कोच्चि। केरल के पेरुंबावूर में 56 वर्षीय एक महिला कथित डिजिटल गिरफ्तारी और क्रिप्टोकरेंसी ठगी का शिकार हो गई। अज्ञात आरोपी ने खुद को भारतीय वाणिज्य दूतावास का अधिकारी बताकर महिला को उसके बेटे के बैंक खाते से ₹9 करोड़ के कथित लेनदेन का हवाला दिया और गिरफ्तारी का डर दिखाया। इसके बाद कथित तौर पर ‘सत्यापन’ के नाम पर महिला से अलग-अलग बैंक खातों में मौजूद रकम स्थानांतरित कराई गई। जांच के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान महिला को करीब 27 दिनों तक ऑनलाइन निगरानी में रखा गया और उससे कुल ₹1.72 करोड़ की रकम ठग ली गई।
मामले में एर्नाकुलम ग्रामीण साइबर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब बैंक खातों से हुए लेनदेन, क्रिप्टोकरेंसी खरीद, डिजिटल वॉलेट और उससे जुड़े लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है।
बेटे के खाते से ₹9 करोड़ के लेनदेन का डर
प्राथमिकी के अनुसार, आरोपी ने महिला से संपर्क कर खुद को भारतीय वाणिज्य दूतावास का अधिकारी बताया। बातचीत के दौरान उसे बताया गया कि उसके बेटे के बैंक खाते से ₹9 करोड़ का लेनदेन किया गया है। आरोपी ने कथित तौर पर इस लेनदेन को गंभीर वित्तीय अपराध से जोड़ते हुए महिला को गिरफ्तारी की धमकी दी।
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इसके बाद महिला को यह विश्वास दिलाया गया कि उसके पास मौजूद धनराशि की जांच करना जरूरी है। कथित तौर पर उसे बताया गया कि सत्यापन पूरा होने और रकम को वैध पाए जाने के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा। इसी बहाने महिला को लगातार निर्देश दिए गए और वह आरोपी के बताए तरीके से अपने बैंक खातों में मौजूद धनराशि को स्थानांतरित करती चली गई।
8 जुलाई से 3 अगस्त तक डिजिटल निगरानी का आरोप
पुलिस के अनुसार, महिला को 8 जुलाई से 3 अगस्त तक कथित तौर पर डिजिटल निगरानी में रखा गया। इस दौरान आरोपी लगातार उसके संपर्क में रहा और उसे किसी अन्य व्यक्ति से मामले की जानकारी साझा नहीं करने तथा दिए गए निर्देशों का पालन करने के लिए दबाव में रखा गया।
साइबर ठगी के इस तरीके में अपराधी पीड़ित को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह किसी जांच एजेंसी की निगरानी में है और बातचीत या निर्देशों का उल्लंघन करने पर तत्काल गिरफ्तारी हो सकती है। भय और कानूनी कार्रवाई की आशंका के बीच पीड़ित से बैंक खातों, निवेश और धनराशि से जुड़ी जानकारी हासिल कर उसे पैसे स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया जाता है।
बैंक की रकम बिटकॉइन खरीदने में लगाई
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने महिला के लिए क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा एक खाता या वॉलेट तैयार कराया। इसके बाद महिला के दूसरे बैंक खातों में मौजूद अमेरिकी डॉलर की रकम को कथित तौर पर एक अन्य खाते के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी मंच स्ट्राइक से जुड़े वॉलेट में स्थानांतरित कराया गया।
आरोप है कि इस रकम से बिटकॉइन खरीदा गया। महिला को कथित तौर पर बताया गया कि खरीदा गया बिटकॉइन किसी जांच एजेंसी को भेजा जा रहा है और यह प्रक्रिया कथित वित्तीय जांच का हिस्सा है। इस तरह बैंकिंग प्रणाली से रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने के बाद उसे आरोपी के बताए डिजिटल पते या वॉलेट की दिशा में भेजे जाने का संदेह है।
क्रिप्टो लेनदेन की जांच में जुटी पुलिस
साइबर पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि महिला की रकम किन बैंक खातों से होकर क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट तक पहुंची और बिटकॉइन खरीदने के बाद उसकी अंतिम गतिविधि क्या रही। पुलिस क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन से जुड़े विवरण और वॉलेट की गतिविधियों की भी जांच कर रही है।
जांच का एक प्रमुख हिस्सा आरोपी की पहचान और उसके नेटवर्क तक पहुंचना है। बैंक खातों तथा डिजिटल लेनदेन के रिकॉर्ड के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ठगी की रकम किन खातों या डिजिटल वॉलेट में पहुंची और उसके बाद उसे किस तरह आगे स्थानांतरित किया गया।
यह मामला डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर होने वाली ठगी में एक और खतरनाक बदलाव को सामने लाता है, जिसमें पारंपरिक बैंक खातों से रकम निकलवाने के बाद पीड़ित को क्रिप्टोकरेंसी खरीदने के लिए तैयार किया जाता है। पुलिस ऐसे मामलों में लोगों से किसी भी अधिकारी के फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी के डर से पैसे या डिजिटल संपत्ति स्थानांतरित नहीं करने की अपील करती रही है।
