हैदराबाद। तेलंगाना में साइबर ठगी के पैसों को बैंक खातों के जरिए इधर-उधर करने वाले नेटवर्क के खिलाफ तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (TGCSB) और खम्मम पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। 2 और 3 सितंबर को चलाए गए दो दिवसीय अभियान में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वित्तीय जांच के दौरान 30 बैंक शाखाओं से जुड़े 121 म्यूल खातों की पहचान हुई। इन खातों से जुड़े लेनदेन में ₹7.84 करोड़ की संदिग्ध रकम सामने आई, जिसमें ₹6.23 करोड़ को विवादित धन के तौर पर चिन्हित किया गया है। इसके अलावा, बड़ी रकम की एटीएम निकासी से जुड़े 273 खातों और 25 संदिग्ध ठिकानों की भी पहचान की गई है।
यह अभियान उन लोगों के खिलाफ चलाया गया, जो कथित तौर पर साइबर अपराधियों को अपने या अन्य लोगों के बैंक खाते उपलब्ध कराकर ठगी की रकम को प्राप्त करने, दूसरे खातों में भेजने और नकदी के रूप में निकालने में मदद कर रहे थे। पुलिस ने वित्तीय खुफिया जानकारी और पहले दर्ज साइबर अपराध मामलों में सामने आए लेनदेन के आधार पर बैंक शाखाओं, एटीएम केंद्रों और अन्य संदिग्ध स्थानों को चिन्हित किया था।
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कार्रवाई की शुरुआत वी.एम. बंजारा और सथुपल्ली थानों में दर्ज दो मामलों की जांच से जुड़ी है। इन मामलों को बाद में TGCSB को स्थानांतरित कर दोबारा पंजीकृत किया गया। जांच में आरोपियों के बैंक खातों और साइबर अपराध से जुड़े लेनदेन के बीच संबंध सामने आए। अधिकारियों को ऐसे खातों का नेटवर्क मिला, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में भेजने और उसकी पहचान छिपाने के लिए किया जा रहा था।
जांच में कुछ बैंक खातों के तार टेलीग्राम समूहों के जरिए संचालित ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े लेनदेन से भी मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन समूहों के विदेशी संचालकों से संबंध होने की आशंका है। इससे पुलिस को स्थानीय स्तर पर खाते उपलब्ध कराने वाले लोगों के साथ-साथ व्यापक अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क की कड़ियों की जांच का आधार मिला है।
नवीनतम अभियान के दौरान बी. मुरली कृष्ण और वी. सैनीवास को गिरफ्तार किया गया। दोनों पर कथित तौर पर साइबर अपराध से जुड़े लेनदेन के लिए 10 म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों का संचालन कौन कर रहा था और इनके जरिए पहुंचाई गई रकम का अंतिम लाभार्थी कौन था।
TGCSB के वित्तीय विश्लेषण में 30 बैंक शाखाओं में फैले 121 म्यूल खातों का पता चला। इसके अलावा 273 ऐसे बैंक खातों को चिन्हित किया गया, जिनसे बड़ी रकम की एटीएम निकासी जुड़ी हुई थी। पुलिस ने ₹20,000 से अधिक की चेक निकासी वाले 12 खातों को भी संदिग्ध माना है। जांच टीमों ने नेटवर्क से जुड़े संभावित 25 ठिकानों की पहचान कर वहां सत्यापन और पूछताछ की कार्रवाई की।
अधिकारियों के अनुसार, इन खातों और संदिग्ध स्थानों का संबंध तेलंगाना के अलावा देश के अन्य हिस्सों में दर्ज साइबर अपराध शिकायतों से भी सामने आया है। इससे जांच एजेंसियों को आशंका है कि खम्मम में सक्रिय वित्तीय नेटवर्क किसी बड़े अंतरराज्यीय साइबर अपराध ढांचे का हिस्सा हो सकता है। पुलिस खाताधारकों, खाते संचालित करने वालों और रकम प्राप्त करने वाले वास्तविक लाभार्थियों के बीच संबंधों की जांच कर रही है।
अभियान के लिए 11 विशेष टीमों का गठन किया गया था, जिनमें 40 पुलिसकर्मी शामिल थे। इन टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर एक साथ कार्रवाई करते हुए संदिग्ध बैंक खातों और उनसे जुड़े लोगों का सत्यापन किया। कार्रवाई के दौरान आठ पुलिस थानों में कुल 25 प्राथमिकी दर्ज की गईं। पुलिस का फोकस अब ऐसे खातों को उपलब्ध कराने वालों की भूमिका और उनके साइबर ठगी गिरोहों से संबंधों का पता लगाने पर है।
म्यूल बैंक खाते साइबर ठगी के मामलों में अपराधियों के लिए रकम को कई स्तरों पर स्थानांतरित करने का माध्यम बनते हैं। ठगी के बाद पैसा सीधे मुख्य आरोपी के खाते में रखने के बजाय कई खातों में भेजा जाता है। इसके बाद रकम एटीएम निकासी, चेक या अन्य डिजिटल माध्यमों से आगे पहुंचाई जा सकती है। इससे जांच एजेंसियों के लिए वास्तविक अपराधी और रकम के अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
खम्मम में हुई कार्रवाई इसी वित्तीय श्रृंखला को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांचकर्ताओं का अगला लक्ष्य 121 म्यूल खातों के वास्तविक संचालकों, 273 संदिग्ध निकासी वाले खातों और उनसे जुड़े लाभार्थियों की पहचान करना है। साथ ही, पुलिस यह भी पता लगा रही है कि स्थानीय स्तर पर बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग दूसरे राज्यों में सक्रिय साइबर ठगी गिरोहों और विदेशी संचालकों से किस तरह जुड़े हुए हैं।
