बेंगलुरु। कर्नाटक पुलिस की अपराध जांच विभाग (CID) ने 400 वेटरनरी ऑफिसरों की भर्ती में कथित अनियमितताओं के मामले में IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को गिरफ्तार किया है। वह इस मामले में गिरफ्तार होने वाले पहले आरोपी हैं। गंगवार ने फरवरी 2024 से मार्च 2026 तक कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में परीक्षा नियंत्रक के पद पर काम किया था। CID ने उनसे लगातार दो दिन पूछताछ के बाद यह कार्रवाई की।
जांच एजेंसी के अनुसार, भर्ती परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी के प्रथमदृष्टया साक्ष्य सामने आए हैं। इनमें OMR शीट में संभावित हेरफेर से जुड़े तथ्य भी शामिल हैं। CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान OMR शीट के साथ किस स्तर पर छेड़छाड़ हुई और इसमें गंगवार समेत अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की क्या भूमिका थी।
8 जनवरी को हुई थी परीक्षा
वेटरनरी ऑफिसर पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा 8 जनवरी 2026 को आयोजित की गई थी। इसके बाद 17 जुलाई को अंतिम चयन सूची जारी की गई। परीक्षा में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद मामले की जांच CID को सौंपी गई।
जांच के दौरान CID ने परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की 329 OMR शीट को विस्तृत परीक्षण के लिए राज्य फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा है। फॉरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उत्तर पुस्तिकाओं में किसी तरह का बदलाव या हेरफेर किया गया था या नहीं।
जांच एजेंसी परीक्षा के अलग-अलग चरणों में OMR शीट के रखरखाव, सुरक्षित रखने और मूल्यांकन की प्रक्रिया की भी जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित हेरफेर की स्थिति में जिम्मेदारी किस स्तर पर बनती है।
होटल और रिसॉर्ट में ट्रेनिंग का भी आरोप
CID की जांच केवल OMR शीट तक सीमित नहीं है। एजेंसी इस आरोप की भी पड़ताल कर रही है कि कुछ अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया से पहले या उसके दौरान होटल और रिसॉर्ट में प्रशिक्षण दिया गया था। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इन प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किसने किया, इनमें कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या इनका परीक्षा में कथित अनियमितताओं से कोई संबंध था।
गंगवार पर बढ़ी थी जांच की नजर
KPSC भर्ती मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से तलाशी की कार्रवाई के बाद गंगवार भी जांच के दायरे में आए थे। इसके बाद वह CID के समक्ष पेश हुए और परीक्षा नियंत्रक के रूप में अपने कार्यकाल से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ का सामना किया।
जांचकर्ता अब यह पता लगा रहे हैं कि उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए किसी निर्णय या प्रशासनिक प्रक्रिया का कथित अनियमितताओं से कोई संबंध था या नहीं। साथ ही परीक्षा प्रक्रिया में शामिल अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
निलंबित KPSC अध्यक्ष से भी पूछताछ
CID ने मामले में निलंबित KPSC अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकर से भी पूछताछ की है। आयोग के कई अन्य अधिकारियों से भी जानकारी ली गई है। जांच एजेंसी अब भर्ती प्रक्रिया में जिम्मेदारी की पूरी श्रृंखला स्थापित करने का प्रयास कर रही है।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि KPSC के अधिकारी, परीक्षा से जुड़े कर्मचारी, बिचौलिए या अभ्यर्थी कथित तौर पर आपस में समन्वय कर रहे थे या नहीं। इसके अलावा किसी संभावित वित्तीय लेन-देन और उसके भर्ती प्रक्रिया से संबंध की भी पड़ताल की जा रही है।
और गिरफ्तारियां संभव
गंगवार की गिरफ्तारी मामले में पहली बड़ी हिरासत कार्रवाई है। अब CID तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों, पूछताछ से सामने आई जानकारी और 329 OMR शीट की फॉरेंसिक जांच के परिणामों को आपस में जोड़कर देख रही है।
जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों का चयन सूची पर क्या प्रभाव पड़ता है और क्या किसी अभ्यर्थी को कथित तौर पर अनुचित लाभ मिला। यदि जांच में अन्य अधिकारियों, आयोग के सदस्यों, कर्मचारियों, बिचौलियों या अभ्यर्थियों की भूमिका के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो उनसे आगे पूछताछ के साथ गिरफ्तारी भी हो सकती है।
फिलहाल CID की जांच जारी है। 400 वेटरनरी ऑफिसरों की भर्ती से जुड़े इस मामले में OMR शीट की फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य डिजिटल एवं दस्तावेजी साक्ष्य आगे की कार्रवाई तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।
