आगरा। आगरा में 12,125 किलो पुराने स्क्रैप को दूसरे राज्य से लाने-ले जाने के दस्तावेजों में कथित हेरफेर कर जीएसटी चोरी और राजस्व नुकसान का प्रयास करने का मामला सामने आया है। राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग की जांच में दावा किया गया कि स्क्रैप से लदा ट्रक कागजों में मध्य प्रदेश के शिवपुरी से आगरा पहुंचा दिखाया गया, जबकि चालक के बयान और ई-वे बिल की जीपीएस टोल लोकेशन से माल के आगरा के बोदला क्षेत्र से लोड किए जाने की जानकारी सामने आई। मामले में फर्म मालिक, वाहन चालक, वाहन मालिक और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
मामला पांच अगस्त का है। राज्य कर विभाग की टीम ने सिकंदरा स्थित आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर-4 में शनि मंदिर के पास जांच के दौरान पंजाब नंबर के एक ट्रक को रोका था। ट्रक में 12,125 किलो पुराना स्क्रैप लदा हुआ था। वाहन चालक पटियाला निवासी गोल्डी ने जांच के दौरान मैसर्स अग्रवाल स्क्रैप कंपनी, शिवपुरी, मध्य प्रदेश का डिलीवरी नोट प्रस्तुत किया।
दस्तावेजों में स्क्रैप को शिवपुरी से आगरा लाए जाने की जानकारी दी गई थी। माल की घोषित कीमत करीब ₹4.25 लाख बताई गई थी। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने वाहन की आवाजाही और ई-वे बिल से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू की। जांच के दौरान चालक के बयान से दस्तावेजों में दर्ज माल के स्रोत पर सवाल खड़े हुए।
चालक ने कथित तौर पर बताया कि स्क्रैप शिवपुरी से नहीं, बल्कि आगरा के बोदला क्षेत्र से ही ट्रक में लोड किया गया था। इसके बाद विभाग ने ई-वे बिल में दर्ज विवरण के आधार पर वाहन की जीपीएस और टोल लोकेशन की जांच की। इसमें शिवपुरी से आगरा तक ट्रक की कोई आवाजाही नहीं मिली। इससे विभाग को आशंका हुई कि माल के वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए फर्जी या गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
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जांच में यह भी सामने आया कि स्क्रैप को आगरा से पंजाब के गोविंदगढ़ ले जाया जा रहा था। विभाग ने दस्तावेजों, वाहन की आवाजाही और माल की वास्तविक स्थिति को आधार बनाकर इसे कथित कर चोरी और राजस्व को नुकसान पहुंचाने की कोशिश माना।
विभाग ने 22 अगस्त को मामले में ₹4.42 लाख का जुर्माना लगाया था। हालांकि, एक सितंबर तक निर्धारित अर्थदंड का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद विभाग ने मामले को केवल कर संबंधी अनियमितता न मानते हुए कथित सुनियोजित कर चोरी और राजस्व क्षति के प्रयास के रूप में देखा।
सहायक आयुक्त राज्य कर चंद्र भानु सरोज की तहरीर पर रकाबगंज थाने में मामला दर्ज कराया गया। मुकदमे में अग्रवाल स्क्रैप कंपनी के स्वामी सिद्धार्थ अग्रवाल, पटियाला निवासी वाहन चालक गोल्डी, वाहन मालिक प्रभनूर सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि स्क्रैप की वास्तविक खरीद और लोडिंग कहां हुई थी, माल से जुड़े दस्तावेज किसने तैयार किए और ई-वे बिल में शिवपुरी का विवरण किस आधार पर दर्ज किया गया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कथित कर चोरी से कितने राजस्व का नुकसान होने की कोशिश की गई और इस प्रक्रिया में अन्य लोगों की कोई भूमिका थी या नहीं।
मामले में वाहन की जीपीएस और टोल लोकेशन, ई-वे बिल, डिलीवरी नोट, स्क्रैप की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज और विभागीय जांच रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। पुलिस इन दस्तावेजों और आरोपियों के बयानों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
