लखनऊ। मेरठ से गिरफ्तार किए गए जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी मोहम्मद जफर से पूछताछ के लिए आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) उसे रिमांड पर लेने की तैयारी कर रहा है। जांच एजेंसी को उसके मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों से ऐसे कई लोगों के बारे में जानकारी मिलने का दावा है, जो कथित तौर पर उसके संपर्क में थे। इनमें स्लीपर सेल के लिए काम करने वाले संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
एटीएस का मानना है कि जफर से विस्तृत पूछताछ में उसके संपर्कों, आतंकी संगठन से जुड़े नेटवर्क और संभावित प्रशिक्षण योजना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। एजेंसी जल्द ही अदालत में रिमांड के लिए आवेदन दाखिल करने की तैयारी में है। जांच का एक प्रमुख उद्देश्य उन लोगों तक पहुंचना है, जिनके साथ जफर लगातार संपर्क में था और जिन्हें कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा रहा था।
मस्जिद से गिरफ्तारी के बाद सामने आया नेटवर्क
जफर को 16 अगस्त को मेरठ के कोतवाली क्षेत्र स्थित एक मस्जिद से गिरफ्तार किया गया था। वह मूल रूप से बिहार के पूर्णिया का रहने वाला बताया गया है। जांच के अनुसार, वह हापुड़ की एक मस्जिद में इमाम के रूप में काम कर रहा था। आरोप है कि उसने मस्जिद निर्माण के नाम पर लोगों से चंदा जुटाया और उस रकम को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद तक पहुंचाने का प्रयास किया।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि धन जुटाने की पूरी प्रक्रिया किस तरह संचालित होती थी और इसमें उसके साथ कौन-कौन लोग जुड़े थे। इसके अलावा रकम के संभावित स्रोत और उसके हस्तांतरण के तरीकों की भी पड़ताल की जा रही है।
इंटरनेट के जरिए आतंकी संगठन के संपर्क में आने का दावा
एटीएस की जांच के मुताबिक, जफर करीब दो वर्ष पहले इंटरनेट के माध्यम से जैश-ए-मोहम्मद के संपर्क में आया था। बताया गया है कि वह संगठन के सरगना मसूद अजहर से प्रभावित था। इसके बाद कथित तौर पर संगठन के संचालकों ने उसे स्लीपर सेल तैयार करने का लक्ष्य दिया।
जांच के दौरान जफर के पास से एक किताब मिलने की बात भी सामने आई है। इसमें मसूद अजहर के तिहाड़ जेल में रहने और कंधार विमान अपहरण के बाद तीन आतंकियों की रिहाई से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख बताया गया है। एजेंसी इस सामग्री और जफर की गतिविधियों के बीच संबंधों की भी जांच कर रही है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
प्रशिक्षण के लिए कैंप में जाने वाला था
जांच में यह भी सामने आया है कि जफर हथियार चलाने और अन्य आतंकी गतिविधियों का प्रशिक्षण लेने के लिए जैश-ए-मोहम्मद के किसी प्रशिक्षण शिविर में जाने की तैयारी में था। हालांकि, इससे पहले ही एटीएस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अब एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसे किस स्थान पर प्रशिक्षण के लिए बुलाया गया था और इसके लिए किसने उससे संपर्क किया था।
जफर के मोबाइल फोन से मिले संपर्कों की जांच भी इसी दिशा में की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उसके संपर्क में मौजूद संदिग्धों की भूमिका केवल संपर्क तक सीमित थी या वे किसी संगठित स्लीपर सेल का हिस्सा थे।
कई संदिग्धों पर नजर
जांच एजेंसी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती जफर के कथित नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचना है। उसके डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों से मिले सुरागों के आधार पर संदिग्धों की पहचान और उनकी गतिविधियों का सत्यापन किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर पूछताछ के आधार पर आगे गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं।
एटीएस के अनुसार, पिछले चार महीनों में आतंकवाद से जुड़े मामलों में कई मुकदमे दर्ज किए गए हैं और 52 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। जफर की रिमांड के बाद पूछताछ से उसके नेटवर्क, संभावित स्लीपर सेल और आतंकी संगठन से जुड़े संपर्कों के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
