताया कि जरीफनगर थाने के कंप्यूटर ऑपरेटर हेड कांस्टेबल जावेद ने उसे थाने का पासवर्ड दे रखा है। शिकायत के मुताबिक, इसी जानकारी का इस्तेमाल कर प्रेमपाल और रंजीत गुम मोबाइलों से संबंधित लोगों तक पहुंचते थे। आरोप है कि वे मोबाइल रखने वाले लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते और खुद को जरीफनगर पुलिस से जुड़ा बताकर मोबाइल अपने कब्जे में लेने की कोशिश करते थे।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

पीड़ित हरीश बाबू ने आरोप लगाया कि मोबाइल वापस करने के बदले उनसे पहले ₹4,000 की मांग की गई। बाद में यह रकम बढ़ाकर ₹10,000 कर दी गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि रकम नहीं देने पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद मामले की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तक पहुंची और पूरे प्रकरण की जांच कराई गई।

जांच में थाने की गोपनीय आईडी और पासवर्ड के कथित दुरुपयोग तथा मोबाइल ट्रैकिंग से संबंधित जानकारी बाहरी व्यक्ति तक पहुंचने के आरोपों की पड़ताल की गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर हेड कांस्टेबल जावेद, जनसेवा केंद्र संचालक प्रेमपाल और उसके साथी रंजीत के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

पुलिस कार्रवाई के तहत हेड कांस्टेबल जावेद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं प्रेमपाल और रंजीत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, 30 मोबाइल के खाली डिब्बे, 18 बैंक पासबुक, 11 आधार कार्ड, चार एटीएम कार्ड और कई पैन कार्ड बरामद किए हैं।

अब पुलिस बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर कथित नेटवर्क की पूरी गतिविधियों का पता लगाने में जुटी है। यह भी जांच की जा रही है कि थाने की गोपनीय जानकारी कितने समय से बाहर पहुंचाई जा रही थी और इस तरीके से कितने गुम मोबाइलों से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया। बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेजों के आधार पर कथित वसूली से जुड़े लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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