नई दिल्ली। हजारों व्हाट्सऐप संदेशों और सैकड़ों फोन कॉल ने अमेरिका में आव्रजन लाभ से जुड़े कथित रिश्वतखोरी के एक बड़े मामले की परतें खोल दी हैं। अभियोजकों के अनुसार, अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी लुकमान ओवोलाबी गनियू और उसके कथित वित्तीय सहयोगी अदेनियी अकीम सोमोये पर आव्रजन आवेदनों में हेरफेर कर आवेदकों से करीब 9.6 लाख डॉलर की रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है।
संघीय अभियोजकों के अनुसार, दोनों के खिलाफ सरकारी अधिकारी द्वारा अवैध लाभ लेने की साजिश से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। कथित गतिविधियां दिसंबर 2019 से मार्च 2026 तक चलीं। जांच में सामने आया कि कुछ आवेदकों ने अपने मामलों को सामान्य प्रक्रिया से जल्दी आगे बढ़ाने और विशेष सुविधा हासिल करने के लिए आरोपियों को रकम दी।
जांच में डिजिटल संवाद को अहम सबूत माना जा रहा है। अभियोजकों के मुताबिक, गनियू, सोमोये और उन लोगों के बीच हजारों व्हाट्सऐप संदेश तथा सैकड़ों फोन कॉल मिले, जिनके आव्रजन आवेदन इन दोनों के संपर्क में थे। जांचकर्ताओं का आरोप है कि इन संदेशों और कॉल के जरिए आवेदकों से संपर्क बनाए रखा जाता था और भुगतान के बदले उनके आव्रजन मामलों को तेजी से आगे बढ़ाने की व्यवस्था की जाती थी।
आरोपों के मुताबिक, गनियू ने USCIS में अपने पद का कथित दुरुपयोग करते हुए पैसे देने वाले आवेदकों के मामलों में सामान्य प्रक्रिया को दरकिनार किया। अभियोजकों का कहना है कि कुछ मामलों को आपराधिक पृष्ठभूमि जांच, व्यक्तिगत साक्षात्कार, नियमित प्रसंस्करण और अन्य जरूरी समीक्षा पूरी किए बिना आगे बढ़ाया गया।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि गनियू ने USCIS की प्रणाली में दर्ज जानकारी में कथित तौर पर बदलाव भी किए। उसने कुछ मामलों को मिनियापोलिस, चार्लोट और ह्यूस्टन स्थित USCIS कार्यालयों से हटाकर अपने पास स्थानांतरित किया, ताकि वह उन आवेदनों को स्वयं मंजूर कर सके। इससे स्थानीय पर्यवेक्षकों और सामान्य प्रशासनिक निगरानी को कथित तौर पर दरकिनार किया गया।
शिकायत में यह भी आरोप है कि गनियू ने पहले सोमोये के नागरिकता आवेदन को कथित रूप से तेजी से आगे बढ़ाया और इसके बाद उसकी पत्नी तथा बच्चे के स्थायी निवास से जुड़े आवेदन भी मंजूर किए।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
अभियोजकों के अनुसार, गनियू को नागरिकता आवेदकों से करीब 6,71,438 डॉलर मिले। यह रकम कथित तौर पर जेली और कैश ऐप जैसे डिजिटल भुगतान माध्यमों से भेजी गई। इसके अलावा करीब 2,87,830 डॉलर नकद जमा के जरिए दिए गए, जिनके बारे में जांचकर्ताओं का आरोप है कि इनका उद्देश्य रकम के वास्तविक स्रोत को छिपाना था।
सोमोये पर कथित तौर पर वित्तीय मध्यस्थ की भूमिका निभाने का आरोप है। अभियोजकों के मुताबिक, उसने आवेदकों से जुड़े करीब 17 लाख डॉलर के लेनदेन को बैंक खातों, जेली और कैश ऐप के माध्यम से संभाला और कथित तौर पर उसमें से कुछ रकम अपने पास रखी। उसने करीब 4,49,010 डॉलर नकद भी जमा किए। जांचकर्ताओं के अनुसार, गनियू और सोमोये के बीच आवेदकों से जुड़ी रकम का बार-बार लेनदेन होता रहा।
अभियोजन पक्ष का कहना है कि दोनों से जुड़े अधिकांश नागरिकता आवेदन अफ्रीकी देशों के नागरिकों से संबंधित थे। कथित रिश्वतखोरी का यह सिलसिला छह साल से अधिक समय तक चला और मार्च 2026 तक जारी रहा।
गनियू ने मार्च में USCIS से इस्तीफा दे दिया था। उसने इस्तीफे के लिए निजी कारणों का हवाला दिया था। इसके कुछ महीनों बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अब संघीय अदालत में आरोपों से जुड़े साक्ष्यों की जांच होगी और अभियोजन पक्ष को कथित रिश्वतखोरी तथा सरकारी प्रक्रिया में हेरफेर के आरोपों को साबित करना होगा।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, ऐसे मामलों में डिजिटल संवाद केवल संपर्क का रिकॉर्ड नहीं होता, बल्कि वह कथित वित्तीय लेनदेन, लाभार्थियों और निर्णय प्रक्रिया के बीच संबंध स्थापित करने में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकता है। उन्होंने कहा कि हजारों संदेशों और कॉल के साथ बैंक लेनदेन, डिजिटल भुगतान और सरकारी प्रणाली में किए गए बदलावों को जोड़कर देखा जाए तो जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क और धन के प्रवाह की स्पष्ट तस्वीर तैयार कर सकती हैं।
मामले में अब जांचकर्ताओं का ध्यान डिजिटल संदेशों, फोन रिकॉर्ड, बैंक खातों, डिजिटल भुगतान और USCIS प्रणाली में किए गए कथित बदलावों के बीच संबंध स्थापित करने पर है। आरोप साबित होने तक दोनों आरोपियों को कानून के तहत निर्दोष माना जाएगा और आगे की स्थिति अदालत में होने वाली कार्यवाही से तय होगी।
