प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में नौकरी दिलाने का झांसा देकर मध्य प्रदेश के एक युवक से ₹15 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया है। खुल्दाबाद क्षेत्र में रहने वाले मां-बेटे पर आरोप है कि उन्होंने नौकरी लगवाने का भरोसा देकर युवक और उसके परिवार से नकद तथा ऑनलाइन माध्यम से रकम ली। इसके बाद युवक को कथित तौर पर फर्जी पहचान पत्र, प्रवेश पास और नियुक्ति पत्र भी दे दिया गया। रकम वापस मांगने पर धमकी देने का भी आरोप है।
मध्य प्रदेश के कटनी निवासी रजनी जानोकर की शिकायत पर खुल्दाबाद थाने में आरोपी ज्योति बैरी और उसके बेटे देवेश बैरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचना समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है।
नौकरी लगवाने का भरोसा देकर ली रकम
शिकायत के मुताबिक, रजनी जानोकर की बहन ज्योति बैरी सिविल लाइंस स्थित डायट के सर्वेंट क्वार्टर में रहती है। आरोप है कि ज्योति और उसके बेटे देवेश ने रजनी के बेटे प्रेम जानोकर की इलाहाबाद हाईकोर्ट में नौकरी लगवाने का भरोसा दिया।
परिवार को विश्वास में लेने के बाद आरोपियों ने कथित तौर पर नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच अलग-अलग मौकों पर कुल ₹15 लाख लिए। शिकायत में कहा गया है कि रकम का भुगतान कुछ हिस्सा नकद और कुछ ऑनलाइन माध्यम से किया गया।
परिवार को उम्मीद थी कि रकम देने के बाद प्रेम की नौकरी हाईकोर्ट में लग जाएगी। आरोप है कि रकम लेने के बाद आरोपियों ने नौकरी से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए, जिससे कुछ समय तक परिवार को नियुक्ति होने का भरोसा बना रहा।
फर्जी आईडी कार्ड और नियुक्ति पत्र देने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने प्रेम जानोकर को हाईकोर्ट में प्रवेश से जुड़े दस्तावेजों के तौर पर एक कथित आईडी कार्ड और एंट्री पास दिया। इसके अलावा उसे जॉइनिंग लेटर भी सौंपा गया। बाद में इन दस्तावेजों के फर्जी होने की जानकारी सामने आने पर परिवार को कथित ठगी का पता चला।
जब पीड़ित पक्ष ने आरोपियों से नौकरी और दिए गए दस्तावेजों के बारे में जवाब मांगा तथा अपनी रकम वापस करने को कहा, तो विवाद बढ़ गया। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने रकम लौटाने के बजाय कथित तौर पर धमकी दी।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
पुराने बैंक का चेक देने का आरोप
शिकायतकर्ता के मुताबिक, लगातार रकम वापस मांगने के बाद आरोपियों ने ₹15 लाख का एक चेक दिया। आरोप है कि यह चेक ऐसे इलाहाबाद बैंक का था, जिसका विलय पहले ही दूसरे बैंक में हो चुका था। इस वजह से शिकायतकर्ता ने चेक को लेकर भी सवाल उठाए और पुलिस से मामले की शिकायत की।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी आईडी कार्ड, प्रवेश पास और नियुक्ति पत्र कैसे तैयार किए। इन दस्तावेजों की वास्तविकता की भी जांच की जाएगी।
लेनदेन और दस्तावेजों की होगी जांच
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस नकद और ऑनलाइन माध्यम से किए गए कथित भुगतान की जानकारी जुटा रही है। बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि ₹15 लाख की रकम किस तरह और किन माध्यमों से आरोपियों तक पहुंची।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या आरोपियों ने इससे पहले किसी अन्य व्यक्ति को भी सरकारी या न्यायिक संस्थान में नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। यदि ऐसे कोई अन्य मामले सामने आते हैं तो पुलिस उनके संबंध में भी जानकारी जुटा सकती है।
फिलहाल मामले में आरोप पुलिस शिकायत और दर्ज मुकदमे पर आधारित हैं। पुलिस दस्तावेजों, लेनदेन और दोनों पक्षों के बयानों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।
