नई दिल्ली। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ₹7.8 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के मामले में मुख्य आरोपी की पत्नी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। मामला 71 वर्षीय एक वरिष्ठ नागरिक से कथित तौर पर उसकी जीवनभर की बचत और संपत्ति बेचकर जुटाई गई रकम ठगने से जुड़ा है। आरोप है कि मुख्य आरोपी ने खुद को पूर्व वायुसेना कर्मी और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) का वैज्ञानिक बताकर पीड़ित को प्रभावशाली लोगों से अपने संपर्क होने का भरोसा दिलाया।
मामले में पीड़ित को कथित तौर पर “पुरानी दूरबीनों” और रॉकेट तकनीक में इस्तेमाल होने वाले एक “दुर्लभ रेडियोधर्मी पदार्थ” से जुड़े निवेश का लालच दिया गया। आरोपी ने इन कथित परियोजनाओं से भारी आर्थिक लाभ मिलने का भरोसा दिलाया। पुलिस और अभियोजन पक्ष के अनुसार, इसी भरोसे के आधार पर पीड़ित से अलग-अलग समय पर बड़ी रकम हासिल की गई।
अग्रिम जमानत की याचिका मुख्य आरोपी की पत्नी ने दायर की थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुमीत गोयल की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष आरोप लगाया कि कथित धोखाधड़ी से हासिल की गई रकम का एक हिस्सा मुख्य आरोपी की पत्नी के बैंक खाते में भी जमा किया गया था। यह लेनदेन करीब साढ़े चार साल की अवधि में होने का दावा किया गया है।
अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष ने इस वित्तीय लेनदेन को मामले की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। आरोप है कि पीड़ित से हासिल रकम केवल मुख्य आरोपी तक सीमित नहीं रही, बल्कि उससे जुड़े बैंक खातों में भी पहुंचाई गई। ऐसे में जांच के दौरान धन के प्रवाह और आरोपियों की कथित भूमिका का पता लगाना महत्वपूर्ण माना गया।
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यह मामला खास तौर पर इसलिए गंभीर है क्योंकि कथित तौर पर पीड़ित की उम्र 71 वर्ष है और ठगी में उसकी जीवनभर की बचत के साथ संपत्ति की बिक्री से मिली रकम भी शामिल थी। आरोपियों ने रक्षा क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं और तकनीकी रूप से दुर्लभ पदार्थ का हवाला देकर निवेश को विश्वसनीय दिखाने की कोशिश की। DRDO और वायुसेना से कथित संबंधों का इस्तेमाल भी पीड़ित का भरोसा हासिल करने के लिए किए जाने का आरोप है।
अदालत के रुख से साफ है कि आर्थिक अपराध के मामलों में अग्रिम जमानत पर विचार करते समय कथित वित्तीय लेनदेन और आरोपी की भूमिका जांच का अहम हिस्सा हो सकती है। खासकर तब, जब अभियोजन पक्ष किसी आरोपी के बैंक खाते में कथित ठगी की रकम पहुंचने का दावा कर रहा हो।
मामले में मुख्य आरोपी की पहचान खुद को रक्षा क्षेत्र से जुड़ा प्रभावशाली व्यक्ति बताने वाले व्यक्ति के तौर पर सामने आई है। उस पर कथित तौर पर बुजुर्ग को निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये देने के लिए तैयार करने का आरोप है। अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि पीड़ित से ली गई रकम किन खातों में गई और कथित निवेश तथा रक्षा परियोजनाओं के नाम पर बनाए गए दावों के पीछे वास्तविकता क्या थी।
हाईकोर्ट द्वारा पत्नी को अग्रिम जमानत से इनकार किए जाने के बाद मामले की जांच में बैंक खातों और कथित वित्तीय लेनदेन की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। अदालत के आदेश से यह भी संकेत मिलता है कि जांच के इस चरण में आरोपों की प्रकृति और कथित धन हस्तांतरण को देखते हुए आरोपी को गिरफ्तारी से पूर्व संरक्षण देना उचित नहीं माना गया।
