कोटा: साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए पुलिस ने कोटा में कथित कॉल सेंटर चलाने वाले मास्टरमाइंड मोहम्मद अशफाक समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, अशफाक ने बेंगलुरु के एक कॉल सेंटर में काम करने के दौरान शेयर ट्रेडिंग के नाम पर साइबर ठगी का तरीका सीखा और बाद में भोपाल, इंदौर और मुंबई में इसी तरह के नेटवर्क से जुड़ा। अनुभव हासिल करने के बाद उसने कोटा में रिश्तेदारों की मदद से अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 102 मोबाइल फोन, 11 लैपटॉप, डेस्कटॉप, हार्ड डिस्क, डायरी-रजिस्टर और अन्य उपकरणों के साथ ₹65,000 बरामद किए हैं।
पुलिस के मुताबिक, 28 वर्षीय अशफाक जोधपुर जिले के बोरखाना क्षेत्र का रहने वाला है और पोस्टग्रेजुएट है। उसके साथ गिरफ्तार चार अन्य आरोपी भी उसके रिश्तेदार बताए गए हैं। इनमें बीकानेर निवासी आवेश, नागौर निवासी सैयद अली और जावेद अली तथा जोधपुर निवासी मजीद खान शामिल हैं। पुलिस अब इन सभी की भूमिका के साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
जांच के अनुसार, अशफाक ने 2020-21 में बेंगलुरु के एक कॉल सेंटर में काम किया था। वहां उसने कथित तौर पर शेयर ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को निवेश के लिए फंसाने का तरीका सीखा। इसके बाद उसने भोपाल में भी इसी तरह के कॉल सेंटर में काम किया और बाद में इंदौर तथा मुंबई में ऐसे नेटवर्क से जुड़ा। गिरफ्तारी के डर से करीब डेढ़ साल पहले वह कोटा आ गया और यहां नए सिरे से नेटवर्क तैयार करने लगा।
कोटा पहुंचने के बाद उसने पहले स्थानीय प्लेसमेंट एजेंसी से संपर्क किया और गुमानपुरा क्षेत्र में उमेश सदन के पास कार्यालय किराए पर लिया। पुलिस का कहना है कि अशफाक को लगता था कि पुरुषों की तुलना में महिला की आवाज पर लोग जल्दी भरोसा करते हैं। इसी रणनीति के तहत उसने प्लेसमेंट एजेंसियों और OLX के जरिए युवतियों को सामान्य नौकरी का झांसा देकर भर्ती किया। उन्हें डेटा एंट्री और कस्टमर केयर जैसे काम बताए गए, लेकिन बाद में कथित तौर पर साइबर ठगी की कॉलिंग में लगा दिया गया।
पुलिस के अनुसार, लड़कियों को करीब सात दिन की ट्रेनिंग दी जाती थी। कॉल सेंटर में एक बोर्ड पर संभावित ग्राहकों के सवाल और उनके तैयार जवाब लिखे जाते थे। कर्मचारियों को पहले बातचीत शुरू करने, सामने वाले की आर्थिक स्थिति और निवेश में रुचि समझने तथा फिर उसे ट्रेडिंग के लिए राजी करने का तरीका सिखाया जाता था। कुछ लड़कियों को बाद में नए कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी भी दी गई।
जांच में सामने आया कि कोटा में तीन कॉल सेंटर संचालित किए जा रहे थे, जिनमें दो गुमानपुरा और एक छावनी क्षेत्र में था। करीब 52 लड़कियों को ग्राहकों से संपर्क करने के लिए कीपैड मोबाइल फोन दिए गए थे। अशफाक खुद करीब छह मोबाइल फोन इस्तेमाल करता था। पुलिस अब इन मोबाइलों और SIM कार्ड के कॉल रिकॉर्ड, संपर्क और अन्य तकनीकी जानकारी खंगाल रही है।
कर्मचारियों को प्रतिदिन करीब 100 कॉल करने का लक्ष्य दिया जाता था। पुलिस के अनुसार, इनमें से पांच से 10 लोग कथित तौर पर निवेश के लिए तैयार हो जाते थे। पहले फोन पर भरोसा कायम किया जाता, फिर पीड़ित को एक फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजा जाता। वेबसाइट पर उसका अकाउंट बनाकर शेयर और विदेशी मुद्रा कारोबार के नाम पर रकम जमा कराई जाती थी।
पुलिस का आरोप है कि फर्जी वेबसाइट का डोमेन विदेश में पंजीकृत कराया गया था और भरोसा बढ़ाने के लिए उस पर फर्जी विदेशी प्रमाणपत्र भी प्रदर्शित किया गया। जांचकर्ता अब वेबसाइट के डोमेन, सर्वर, निर्माण और संचालन से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल कर रहे हैं।
पुलिस को यह भी पता चला है कि ठगी की रकम हासिल करने के लिए कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। कुछ खाते कथित तौर पर खरीदे या किराए पर लिए गए थे। खाताधारकों से चेक, नेट बैंकिंग की जानकारी और ATM कार्ड तक लिए जाने का आरोप है। बदले में 10 से 30 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। रकम आने के बाद खाताधारक कथित तौर पर कमीशन काटकर बाकी पैसा नेटवर्क के लोगों को सौंप देते थे।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, ऐसे मामलों में फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म, महिला कॉलर्स और mule accounts का संयोजन ठगी की प्रक्रिया को कई स्तरों पर छिपाने में मदद करता है। बैंकिंग ट्रेल, मोबाइल डेटा, वेबसाइट की तकनीकी जानकारी और डिजिटल संचार को एक साथ जोड़कर जांच करने से नेटवर्क की वास्तविक संरचना सामने आ सकती है।
पुलिस के अनुसार, अशफाक का मासिक खर्च ₹4 लाख से अधिक था। वह गुमानपुरा और छावनी में किराए की इमारतों के अलावा बोरखेड़ा के नीलकंठ अपार्टमेंट में परिवार के साथ रहता था। कर्मचारियों को ₹6,000-7,000 मासिक वेतन के साथ कथित ठगी की रकम पर कमीशन दिया जाता था। पुलिस ने उसके पास दो आधार कार्ड होने की जानकारी भी जुटाई है, जिनमें अलग-अलग पते दर्ज बताए गए हैं। मामले में अब मनी ट्रेल और नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
