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मुंबई पुलिस के ₹6.41 करोड़ वेतन घोटाले में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी गिरफ्तार, 10 फर्जी कर्मचारियों के नाम पर होती रही सैलरी

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By Roopa
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मुंबई: मुंबई पुलिस के वेतन घोटाले की जांच में क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तरी क्षेत्रीय विभाग के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी रामकिशन गणेश गोस्वामी (61) को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान 10 ऐसे लोगों को पुलिस विभाग का कर्मचारी दिखाकर वर्षों तक वेतन भुगतान किया गया, जो वास्तव में पुलिसकर्मी नहीं थे। इस फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी खजाने से करीब ₹6.41 करोड़ की रकम निकाली गई। जांच एजेंसी ने इस मामले में पांच अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आने की बात कही है, जिन्हें फिलहाल फरार आरोपी बताया गया है।

क्राइम ब्रांच की यूनिट-12 ने गोस्वामी को कांजुरमार्ग ईस्ट स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया। जांच के अनुसार, जिस अवधि में कथित फर्जीवाड़ा हुआ, उस समय गोस्वामी उत्तरी क्षेत्रीय विभाग में प्रशासनिक अधिकारी के साथ Drawing and Disbursing Officer (DDO) की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पुलिस का आरोप है कि वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और प्रक्रिया में उनकी भूमिका की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज सामने आए।

मामला उस समय सामने आया जब पुलिस विभाग के पुराने Sevarth वेतन पोर्टल से कर्मचारियों का डेटा नए सॉफ्टवेयर सिस्टम में स्थानांतरित किया जा रहा था। डेटा मिलान के दौरान वेतन भुगतान से संबंधित कई विसंगतियां मिलीं। इसके बाद विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई। जांच में पता चला कि दिसंबर 2019 से सितंबर 2020 के बीच 10 ऐसे लोगों के नाम पर फर्जी सर्विस आईडी तैयार की गईं, जो पुलिस विभाग के कर्मचारी नहीं थे।

जांच के मुताबिक, इन फर्जी आईडी के आधार पर बाकायदा वेतन बिल तैयार किए गए और उन्हें मंजूरी भी दी गई। इसके बाद वेतन की रकम बैंक खातों में ट्रांसफर होती रही। पुलिस के अनुसार, Axis Bank के माध्यम से कुल ₹6.41 करोड़ की अतिरिक्त वेतन राशि 163 बैंक खातों में पहुंचाई गई। ये खाते गैर-पुलिसकर्मियों के बताए गए हैं। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों से रकम किस तरह निकाली गई और कथित घोटाले में प्रत्येक आरोपी की वास्तविक भूमिका क्या थी।

एफआईआर में फर्जी कर्मचारियों के रूप में रामदास भोगले, सुधाकर कदम, सरजू यादव, भगवत भोसले, गुनाजी खवकर, महादेव हल्दनकर, राजेंद्र सोनार, उत्तम थोरात, सूर्यकांत पाटिल और पांडुरंग कदम के नाम दर्ज हैं। इनके अलावा प्रशासनिक अधिकारी नागेश तलवाडेकर तथा क्लर्क विजय चव्हाण, अजय राठौड़ और वरिष्ठ क्लर्क अमोल मेश्राम समेत अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने इन पांचों को फरार आरोपी बताया है।

प्रारंभिक मामला समता नगर पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 409, 420, 406, 467, 465, 471, 201, 120बी और 34 के तहत दर्ज किया गया था। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। इसके बाद जांच टीम ने उत्तरी क्षेत्रीय विभाग से संबंधित दस्तावेज जुटाए।

इन दस्तावेजों में आरोपियों की पोस्टिंग और जिम्मेदारियों से जुड़े रिकॉर्ड, सर्विस आईडी बनाने के फॉर्म, वेतन बिल, कैश-बुक एंट्री और बैंक के साथ वेतन भुगतान को लेकर हुआ पत्राचार शामिल है। जांचकर्ताओं ने पे ब्रांच में इस्तेमाल किए जा रहे कंप्यूटर सिस्टम की जांच और उसकी डिजिटल इमेजिंग भी की है। इससे कथित फर्जी आईडी, वेतन बिल तैयार करने और भुगतान प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

क्राइम ब्रांच अब गिरफ्तार आरोपी गोस्वामी से पूछताछ कर कथित घोटाले की पूरी प्रक्रिया और अन्य आरोपियों की भूमिका स्पष्ट करने में जुटी है। जांच का एक प्रमुख बिंदु यह भी है कि फर्जी कर्मचारियों के नाम पर सर्विस आईडी किस स्तर पर बनाई गईं, वेतन बिलों को किसने तैयार और मंजूर किया तथा 163 बैंक खातों तक सरकारी रकम पहुंचाने की प्रक्रिया में किन लोगों ने सहयोग किया। पुलिस को उम्मीद है कि दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से पूरे वेतन घोटाले की कड़ी सामने आ सकती है।

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