FATF प्रमुख ने चेताया है कि बड़े स्कैम कंपाउंड की जगह अब AI से लैस छोटे साइबर गैंग बड़े पैमाने पर ठगी चला रहे हैं।

सैकड़ों ठगों वाले कंपाउंड का दौर खत्म? एआई से लैस छोटे गैंग दे रहे जांच एजेंसियों को चुनौती

Team The420
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नई दिल्ली। साइबर ठगी का तरीका तेजी से बदल रहा है। सैकड़ों कर्मचारियों वाले बड़े-बड़े स्कैम कंपाउंड के बजाय अब एक-दो अपराधी एआई और शक्तिशाली सर्वर की मदद से जटिल धोखाधड़ी अभियान चला रहे हैं। इससे जांच एजेंसियों के लिए साइबर अपराधियों की पहचान करना और उनके ठिकानों तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अपराधों पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था के प्रमुख गाइल्स थॉमसन ने एआई के बढ़ते दुरुपयोग को गंभीर चिंता बताया है।

दक्षिण-पूर्व एशिया समेत कई क्षेत्रों में लंबे समय से बड़े स्कैम कंपाउंड संचालित होते रहे हैं। इन ठिकानों पर सैकड़ों लोग एक साथ बैठकर अलग-अलग देशों के लोगों को निवेश, क्रिप्टोकरेंसी, नौकरी, रोमांस और अन्य तरीकों से ठगी का शिकार बनाते हैं। ऐसे केंद्रों की पहचान के लिए जांच एजेंसियां उपग्रह तस्वीरों, वित्तीय लेनदेन और अन्य डिजिटल सुरागों का इस्तेमाल करती रही हैं। लेकिन अब अपराधी छोटे समूहों में बंटकर काम करने लगे हैं।

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थॉमसन के अनुसार, अब ऐसा भी देखने को मिल रहा है कि एक या दो लोग किसी बेसमेंट में बैठकर बड़े सर्वर की मदद से व्यापक साइबर ठगी अभियान चला रहे हैं। एआई ने अपराधियों को कम संसाधनों में ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाने और अलग-अलग पीड़ितों के लिए अलग तरीके से बातचीत करने की क्षमता दी है।

सबसे बड़ी चिंता एआई से तैयार होने वाली नकली पहचान और भरोसेमंद दिखने वाली सामग्री को लेकर है। अपराधी डीपफेक वीडियो, आवाज की नकल, फर्जी वेबसाइट और एआई आधारित चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं। चैटबॉट के जरिए वे सोशल मीडिया या अन्य ऑनलाइन मंचों पर वास्तविक व्यक्ति की तरह बातचीत कर सकते हैं। इस दौरान पहले पीड़ित का भरोसा जीता जाता है और बाद में उसे निवेश, क्रिप्टोकरेंसी या रोमांस के नाम पर रकम भेजने के लिए तैयार किया जाता है।

एआई का इस्तेमाल बैंकिंग व्यवस्था में फर्जी पहचान के जरिए प्रवेश हासिल करने में भी किया जा रहा है। अपराधी डीपफेक और डिजिटल क्लोन की मदद से किसी व्यक्ति की पहचान की नकल कर सकते हैं। इससे वित्तीय संस्थानों के लिए वास्तविक ग्राहक और कृत्रिम पहचान के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है।

एआई आधारित ठगी की बढ़ती क्षमता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि हालिया अंतरराष्ट्रीय आकलन में इसे पारंपरिक तरीकों की तुलना में 4.5 गुना अधिक लाभदायक पाया गया। 2024 के बाद से धोखाधड़ी से जुड़ी रिपोर्टों में भी 54 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एजेंटिक एआई ऐसे अभियानों को और खतरनाक बना सकता है, क्योंकि यह संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाने से लेकर संपर्क, धोखाधड़ी और फिरौती की मांग तक कई चरणों को स्वचालित करने में सक्षम है।

अमेरिका में भी एआई आधारित ठगी से होने वाले नुकसान को लेकर चिंता बढ़ी है। पिछले साल एआई के इस्तेमाल से हुई धोखाधड़ी के संबंध में करीब 89.3 करोड़ डॉलर यानी लगभग ₹7,900 करोड़ के नुकसान की शिकायतें दर्ज की गईं। जांच अधिकारियों के मुताबिक, एआई से तैयार की गई फर्जी सामग्री को पहचानना लगातार मुश्किल हो रहा है, जबकि ऐसी सामग्री तैयार करना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है।

बढ़ते खतरे के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच और रोकथाम की व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी है। प्रस्तावित रिपोर्ट में अधिक देशों से ऐसे एंटी-स्कैम केंद्र स्थापित करने की सिफारिश की जाएगी, जहां तकनीकी कंपनियां, बैंक, नियामक और कानून प्रवर्तन एजेंसियां एक-दूसरे के साथ तेजी से जानकारी साझा कर सकें। इसका उद्देश्य ठगी के शुरुआती संकेतों को पहचानना और कार्रवाई में लगने वाले समय को कम करना है।

हालांकि, एआई जांच एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण हथियार बन सकता है। थॉमसन के मुताबिक, अधिकारी एआई की मदद से खुद को ठगी के संभावित शिकार के रूप में पेश कर अपराधियों से बातचीत कर सकते हैं। इस तरह उनके नेटवर्क, काम करने के तरीके और वित्तीय गतिविधियों से जुड़ी जानकारी हासिल की जा सकती है।

एफएटीएफ ने वित्तीय धोखाधड़ी को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है और भविष्य में देशों की मनी लॉन्ड्रिंग रोधी व्यवस्थाओं के आकलन में उभरते तकनीकी खतरों को अधिक महत्व देने पर विचार किया जा रहा है। म्यांमार जैसे देशों पर भी साइबर स्कैम और व्यापक वित्तीय धोखाधड़ी पर पर्याप्त कार्रवाई के लिए दबाव बढ़ा है।

अमेरिका ने स्कैम कंपाउंड के खिलाफ कार्रवाई भी तेज की है। हालिया अभियान में मेडागास्कर में संचालित 13 कथित चीनी-प्रबंधित ठगी केंद्रों पर कार्रवाई की गई और करीब 5.2 करोड़ डॉलर यानी लगभग ₹460 करोड़ की क्रिप्टो संपत्ति फ्रीज की गई। इन संपत्तियों का संबंध कथित तौर पर स्कैम सेवाओं से जुड़े नेटवर्क से बताया गया।

वैश्विक स्तर पर वित्तीय धोखाधड़ी से होने वाला नुकसान पिछले साल करीब 442 अरब डॉलर यानी लगभग ₹3.7 लाख करोड़ आंका गया। ऐसे में एआई ने साइबर अपराधियों को कम लोगों और कम भौतिक संसाधनों में बड़े पैमाने पर ठगी करने की क्षमता देकर चुनौती और बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अब साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई केवल बड़े ठगी केंद्रों को बंद करने तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि एआई आधारित छोटे और अत्यधिक कुशल नेटवर्क की पहचान और निगरानी भी उतनी ही जरूरी होगी।

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