केरल हाईकोर्ट ने SNDP योगम माइक्रोफाइनेंस घोटाले में अभियोजन मंजूरी पर देरी को लेकर गृह विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है।

केरल हाईकोर्ट ने माइक्रोफाइनेंस घोटाले की जांच रिपोर्ट पर जताई नाराजगी, जांच अधिकारी को 14 अगस्त को तलब किया

Roopa
By Roopa
5 Min Read

कोच्चि: केरल हाईकोर्ट ने एसएनडीपी योगम के सदस्यों के लिए संचालित माइक्रोफाइनेंस योजना में कथित वित्तीय धोखाधड़ी की जांच को लेकर क्राइम ब्रांच की प्रगति रिपोर्ट पर असंतोष जताया है। अदालत ने रिपोर्ट में आवश्यक विवरण नहीं होने पर जांच अधिकारी एस. ससीधरन को 14 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन की पीठ कर रही है।

यह मामला चेरथला निवासी एम.एस. अनिल की ओर से 2020 में दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में माइक्रोफाइनेंस योजना में कथित अनियमितताओं की व्यापक और प्रभावी सतर्कता जांच की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने इसके लिए ईमानदार और सक्षम अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठित करने की मांग की थी।

मामले में पहले जांच अधिकारी की ओर से हाईकोर्ट में एक रिपोर्ट दाखिल की गई थी। इसमें बताया गया था कि 17 मामलों में संबंधित सतर्कता विशेष अदालतों के समक्ष अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है। वहीं 30 मामलों की जांच में ऐसी कोई अनियमितता नहीं मिली, जिसके आधार पर अभियोजन चलाया जा सके।

हालांकि, जांच रिपोर्ट में कुछ स्थानों पर लाभार्थियों के लिए निर्धारित धनराशि के कथित दुरुपयोग और गबन के मामले सामने आने की जानकारी भी दी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, पल्पल्ली, रन्नी, मनंतवाडी, कनयन्नूर, कुझत्तुनाडु, चित्तूर और तलिपरंबा स्थित यूनियनों से जुड़े मामलों में पात्र लाभार्थियों के लिए निर्धारित धनराशि को कथित तौर पर दूसरी जगह इस्तेमाल करने या गबन करने के विशिष्ट मामले सामने आए।

अदालत ने मंगलवार को रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए पाया कि इसमें कुल दर्ज मामलों की संख्या और प्रत्येक मामले से संबंधित आवश्यक विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है। पीठ ने कहा कि जांच की प्रगति का आकलन करने के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है। इसी आधार पर अदालत ने जांच अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

मामला एसएनडीपी योगम से जुड़े माइक्रोफाइनेंस कार्यक्रम में कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है। इस योजना का उद्देश्य पात्र सदस्यों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना था। आरोपों में योजना के तहत उपलब्ध कराई गई रकम के कथित दुरुपयोग और पात्र लाभार्थियों तक धन नहीं पहुंचने से जुड़े मामले शामिल हैं।

जांच के दौरान सामने आए मामलों में अलग-अलग यूनियनों में धन के कथित डायवर्जन और गबन के आरोपों की पड़ताल की गई। क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट में कुछ मामलों में कार्रवाई आगे बढ़ने की जानकारी दी गई, जबकि अन्य मामलों में अभियोजन योग्य सामग्री नहीं मिलने की बात कही गई।

हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल मामलों की संख्या बताना पर्याप्त नहीं है। अदालत यह जानना चाहती है कि कुल कितने मामले दर्ज किए गए, प्रत्येक मामले में क्या आरोप थे, जांच किस स्तर पर पहुंची और किन मामलों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई। इसी कारण जांच अधिकारी को अगली सुनवाई में विस्तृत जानकारी के साथ उपस्थित होने को कहा गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से दायर मूल याचिका में योजना की जांच के लिए विशेष टीम की मांग की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि माइक्रोफाइनेंस योजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं की प्रभावी तरीके से जांच की आवश्यकता है। अदालत में मामले की सुनवाई जारी है।

अब 14 अगस्त की सुनवाई में जांच अधिकारी को अदालत के समक्ष जांच की पूरी स्थिति रखने होगी। उनसे कुल मामलों की संख्या, दर्ज मामलों का विवरण, जांच की प्रगति, दाखिल की गई अंतिम रिपोर्ट और उन मामलों की जानकारी मांगी जा सकती है, जिनमें कथित धन के डायवर्जन या गबन के आरोप सामने आए हैं।

हाईकोर्ट के ताजा निर्देश से माइक्रोफाइनेंस योजना से जुड़े मामलों की जांच पर निगरानी और कड़ी हो गई है। अदालत के समक्ष जांच अधिकारी की उपस्थिति के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कितने मामलों में कार्रवाई आगे बढ़ी है और कितने मामलों में जांच एजेंसी को अभियोजन योग्य साक्ष्य नहीं मिले।

हमसे जुड़ें

Share This Article