₹6.80 करोड़ के कथित फर्जी डायरेक्टर साइबर फ्रॉड में राजस्थान पुलिस ने बैंक खाते, ATM कार्ड और SIM उपलब्ध कराने के आरोप में 12वें आरोपी लक्ष्मण सिंह को गिरफ्तार किया है।

₹6.80 करोड़ के फर्जी डायरेक्टर साइबर फ्रॉड में 12वीं गिरफ्तारी, बैंक खाते और सिम जुटाने वाला आरोपी पकड़ा

Team The420
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जयपुर। ₹6.80 करोड़ के कथित फर्जी डायरेक्टर साइबर फ्रॉड मामले में राजस्थान पुलिस ने 12वें आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, बीकानेर निवासी लक्ष्मण सिंह उर्फ नीशू पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के लिए बैंक खाते, जरूरी दस्तावेज, सिम कार्ड और ठहरने की व्यवस्था करने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि कथित गिरोह ने एक निजी कंपनी के डायरेक्टर की पहचान का इस्तेमाल कर कंपनी के खातों से ₹6.80 करोड़ तीन बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए थे।

पुलिस के अनुसार, आरोपी लक्ष्मण सिंह साइबर ठगी से जुड़े लोगों के संपर्क में था और उनके लिए बैंकिंग सुविधाओं की व्यवस्था करने में मदद करता था। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, साइबर क्राइम के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर साइबर ठगों के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने के साथ होटल में ठहरने की व्यवस्था भी की।

जांच में यह भी सामने आया कि कथित गिरोह ने ठगी की रकम को अलग-अलग स्तरों पर घुमाने के लिए कई तरह के बैंकिंग और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया। इनमें म्यूल बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेक, यूपीआई, क्यूआर कोड, डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टोकरेंसी, जिसमें यूएसडीटी भी शामिल है, का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, ऐसे बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम और पासबुक किट टेलीग्राम समूहों के जरिये जुटाए जाते थे।

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पुलिस का कहना है कि ठगी की रकम पहले इन खातों में पहुंचाई जाती थी। इसके बाद रकम एटीएम से निकाली जाती, चेक या यूपीआई के जरिये दूसरे खातों में भेजी जाती अथवा क्यूआर कोड और कैश डिपॉजिट मशीन के माध्यम से आगे बढ़ाई जाती थी। बाद में रकम को कई बैंक खातों के जरिये घुमाकर उसका एक हिस्सा कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था। पुलिस अब इस पूरी धनराशि की आवाजाही और उससे जुड़े खातों की जांच कर रही है।

जांच के दौरान लक्ष्मण सिंह का संपर्क टेलीग्राम के एफ2एफ जयपुर दिल्ली नामक समूह के जरिये गिरोह के सदस्यों से होने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, 23 अगस्त को उसने रींगस के एक होटल में संदीप कुमार नामक व्यक्ति के लिए कमरा उपलब्ध कराया था। इसके बाद कथित तौर पर उसने संदीप से बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पहचान संबंधी कागजात और बैंक खाते से जुड़ा सिम कार्ड लिया।

पुलिस का आरोप है कि इस सिम का इस्तेमाल बैंक का मोबाइल ऐप सक्रिय करने के लिए किया गया। इसके बाद संबंधित बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड से हासिल रकम प्राप्त करने और उसे आगे ट्रांसफर करने में किया गया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि ऐसे कितने खाते खोले गए और उनका इस्तेमाल किस-किस लेनदेन में हुआ।

यह मामला जयपुर में अगस्त में दर्ज साइबर ठगी की शिकायत से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराधियों ने एक निजी कंपनी के कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच बनाई और व्हाट्सऐप वेब में छेड़छाड़ कर कंपनी के एक डायरेक्टर की पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल किया। डायरेक्टर के नाम और प्रोफाइल तस्वीर के साथ पहले की बातचीत जैसा संवाद तैयार कर कंपनी के लेखा विभाग से जुड़े अधिकारी का भरोसा हासिल किया गया।

इसके बाद कथित तौर पर डायरेक्टर बनकर तत्काल भुगतान करने के निर्देश दिए गए। भरोसे में आए कंपनी के अधिकारी ने 24 अगस्त को तीन बैंक खातों में कुल ₹6.80 करोड़ ट्रांसफर कर दिए। बाद में कंपनी को पता चला कि उसके किसी भी डायरेक्टर ने इन भुगतानों को मंजूरी नहीं दी थी। इसके बाद 25 अगस्त को केंद्रीय साइबर अपराध थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।

मामले की जांच अब केवल रकम ट्रांसफर करने वालों तक सीमित नहीं है। पुलिस बैंक खातों, सिम कार्ड, टेलीग्राम संपर्क, होटल रिकॉर्ड और डिजिटल लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर कथित नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल कर रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों की व्यवस्था करने वाले लोगों ने गिरोह को किस स्तर तक सहायता उपलब्ध कराई।

लक्ष्मण सिंह की गिरफ्तारी के साथ मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 12 हो गई है। पुलिस के मुताबिक, जांच जारी है और कथित साइबर गिरोह के अन्य सदस्यों तथा ₹6.80 करोड़ की रकम को अलग-अलग खातों और डिजिटल माध्यमों से आगे भेजने की पूरी श्रृंखला का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

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