एसडीएम न्यायालय में अहलेमद फौजदारी लिपिक के पद पर तैनाती का भरोसा देकर रकम लेने का आरोप; तैनाती नहीं होने पर रुपये वापस मांगने पर कथित तौर पर टालमटोल, अदालत के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर

पोस्टिंग दिलाने के नाम पर ₹2 लाख लेने का आरोप, तत्कालीन तहसीलदार और मौजूदा डिप्टी कलेक्टर पर मुकदमा

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By Roopa
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अमरोहा। हसनपुर तहसील में एसडीएम न्यायालय के एक पद पर तैनाती दिलाने के नाम पर दो लाख रुपये लेने के आरोप में तत्कालीन तहसीलदार और वर्तमान में गोरखपुर में डिप्टी कलेक्टर के पद पर तैनात सुदीप कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि वर्ष 2024 में तहसील में तैनात एक कर्मचारी को अहलेमद फौजदारी लिपिक के पद पर तैनाती दिलाने का भरोसा दिया गया था। इसके बदले कथित तौर पर दो लाख रुपये लिए गए, लेकिन रकम देने के बाद भी तैनाती नहीं हुई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रुपये वापस मांगने पर भी उसे लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा।

मोहल्ला लालबाग निवासी मोहम्मद यूनुस ने मामले में न्यायालय में शिकायत दाखिल की थी। शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2024 में वह हसनपुर तहसील में उर्दू अनुवादक एवं सहायक वासिल बाकी नवीस के पद पर तैनात थे। इसी दौरान तत्कालीन तहसीलदार सुदीप कुमार से उनकी बातचीत हुई। आरोप है कि तहसीलदार ने उन्हें एसडीएम न्यायालय में अहलेमद फौजदारी लिपिक के पद पर तैनाती दिलाने का भरोसा दिया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, इस तैनाती के बदले दो लाख रुपये की मांग की गई थी। यूनुस का आरोप है कि उन्होंने अपने परिचित कामिल सैफी के माध्यम से एक जनवरी 2024 को दो लाख रुपये सुदीप कुमार तक पहुंचाए। रकम देने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही एसडीएम न्यायालय में उनकी तैनाती कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

यूनुस का कहना है कि काफी समय बीतने के बाद भी जब तैनाती नहीं हुई तो उन्होंने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की। आरोप है कि इस दौरान उन्हें बार-बार टाल दिया गया। कई बार संपर्क करने और रकम वापस मांगने के बावजूद पैसा नहीं लौटाया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस से मामले की शिकायत की और कार्रवाई की मांग की।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि पुलिस स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस को मुकदमा दर्ज कर जांच के निर्देश दिए। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने सुदीप कुमार के खिलाफ धोखाधड़ी समेत संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली।

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मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में सबसे पहले दो लाख रुपये के कथित लेनदेन से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि रकम किस माध्यम से दी गई, किसके जरिए पहुंचाई गई और उस समय तैनाती को लेकर शिकायतकर्ता तथा आरोपी के बीच क्या बातचीत हुई थी। रकम दिए जाने के दावे से जुड़े दस्तावेज, बैंक लेनदेन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है।

मामले में शिकायतकर्ता द्वारा जिस परिचित के माध्यम से रकम पहुंचाने की बात कही गई है, उससे भी पूछताछ की जा सकती है। पुलिस यह भी जांच करेगी कि कथित रूप से रकम लेने के बाद तैनाती को लेकर कोई प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ी थी या नहीं। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आरोपी की भूमिका तय की जाएगी।

सुदीप कुमार वर्तमान में गोरखपुर में डिप्टी कलेक्टर के पद पर तैनात हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने पोस्टिंग के नाम पर किसी से कोई रकम नहीं ली। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने जिस व्यक्ति को रुपये देने की बात कही है, उसी से इस संबंध में जानकारी ली जानी चाहिए।

फिलहाल मामला अदालत के आदेश पर दर्ज हुई प्राथमिकी के आधार पर जांच के चरण में है। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों, कथित लेनदेन और तैनाती के आश्वासन से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आरोपी की ओर से सभी आरोपों से इनकार किया गया है।

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