सीतामढ़ी। भारत-नेपाल की खुली सीमा के बीच सीतामढ़ी के सीमावर्ती परिहार और बेला थाना क्षेत्रों में फर्जी भारतीय पहचान पत्र तैयार किए जाने के मामले सामने आने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने जांच तेज कर दी है। फर्जी आधार कार्ड बनाने के आरोप में कई लोगों की गिरफ्तारी के बाद सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि यह गिरोह नेपाली नागरिकों के लिए फर्जी आधार, निवास प्रमाण पत्र और अन्य भारतीय पहचान दस्तावेज तैयार करता था।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल भारतीय पहचान हासिल करने के साथ बैंक खाते खुलवाने, मोबाइल सिम लेने और किराये पर मकान हासिल करने में किया जा सकता है। इसके अलावा दिल्ली, मुंबई, पंजाब और हरियाणा जैसे बड़े शहरों में रोजगार हासिल करने के लिए भी इन दस्तावेजों के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाला नेटवर्क कितने लोगों तक फैला है और अब तक कितने दस्तावेज तैयार किए जा चुके हैं।
फर्जी पहचान पत्रों के सामने आए मामलों के बाद पुलिस ने साइबर कैफे और डिजिटल प्रिंटिंग सेंटरों की गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ा दी है। परिहार और बेला थाना क्षेत्रों में संचालित ऐसे केंद्रों की जांच की जा रही है। पुलिस यह सत्यापित कर रही है कि कहीं सेवा केंद्रों या साइबर कैफे की आड़ में फर्जी आधार, निवास प्रमाण पत्र अथवा अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज तो तैयार नहीं किए जा रहे हैं।
जांच में दस्तावेज तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कंप्यूटर, प्रिंटर, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य सामग्री की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस का उद्देश्य फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों के साथ-साथ उन्हें उपलब्ध कराने और इस्तेमाल करने वाले लोगों की भूमिका का पता लगाना है। इसके लिए संदिग्ध दस्तावेजों के डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। एसएसबी ने 51वीं बटालियन के कन्हवां बॉर्डर समेत अन्य चेकपोस्टों पर निगरानी बढ़ाई है। भारत और नेपाल के बीच आने-जाने वाले लोगों के पहचान पत्र और अन्य वैध दस्तावेजों की जांच की जा रही है। सुरक्षा बल यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि फर्जी भारतीय पहचान पत्रों के आधार पर कोई व्यक्ति सीमा पार कर देश में प्रवेश या निकास न कर सके।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, खुली सीमा होने के कारण दस्तावेजों की जांच और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी विशेष महत्व रखती है। पहचान पत्रों के भौतिक सत्यापन के साथ डिजिटल स्तर पर भी दस्तावेजों की प्रामाणिकता जांचने पर जोर दिया जा रहा है।
फर्जी पहचान दस्तावेजों का नेटवर्क सामने आना केवल दस्तावेजी धोखाधड़ी का मामला नहीं है, बल्कि इससे बैंकिंग, दूरसंचार और रोजगार व्यवस्था के दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में एक ही फर्जी पहचान का इस्तेमाल अलग-अलग सेवाओं में किए जाने से उसकी पहचान करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकता है। इसलिए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क की कड़ियों और उनके संभावित इस्तेमाल की भी जांच कर रही हैं।
सीमा पर पहचान पत्रों की जांच और डिजिटल सत्यापन की प्रक्रिया को और मजबूत किया जा रहा है। जांच एजेंसियां फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले आरोपियों के संपर्क, इस्तेमाल किए गए डिजिटल संसाधनों और तैयार किए गए दस्तावेजों का रिकॉर्ड जुटाकर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में लगी हैं।
