फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अश्लील कंटेंट के जरिए यूजर्स को मालवेयर डाउनलोड कराने की कोशिश; फर्जी Android ऐप OTP और बैंकिंग PIN चुराकर कर सकते थे अनधिकृत लेनदेन, 2025 में भारत में साइबर फ्रॉड से करीब ₹20,000 करोड़ का नुकसान

पोर्न ऐप बनकर बैंकिंग डेटा चुराने वाले 39 Scam Ads हटाए Meta ने, भारत की चेतावनी के बाद लिया एक्शन

Roopa
By Roopa
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बेंगलुरु। भारत सरकार की चेतावनी के बाद Meta ने Facebook और Instagram से दर्जनों ऐसे विज्ञापन हटा दिए हैं, जिनमें अश्लील कंटेंट का इस्तेमाल कर यूजर्स को मालवेयर डाउनलोड करने के लिए लुभाया जा रहा था। इन विज्ञापनों के जरिए यूजर्स को फर्जी वेबसाइटों पर भेजा जाता था और वहां आधिकारिक ऐप स्टोर के बाहर Android application package (APK) फाइल डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता था। ऐसे दुर्भावनापूर्ण ऐप फोन में मौजूद संवेदनशील जानकारी, बैंकिंग credentials और one-time passwords तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

भारत सरकार ने सोमवार को ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के इस नए पैटर्न को लेकर advisory जारी की थी। सरकार के अनुसार, Facebook और Instagram पर “Night Play” और “Kyss” जैसे नामों से चल रहे विज्ञापन यूजर्स को phishing websites पर ले जा रहे थे। इन वेबसाइटों पर ऐसे Android applications का प्रचार किया जा रहा था, जो खुद को pornography apps के रूप में पेश कर रहे थे, लेकिन उनके भीतर डिवाइस को नुकसान पहुंचाने वाला malicious software हो सकता था।

सरकारी advisory जारी होने के बाद Reuters ने Meta के प्लेटफॉर्म पर ऐसे कम से कम 39 विज्ञापन पाए, जो अभी भी सक्रिय थे। कई विज्ञापनों में sexually explicit video thumbnails का इस्तेमाल किया गया था, ताकि यूजर्स आकर्षित होकर उन पर क्लिक करें। Reuters ने इन विज्ञापनों और सरकार की advisory की जानकारी Meta को दी। इसके कुछ ही समय बाद कंपनी ने सभी संबंधित विज्ञापनों को हटा दिया।

Meta ने इस मामले में Reuters के सवालों का जवाब नहीं दिया। कंपनी की advertising policies में adult nudity और sexual activity वाले विज्ञापनों पर रोक है। इसके अलावा ऐसे products, services, schemes और offers के विज्ञापनों पर भी प्रतिबंध है, जिनमें deceptive या misleading practices का इस्तेमाल किया जाता है या जिनका उद्देश्य यूजर्स से धोखाधड़ी करना होता है।

एक विज्ञापन की जांच में पाया गया कि वह एक ऐसी वेबसाइट पर ले जा रहा था, जो एक video application का प्रचार कर रही थी। वेबसाइट पर सैकड़ों pornography videos और चौबीसों घंटे content उपलब्ध होने का दावा किया गया था। Content देखने के लिए यूजर्स को “Movexa.apk” नाम की फाइल सीधे डाउनलोड करने के लिए कहा जा रहा था। यह फाइल किसी official app store के बजाय बाहरी वेबसाइट से डाउनलोड करनी थी, जिससे डिवाइस की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता था।

भारत सरकार की advisory के अनुसार, ऐसे malicious applications यूजर के फोन में मौजूद जानकारी तक गुप्त रूप से पहुंच बना सकते हैं। वे one-time passwords और bank PIN जैसी संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसी जानकारी अपराधियों के हाथ लगने पर वे पीड़ित के बैंक खाते से उसकी जानकारी या अनुमति के बिना रकम ट्रांसफर करने का प्रयास कर सकते हैं।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh ने ऐसे मामलों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, साइबर अपराधी अब सीधे बैंकिंग credentials मांगने के बजाय पहले यूजर की जिज्ञासा और रुचि का फायदा उठाते हैं। इसके बाद उसे किसी संदिग्ध application को install करने के लिए तैयार किया जाता है। ऐप को आवश्यक permissions मिलने के बाद अपराधी डिवाइस की संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने और वित्तीय खातों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं।

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साइबर सुरक्षा के लिहाज से social engineering और malicious APK distribution का यह संयोजन बेहद खतरनाक है। अपराधी पहले आकर्षक विज्ञापन के जरिए यूजर का ध्यान खींचते हैं और फिर उसे बाहरी वेबसाइट पर भेजते हैं। इसके बाद official app store की सुरक्षा व्यवस्था को दरकिनार कर अज्ञात स्रोत से application install कराया जाता है। एक बार ऐप फोन में इंस्टॉल हो जाने और उसे जरूरी permissions मिल जाने के बाद संवेदनशील डेटा के दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है।

भारत में डिजिटल भुगतान के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर फ्रॉड का आर्थिक प्रभाव भी लगातार बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत में साइबर फ्रॉड के कारण लोगों को करीब $2.4 billion यानी लगभग ₹20,000 करोड़ का नुकसान हुआ। अपराधी अब पारंपरिक phishing के साथ social media advertisements, fraudulent applications और deceptive websites का इस्तेमाल भी कर रहे हैं।

यह हाल के हफ्तों में भारत सरकार द्वारा किसी बड़े technology platform के खिलाफ उठाई गई दूसरी महत्वपूर्ण कार्रवाई है। इससे पहले सरकार ने Google के Firebase platform पर मौजूद सैकड़ों accounts को बंद करने का निर्देश दिया था। जांच में सामने आया था कि अपराधी इन accounts का इस्तेमाल प्रमुख बैंकों का रूप धारण कर लोगों को धोखा देने के लिए कर रहे थे।

Meta को अपने प्लेटफॉर्म पर scam advertisements को लेकर पहले भी जांच और आलोचना का सामना करना पड़ा है। Reuters ने पिछले वर्ष रिपोर्ट किया था कि Meta ने आंतरिक रूप से अनुमान लगाया था कि scam और banned-goods advertising से 2024 में उसकी लगभग 10% revenue, यानी करीब $16 billion, जुड़ी हो सकती है। कंपनी ने ऐसे विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई मजबूत करने की बात कही है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर ऐसा कोई भी विज्ञापन जो यूजर को official app store के बाहर APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहे, उसे गंभीर खतरे के संकेत के रूप में देखना चाहिए। यूजर्स को अज्ञात वेबसाइटों से ऐप डाउनलोड करने से बचना चाहिए और SMS, contacts, notifications, accessibility services या financial information से जुड़ी अनावश्यक permissions किसी संदिग्ध ऐप को नहीं देनी चाहिए।

भारत सरकार की चेतावनी के बाद 39 विज्ञापनों को हटाया जाना यह दिखाता है कि social media platforms पर deceptive campaigns की निगरानी कितनी चुनौतीपूर्ण है। हालांकि, ऐसे scam advertisements और fraudulent websites को अपराधी तेजी से दोबारा तैयार कर सकते हैं। ऐसे में platform-level कार्रवाई के साथ यूजर्स की सतर्कता भी वित्तीय नुकसान रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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